अमेरिकी दावे से बढ़ी हलचल: दक्षिणी लेबनान से पीछे हटा इज़राइल, लोगों में अब भी डर का माहौल

Edited by Satyendra Giri
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लेबनान बफर जोन के पास स्थित गांव ( स्रोत- सोशल मीडिया )

Israel vs Lebanon war:अमेरिकी अधिकारी ने कथित तौर पर दावा किया है कि इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाई है, लेकिन लेबनान ने इसकी पुष्टि नहीं की है. युद्धविराम के बावजूद सीमा पर तनाव बना हुआ है. उधर ईरान और हिज्बु्ल्लाह इजराइल की पूरी सेना की वापसी की मांग कर रहे हैं, जबकि विस्थापित लोग सुरक्षित घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं.

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Israel vs Lebanon war:अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि इज़राइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ कब्जे वाले इलाकों से अपनी सेना हटा ली है. अधिकारी ने कहा कि अब वहां लेबनान की सेना को नियंत्रण संभालना चाहिए. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यह बयान अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही इजराइल-ईरान वार्ताओं के बीच आया है.

लेबनान ने दावे का किया खंडन

दक्षिणी लेबनान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिका के इस दावे का खंडन किया है. उन्होंने कहा कि दक्षिणी लेबनान में इजराइल द्वारा बनाए गए तथाकथित “बफर जोन” से सैनिकों के हटने की कोई पुष्टि नहीं हुई है.

युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार

इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है. अभी हाल के महीनों में कई युद्धविराम घोषित किए गए, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों में तनाव अभी बना हुआ. फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के तहत लागू युद्धविराम टिकता हुआ दिखाई दे रहा है.

ईरान और हिज्बुल्लाह की शर्तें

ईरान का कहना है कि किसी भी व्यापक शांति समझौते में लेबनान को शामिल किया जाना चाहिए और इजराइल को वहां से पूरी तरह हटना होगा. वहीं हिज्बुल्लाह ने साफ कहा है कि वह अपने किसी भी क्षेत्र हुए कब्जे का विरोध जारी रखेगा.

घर लौटने की आस में लोग

दक्षिणी लेबनान के कई गांव युद्ध में बुरी तरह तबाह हो चुके हैं. इन्हीं में से एक गांव दिब्बीन की निवासी मिलिया अल-शेख अपने उजड़े घर को दूर से देखती हैं, लेकिन वहां पहुंच नहीं सकतीं. गांव के दाखिल होने वाले सड़कों पर कंटीले तार लगे हैं और अधिकांश लोग पलायन कर चुके हैं.

डर और अनिश्चितता के साये में जिंदगी

मिलिया ने बताया कि अपने घर की स्थिति तक न जान पाना सबसे बड़ी पीड़ा है. युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान के हजारों लोग अब भी डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं. उनके लिए शांति का मतलब सिर्फ गोलियों का रुकना नहीं, बल्कि अपने घरों में सुरक्षित वापसी भी है.

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