ईरान जंग का इफेक्ट: हांगकांग की सड़कों पर 'दूध के डिब्बों' में पेट्रोल की तस्करी, जानें क्या है पूरा मामला

Updated at : 01 Apr 2026 8:20 PM (IST)
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Iran War Hong Kong fuel smuggling cases in milk cartons Ai Image

एआई-जनरेटेड इमेज

Hong Kong: पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रही ईरान की जंग का असर अब हांगकांग की सड़कों पर दिखने लगा है. असल में इस लड़ाई की वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें आसमान छू रही हैं. इसका फायदा उठाकर हांगकांग में तेल की तस्करी करने वाले गिरोह एक्टिव हो गए हैं. ये लोग चीन के मुख्य इलाकों से सस्ता पेट्रोल लाकर हांगकांग में महंगे दामों पर बेच रहे हैं.

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Hong Kong: फरवरी 2026 के अंत में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए, तो खाड़ी देशों को तेल का उत्पादन कम करना पड़ा. इसके साथ ही ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के बंद होने से ब्रेंट क्रूड की कीमत अचानक 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. यह जंग शुरू होने से पहले की कीमतों से करीब 50% ज्यादा है. हांगकांग में पेट्रोल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि वहां का 98-ऑक्टेन बिना सीसे वाला पेट्रोल ताइवान से चार गुना और चीन से तीन गुना ज्यादा महंगा बिक रहा है.

दूध के डिब्बों वाले ट्रक और खुफिया पेट्रोल पंप

हांगकांग के कस्टम अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल तस्कर अब बहुत शातिर हो गए हैं. ये लोग साधारण दिखने वाली कारों और वैन में पेट्रोल छुपाकर बॉर्डर पार ला रहे हैं. पकड़ी गई कई गाड़ियों को अंदर से मॉडिफाई किया गया है ताकि उनमें ज्यादा से ज्यादा तेल भरा जा सके. ये तेल शहर के इंडस्ट्रियल इलाकों में बने अवैध पेट्रोल पंपों पर सप्लाई किया जाता है. साल 2026 की शुरुआत में ही ऐसे दर्जनों केस पकड़े जा चुके हैं और हजारों लीटर अवैध तेल जब्त हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि 2025 के मुकाबले इस बार तस्करी तीन गुना बढ़ गई है.

सस्ते पेट्रोल के चक्कर में जान का जोखिम

एक्सपर्ट्स और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह तस्करी न केवल टैक्स की चोरी है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है. आबादी वाले शहर के बीच में इस तरह अवैध रूप से तेल रखने से आग लगने या धमाके होने का डर बना रहता है. इस संकट की वजह से अब सामान ढोने वाली कंपनियों पर भी बोझ बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन चार्जेस बढ़ सकते हैं.

ट्रंप का दावा: ईरान ने मांगी सीजफायर

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर दावा किया कि ईरान के नए राष्ट्रपति ने अमेरिका से सीजफायर (युद्ध विराम) की मांग की है. ट्रंप ने लिखा कि वह इस पर तभी विचार करेंगे जब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह खोल दिया जाएगा, वरना वह ईरान को तबाह करना जारी रखेंगे. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे मीडिया की अफवाह बताया है. उन्होंने कहा कि जब तक हमलावर को सजा नहीं मिलती, जंग जारी रहेगी.

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कैसे शुरू हुई यह पूरी लड़ाई?

यह जंग 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं. वर्तमान में मुजतबा खामेनेई ईरान के नए सर्वोच्च नेता हैं, लेकिन वे अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. ट्रंप का मानना है कि यह लड़ाई दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकती है, जबकि तेहरान में बुधवार को भी कई धमाके सुने गए हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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