ईरान की चेतावनी: ट्रंप की गाली का जवाब 'तेल-गैस संकट' से देंगे, 2026 में मचेगा हाहाकार

Updated at : 06 Apr 2026 7:11 PM (IST)
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Iran warns oil gas shortage 2026 trump threat

तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इमेज सोर्स क्रेडिट-एक्स/ @WhiteHouse

Iran Warns Oil Gas Shortage: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब 'गाली-गलौज' और सीधी धमकियों तक पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है. ट्रंप ने मंगलवार तक का डेडलाइन (समयसीमा) देते हुए कहा है कि अगर ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) का रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों और पुलों को तबाह कर देगा.

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Iran Warns Oil Gas Shortage: ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मंगलवार का दिन ईरान के लिए ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ जैसा होगा. उन्होंने आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि या तो रास्ता खोलो वरना नर्क में रहने के लिए तैयार हो जाओ. इस पोस्ट के आखिर में ट्रंप ने ‘प्रेज बी टू अल्लाह’ भी लिखा. आपको बता दें कि स्ट्रैट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह अहम समुद्री रास्ता है, जहां से पूरी दुनिया की तेल सप्लाई का पांचवां हिस्सा (1/5th) गुजरता है.

ईरान का पलटवार: 2026 होगा ‘शॉर्टेज ईयर’

ईरान ने ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा कि अगर मंगलवार ‘पावर प्लांट डे’ होगा, तो बुधवार पूरे क्षेत्र के लिए ‘पावर कट डे’ (बिजली गुल होने वाला दिन) बन जाएगा. हैदराबाद (भारत) स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास के सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ के मुताबिक, ईरान ने चेतावनी दी है कि साल 2026 पूरी दुनिया के लिए ‘तेल और गैस की किल्लत वाला साल’ साबित होगा. ईरान ने ट्रंप को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताते हुए अमेरिका के 25वें संविधान संशोधन का जिक्र किया, जो राष्ट्रपति को पद से हटाने से जुड़ा है.

होर्मुज जलसंधि पर ईरान का कब्जा

ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) का रास्ता फिलहाल उसके कंट्रोल में है. उसने कहा है कि यह रास्ता सिर्फ उसके दुश्मनों के लिए बंद है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत, पाकिस्तान, चीन, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों के तेल जहाज वहां से अभी भी गुजर रहे हैं. हालांकि, वैश्विक बाजार में तेल की कमी की वजह से ट्रंप लगातार दबाव बना रहे हैं.

अमेरिका का रेस्क्यू ऑपरेशन 

हाल ही में अमेरिका ने ईरान के भीतर जाकर अपने एक पायलट को सुरक्षित निकाला है. ईरान ने पिछले हफ्ते अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को मार गिराया था. ईरान ने इस रेस्क्यू को नकारा नहीं है, लेकिन उसने 1980 की ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ की याद दिलाते हुए अमेरिका का मजाक उड़ाया है. दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड में मौजूद ईरानी दूतावासों ने ट्रंप की भाषा को ‘किशोरी जैसा’ और ‘पत्थर युग की सोच’ वाला बताया है.

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शांति के 15 पॉइंट प्लान पर फंसा पेंच

ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने विवाद खत्म करने के लिए 15 शर्तों वाला एक प्रस्ताव भेजा है. ईरान ने इसे बहुत ज्यादा मांग वाला और ‘अवास्तविक’ बताकर खारिज कर दिया है. ईरान का मानना है कि युद्धविराम (सीजफायर) सिर्फ दुश्मन को फिर से मजबूत होने का मौका देता है. ईरान ने यह भी शक जताया है कि ‘इस्फहान पायलट रेस्क्यू’ असल में ईरान के संवर्धित यूरेनियम (इंरिच्ड यूरेनियम) को चुराने की एक चाल हो सकती है.

ओमान के साथ बातचीत जारी

ओमान के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर जानकारी दी है कि 4 अप्रैल 2026 को ईरान और ओमान के बीच डिप्टी विदेश मंत्रियों के स्तर की बैठक हुई है. इस मीटिंग का मकसद स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारू बनाना है. दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं ताकि इस ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर में सप्लाई न रुके.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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