हम जंग रोकने को तैयार, लेकिन... ईरानी राष्ट्रपति ने US के सामने रखी शर्त, विदेश मंत्री बोले- ट्रंप के दोस्त से बात...

ईरान युद्ध रोकने पर बनाने पर चल रही चर्चा.
Iran War: ईरान युद्ध रोकने पर अमेरिका को ईरानी राष्ट्रपति की तरफ से इशारा मिला है. उन्होंने इसके लिए अमेरिका के सामने शर्त रखी है. वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी डोनाल्ड ट्रंप के दोस्त और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत के बारे में खुलासा किया है.
Iran War: ईरान युद्ध का अंत हो सकता है. ईरान ने यह संकेत दिया है कि वह युद्ध से बाहर निकलना चाहता है, लेकिन बिना ठोस सुरक्षा गारंटी के नहीं. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि तेहरान अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब उसे भरोसेमंद आश्वासन मिले कि भविष्य में ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे. वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी पुष्टि की है कि वह मध्य पूर्व के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ सीधे संपर्क में हैं. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बातचीत तेहरान और वॉशिंगटन के बीच औपचारिक वार्ता नहीं है.
ईरान के राष्ट्रपति ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ फोन पर बातचीत के दौरान दोहराया कि किसी भी समाधान में भविष्य के हमलों को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा उपाय शामिल होने चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हम इस संघर्ष को समाप्त करने की आवश्यक इच्छाशक्ति रखते हैं, बशर्ते आवश्यक शर्तें पूरी हों, खासकर वे गारंटी जो दोबारा आक्रामक कार्रवाई को रोक सकें.’
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने यह भी कहा कि टेंपररी पीस नहीं बल्कि परमानेंट सोल्यूशन ही इस संघर्ष को रोक सकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की समाधान के लिए ईरान के खिलाफ किसी भी हमले को तत्काल रोकना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने कभी भी युद्ध को नहीं बढ़ाया, लेकिन वह (ईरान) अपनी संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) है.
अमेरिका पर ईरान का आरोप
वहीं इस बातचीत के बाद, पेजेशकियन ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अमेरिका पर कूटनीति को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि जब बातचीत चल रही थी, उसी दौरान ईरान पर हमला किया गया. उनके मुताबिक, वार्ता के दौरान दो बार देश को निशाना बनाया गया.
उनके अनुसार, यह वॉशिंगटन की डिप्लोमैटिक कमिटमेंट पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने हॉर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के लिए ‘अमेरिका-जायोनी (इजरायल) की दुश्मनी भरी कार्रवाइयों’ को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा कि उनका रुख ईरान के खिलाफ पक्षपातपूर्ण है.
कोस्टा ने तनाव को कम करने की अपील की
वहीं बातचीत के बाद एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि मिडिल ईस्ट की स्थिति ‘बेहद खतरनाक’ बनी हुई है. उन्होंने ईरान से अपने कदम पीछे लेने की अपील की है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय यूनियन ने ईरान के खिलाफ किए गए हमलों का विरोध ही किया है. सोशल मीडिया एक्स पर कोस्टा ने लिखा कि उन्होंने ईरान से क्षेत्र के देशों पर अस्वीकार्य हमले रोकने और कूटनीतिक रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील की है. कोस्टा ने कहा कि उन्होंने ईरान से यूएन के साथ मिलकर हॉर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.
अराघची बोले विटकॉफ से चल रही बातचीत
वहीं, अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि उन्हें ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से सीधे संदेश मिल रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान अमेरिका के साथ ‘बातचीत’ कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘मुझे पहले की तरह ही विटकॉफ से सीधे संदेश मिलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम वार्ता में हैं.’ उन्होंने कहा, ‘ईरान में किसी भी पक्ष के साथ वार्ता होने का दावा सही नहीं है. सभी संदेश विदेश मंत्रालय के माध्यम से भेजे या प्राप्त किए जाते हैं और सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी संपर्क बना हुआ है.’ अराघची ने यह भी खुलासा किया कि ईरान ने अमेरिका की कथित 15-सूत्रीय योजना का कोई जवाब नहीं दिया है और न ही अपनी तरफ से कोई शर्त या प्रस्ताव रखा है.
15 सूत्रीय योजना पर कोई निर्णय नहीं- ईरान
डोनाल्ड ट्रंप की 15 बिंदुओं वाली योजना में संघर्ष विराम लागू करना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त सीमाएं तय करना और उस पर लगे प्रतिबंधों में कुछ राहत देना शामिल है. इस प्रस्ताव का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता को नियंत्रित करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना है, ताकि क्षेत्र में बढ़ती दुश्मनी को कम किया जा सके. यह प्रस्ताव अमेरिका ने कथित तौर पर पाकिस्तान के माध्यम से भेजा था. हालांकि, ईरान ने इसे एक तरह से नकार दिया है.
ईरान युद्ध की सबसे बड़ी समस्या हॉर्मुज स्ट्रेट है. इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल संकट पैदा हो गया है. इसके बारे में बोलते हुए अराघची ने कहा कि यह ओमान और ईरान के क्षेत्रीय जल में आता है, इसलिए इसका ‘रणनीतिक उपयोग’ करना सामान्य है. उन्होंने कहा, ‘जो देश हमारे साथ युद्ध में हैं, केवल उनके जहाजों के लिए यह जलडमरूमध्य बंद है. युद्ध के दौरान यह सामान्य बात है. हम अपने दुश्मनों को अपने क्षेत्रीय जल का व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं करने दे सकते.’
कूटनीति जारी, लेकिन भरोसा कम
जहां एक तरफ ईरान कूटनीति की नीयत पर सवाल उठा रहा है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन लगातार कह रहा है कि बातचीत जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार कहा है कि वार्ता आगे बढ़ रही है और जल्द ही समझौता हो सकता है. उनका दावा है कि अमेरिका सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है.
ट्रंप लगातार बदल रहे बयान
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन अपने बयान बदल रहे हैं. मंगलवार को उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों में ईरान छोड़ देंगी. इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरानी सेना तबाह कर दी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि हमने वहां सत्ता परिवर्तन कर दिया है और अब हम ऐसे लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं, जो ज्यादा तर्कसंगत हैं. उनके अनुसार अमेरिका ने अपने सारे लक्ष्य प्राप्त कर लिए हैं, जो 28 फरवरी से पहले तय किए गए थे. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को भी सीमित कर दिया गया है.
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US युद्ध मंत्री बातचीत के साथ सैन्य अभियान का भी कर रहे इशारा
एक ओर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता ‘वास्तविक’ है और ‘मजबूत हो रही है.’ हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे. उन्होंने कहा, ‘आने वाले दिन निर्णायक होंगे. ईरान यह जानता है और सैन्य रूप से वह बहुत कुछ नहीं कर सकता.’ उन्होंने जमीनी सैनिकों की तैनाती की संभावना से भी इनकार नहीं किया. अमेरिका ने हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य जमावड़े को और बढ़ाया है. दो लड़ाकू जंगी जहाजी बेड़ा- यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस बॉक्सर के साथ ही अमेरिका ने लगभग 8000 मरीन सैनिकों को भी ईरान के आस-पास तैनात किया है.
वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस ने भी दबाव और कूटनीति के इस दोहरे रुख को दोहराया. प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘भले ही सार्वजनिक तौर पर अलग बातें कही जा रही हों और गलत रिपोर्टिंग हो रही हो, लेकिन वार्ता जारी है और अच्छी चल रही है.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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