बेडरूम तक पहुंचा ईरान वॉर का असर, होर्मुज बंदी से कंडोम सप्लाई पर संकट, भयानक होंगे नतीजे

Updated at : 01 Apr 2026 1:51 PM (IST)
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Iran War Hormuz Crisis Threatens Condom Shortage in India may Trigger Social Problems.

ईरान युद्ध की वजह से तेल और गैस के बाद अब कंडोम की भी शॉर्टेज हो सकती है.

Iran War Condom Shortage India: ईरान युद्ध की वजह से भारत में तेल और गैस सप्लाई पर पैदा संकट अभी टला नहीं कि एक और समस्या आ खड़ी हुई है. अब यह किचन से निकलकर आपके बेडरूम तक पहुंच सकती है. पेट्रोकेमिकल सप्लाई ठप होने से कंडोम मैनुफैक्चरिंग डिसरप्ट हो गई, जिसकी वजह से इसकी सप्लाई पर भी संकट पैदा हो गया है.

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Iran War Condom Shortage India: ईरान युद्ध का असर भारत के ऊपर साफ दिख रहा है. पहले गैस की शॉर्टेज ने किचन का बजट बढ़ाया, फिर तेल की आंशिक दिक्कत ने लोगों के लिए परेशानी खड़ी की. अब यह युद्ध भारतीय बेडरूम तक पहुंच सकता है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का प्रभाव कंडोम बाजार पर भी दिखने लगा है. इससे आने वाले समय में कंडोम की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. भारत का कंडोम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 860 मिलियन डॉलर (करीब ₹8,000 करोड़) है, जो हर साल 400 करोड़ से अधिक यूनिट का उत्पादन करता है

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंडोम बनाने वाली कंपनियों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन में आई रुकावटों का असर देश के लगभग के खासतौर पर एनहाइड्रस अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की सप्लाई प्रभावित हुई है. 

अमोनिया का इस्तेमाल प्राकृतिक रबर लेटेक्स को सुरक्षित और स्थिर रखने के लिए किया जाता है, इसकी कीमतों में 40–50% तक बढ़ोतरी की आशंका है. जबकि सिलिकॉन ऑयल का उपयोग कंडोम में लुब्रिकेंट के तौर पर होता है, सिलिकॉन ऑयल भी महंगा होता जा रहा है, क्योंकि इसकी सप्लाई सीमित हो गई है और ट्रांसपोर्ट में दिक्कतें बढ़ी हैं. इन दोनों जरूरी चीजों की सप्लाई में रुकावट आने से उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो गई है.

पैकेजिंग भी हुई महंगी

इसके अलावा, पैकेजिंग मटेरियल जैसे PVC और एल्युमिनियम फॉयल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे कंपनियों पर लागत का भारी दबाव बन गया है. अब कंपनियों को समय पर ऑर्डर पूरा करने में भी दिक्कत आ रही है. इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है. इसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ सकता है.

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पूरे उद्योग पर असर

इस स्थिति का असर बड़े निर्माताओं पर भी पड़ रहा है, जैसे- HLL Lifecare Ltd, Mankind Pharma और Cupid Ltd. सरकार भी इस स्थिति को लेकर कदम उठा रही है. 11 मार्च को हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में संकेत मिले कि पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को मिलने वाले संसाधनों में 35% तक की कटौती हो सकती है, जिससे कंडोम जैसे उत्पादों की सप्लाई और प्रभावित हो सकती है.

व्यापार से आगे: सामाजिक चिंता

उद्योग के जानकारों का कहना है कि यह केवल मुनाफे का मामला नहीं है. भारत का कंडोम बाजार कम कीमत, ज्यादा मात्रा (high-volume, low-cost) मॉडल पर चलता है, ताकि बड़ी आबादी के लिए यह सुलभ बना रहे. लेकिन अगर लागत बढ़ती है, तो कीमतें बढ़ेंगी और मांग घट सकती है. इसका असर व्यापक हो सकता है. कंडोम जैसे उत्पाद परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े हैं. ऐसे में इसके इस्तेमाल में थोड़ी भी कमी लंबे समय में सामाजिक समस्याएं पैदा कर सकती है.

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कौन सी सामाजिक समस्याएं पैदा हो सकती है?

कंडोम की कमी की वजह से अनचाहे गर्भधारण में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर खासकर युवाओं और कम आय वाले वर्ग पर ज्यादा पड़ सकता है. इसके साथ ही यौन संचारित रोगों (STDs) का खतरा भी बढ़ सकता है. कंडोम ही एक ऐसा गर्भनिरोधक है जो एचआईवी (एड्स), सिफलिस, गोनोरिया जैसे यौन संचारित रोगों से बचाव करता है. अगर इसका उपयोग कम होता है, तो इन बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ सकता है.

भारत जैसे देश में कंडोम परिवार नियोजन का अहम साधन है. इसकी कमी से सरकार के जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं और जन्म दर में अनियंत्रित वृद्धि हो सकती है. वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ सकता है. अनचाहे गर्भ और यौन रोग बढ़ने से अस्पतालों और हेल्थ सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इससे पहले से ही सीमित संसाधनों पर और बोझ बढ़ जाता है.

अगर कंडोम महंगे हो जाते हैं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इन्हें खरीदने से बच सकते हैं. इसकी वजह से महिलाओं पर ज्यादा असर हो सकता है, इनमें अनचाहा गर्भ हो या स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती है. कई बार सुरक्षित विकल्प न होने पर अनवांटेड प्रेग्नेंसी बढ़ सकती हैं, इसकी वजह से असुरक्षित गर्भपात के मामले भी बढ़ सकते हैं. अनचाहे गर्भ या यौन रोगों के कारण परिवार और रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है. इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.

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संकट की वजह क्या है?

इस समस्या की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होने वाला व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिससे भारत की आयात पर आधारित सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है. भारत अपनी लगभग 86 प्रतिशत अमोनिया की जरूरत खाड़ी देशों जैसे- सऊदी अरब, कतर और ओमान आदि से पूरी करता है. ऐसे में अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बनी रहती है, तो इसका सीधा असर भारत के उत्पादन पर पड़ता है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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