ईरान ने नकारा अमेरिका का 15-पॉइंट प्लान, लगाया यूरेनियम चोरी करने का गंभीर आरोप

Author Govind jee
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तस्वीर में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई.

Iran-US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है. तेहरान ने अमेरिका के ’15-पॉइंट प्लान’ को सिरे से खारिज करते हुए इसे तर्कहीन बताया है. साथ ही, ईरान ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने रेस्क्यू मिशन के बहाने उनके न्यूक्लियर सेंटर से यूरेनियम चोरी करने की साजिश रची थी.

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Iran-US Tension: सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को ईरान ने साफ कर दिया है कि उसने अमेरिका के प्रस्तावों पर अपना कूटनीतिक जवाब तैयार कर लिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ और हितों के आधार पर अपनी मांगों की लिस्ट फाइनल कर ली है. बघाई के मुताबिक, ईरान अपनी शर्तों को सही समय आने पर सबके सामने रखेगा. यह बयान उन रिपोर्ट्स के बीच आया है जिनमें अमेरिका समर्थित ’15-पॉइंट प्लान’ की चर्चा है, जिसका मकसद मौजूदा तनाव को खत्म करना बताया जा रहा है.

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अजीब और तर्कहीन है अमेरिका का 15-पॉइंट प्लान

इस्माइल बघाई ने अमेरिकी प्रस्ताव को बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी और तर्कहीन बताया है. उन्होंने संकेत दिया कि ईरान इस मौजूदा ढांचे को स्वीकार नहीं करेगा. बघाई ने उन बातों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि मध्यस्थों के साथ ईरान की बातचीत उसकी कमजोरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी बात को जल्दी और साफ तरीके से रखना सरेंडर या हार मानना नहीं होता. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने कूटनीति को अपने एजेंडे से हटा दिया है.

इस्फहान ऑपरेशन को बताया ‘यूरेनियम चोरी’ का प्लान

ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह सैन्य कार्रवाई के बहाने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को निशाना बनाना चाहता है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस्फहान में हुआ पिछला ऑपरेशन असल में यूरेनियम चुराने की एक नाकाम कोशिश हो सकती है. ईरानी अधिकारियों ने इसे वाशिंगटन के लिए एक शर्मिंदगी भरा ‘डिजास्टर’ बताया. सेना का दावा है कि इस मिशन के दौरान अमेरिकी विमानों को भारी नुकसान हुआ और उन्हें दक्षिणी इस्फहान में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी.

सीजफायर के खिलाफ तेहरान का कड़ा रुख

ईरान ने फिलहाल के लिए युद्ध रोकने (टेंपरेरी सीजफायर) के विचार को भी ठुकरा दिया है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि थोड़े समय के लिए सीजफायर का मतलब सिर्फ दोबारा हमले की तैयारी करना है. ईरान चाहता है कि दुश्मनी पूरी तरह खत्म हो और उसे इस बात की गारंटी मिले कि भविष्य में ऐसा दोबारा नहीं होगा. तेहरान ने साफ कहा कि वह किसी भी ऐसे समझौते के पक्ष में नहीं है जो केवल कुछ वक्त के लिए शांति दे.

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अमेरिकी रेस्क्यू मिशन पर उठे सवाल

‘अशरक अल-औसत’ (Asharq Al-Awsat) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बड़ा दावा किया है. मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका ने अपने गिरे हुए एयरमैन को बचाने के लिए जो रिस्क भरा ऑपरेशन किया था, वह असल में देश से ‘संवर्धित यूरेनियम’ (Enriched Uranium) चुराने की एक साजिश हो सकती है. प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि जिस जगह अमेरिकी सैनिकों ने लैंड करने की कोशिश की, वह उस जगह से बहुत दूर थी जहां अमेरिकी पायलट के होने का दावा किया गया था. पायलट को कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में बताया गया था, जबकि लैंडिंग की कोशिश मध्य ईरान में हुई थी.

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