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क्रिसमस से पहले 24,16,000,00 रुपये में बिकी ईसा मसीह की पेंटिंग, 400 साल से खोई कलाकृति में क्या है खास?

1 Dec, 2025 12:08 pm
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Jesus Christ painting by Rubens sold for $2.7 million.

ईसा मसीह पर बनी रूबेन्स की रेयर पेंटिंग 27 लाख डॉलर में बिकी. फोटो- एआई जेनेरेटेड (फ्रीपिक).

Jesus Christ rare painting by Rubens sold for 2.7 million dollar: पेरिस के एक निजी टाउनहाउस में मिली और रविवार को वर्सलीज में आयोजित नीलामी में रुबेन्स की जीसस क्राइस्ट पर बेस्ड एक दुर्लभ पेंटिंग 24 करोड़ 16 लाख से ज्यादा रुपयों में बिकी. यह पेंटिंग पिछले 400 सालों से गायब थी.

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Jesus Christ rare painting by Rubens sold for 2.7 million dollar: बारोक युग के महान चित्रकार पीटर पॉल रूबेन्स की एक लंबे समय से लापता मानी जाने वाली पेंटिंग ने कला जगत में फिर हलचल मचा दी है. यह दुर्लभ कृति, जो लगभग चार सदियों से नजरों से ओझल थी, हाल ही में पेरिस के एक निजी टाउनहाउस में मिली और रविवार को वर्सलीज में आयोजित नीलामी में 27 लाख डॉलर (यानी लगभग 24 करोड़ 16 लाख रुपये) की भारी कीमत पर बिक गई. इस पेंटिंग में ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने का दृश्य दर्शाया गया है, जो रूबेन्स की विशिष्ट धार्मिक शैली और भावनात्मक शक्ति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है. 

शुरुआत में यह कलाकृति एक फ्रांसीसी संग्रह का हिस्सा थी और विशेषज्ञों को संदेह था कि यह रूबेन्स की किसी कार्यशाला में बने प्रतिरूपों में से एक हो सकती है. लेकिन नीलामीकर्ता जीन-पियरे ओसेना का कहना है कि पहली बार देखने पर ही उन्हें यह गहरा एहसास हुआ कि यह मूल कृति हो सकती है. उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए हर संभव प्रयास किया और अंततः एंटवर्प स्थित प्रतिष्ठित रूबेन्स समिति ‘रुबेनियानम’ से इसकी प्रामाणिकता प्रमाणित करवाई. यह प्रमाणिकरण कला इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है.

क्या खास है इस पेंटिंग में?

रूबेन्स विशेषज्ञ और शोधकर्ता निल्स ब्यूट्नर के अनुसार, हालांकि रूबेन्स ने क्रूसिफिक्शन (सूली पर चढ़ाए जाने) के कई दृश्य चित्रित किए, लेकिन उन्होंने बहुत कम मौकों पर ईसा मसीह को मृत्यु की अवस्था में दिखाया. ब्यूट्नर का कहना है कि यह पेंटिंग अनोखी है क्योंकि इसमें ईसा के पार्श्व-घाव से रक्त और पानी बहते हुए दर्शाया गया है, यह दृश्य रुबेन्स ने अपने पूरे करियर में केवल एक बार चित्रित किया था. सदियों बाद सामने आई यह कृति आज न केवल कला प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक खोज है, बल्कि रूबेन्स की रचनात्मक विरासत का एक अनमोल हिस्सा भी साबित हुई है.

400 साल से थी गायब

ओसेना नीलामी हाउस के अनुसार, वैज्ञानिक परीक्षणों और ऐतिहासिक विश्लेषण के बाद इस पेंटिंग की उम्र, शैली और उत्पत्ति की पुष्टि की गई. इसके मेकअप, ब्रशस्ट्रोक और सामग्री का विश्लेषण यह साबित करता है कि यह रूबेन्स की मूल रचना ही है. कला विशेषज्ञ एरिक टुर्किन ने बताया कि यह पेंटिंग 1600 के शुरुआती वर्षों के बाद लगभग गायब हो गई थी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 19वीं सदी के प्रसिद्ध फ्रांसीसी चित्रकार विलियम बूगुएरो इस पेंटिंग के मालिक थे. उनके बाद यह पीढ़ियों तक परिवार के पास ही संरक्षित रही और लगभग भूल-सी गई.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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