ईरान की धमकी के बीच क्या बंद हो जाएगा 'आंसुओं का द्वार'? होर्मुज के बाद 'गेट ऑफ टियर्स' पर संकट

Updated at : 01 Apr 2026 6:03 PM (IST)
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Bab el-Mandeb Strait

स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब की तस्वीर. इमेज सोर्स- एक्स.

Bab el-Mandeb Strait: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग को एक महीने से ज्यादा समय हो गया है. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) लगभग बंद है. यहां से दुनिया का 20% तेल और गैस गुजरता है. अब ईरान समर्थित यमनी ग्रुप 'हुती' ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब) को निशाना बनाने की धमकी दी है.

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Bab el-Mandeb Strait: इस समुद्री रास्ते को इसके खतरनाक सफर की वजह से ‘गेट ऑफ टियर्स’ यानी ‘आंसुओं का द्वार’ भी कहा जाता है. दुनिया के कुल व्यापार का 12% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. होर्मुज के एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ ओमान, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देश हैं. ईरान के पास 21 मील चौड़े इस रास्ते की पूरी उत्तरी तटरेखा है, जिससे उसे यहां से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने और ड्रोन-मिसाइल से हमला करने की ताकत मिलती है. 

अब हुती विद्रोहियों ने भी इस जंग में शामिल होकर इजरायल पर मिसाइलें दागी हैं. हुती उस ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का हिस्सा हैं जिसमें हिजबुल्लाह, हमास और इराक के लड़ाके शामिल हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हुती लड़ाकों को समुद्री रास्तों पर हमले तेज करने के लिए कहा है.

क्यों खास है ‘आंसुओं का द्वार’ कहा जाने वाला यह रास्ता?

बाब-अल-मंदेब का रास्ता लाल सागर का हिस्सा है. यह यमन और अफ्रीकी देशों (इरिट्रिया और जिबूती) के बीच सिर्फ 30 किलोमीटर चौड़ी एक पट्टी है. यह रास्ता इसलिए जरूरी है क्योंकि यह स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर और हिंद महासागर को सीधे जोड़ता है. मिसाल के तौर पर, सऊदी अरब से नीदरलैंड जाने वाले तेल टैंकर को इस रास्ते से सिर्फ 12,000 किलोमीटर चलना पड़ता है. अगर यह रास्ता बंद हो जाए, तो जहाजों को अफ्रीका के नीचे से घूमकर 20,000 किलोमीटर का सफर तय करना होगा. यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) का कहना है कि इससे 19 दिन का सफर बढ़कर 34 दिन का हो जाएगा.

बाब अल-मंडेब की तस्वीर. इमेज सोर्स क्रेडिट सोर्स- स्क्रीनशॉट एक्स/@Microinteracti1

विश्व की इकोनॉमी पर क्या असर पड़ेगा?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, इस रास्ते से रोजाना लगभग 42 लाख बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम लिक्विड गुजरता है. यह पूरी दुनिया के उत्पादन का 5% है. स्वेज नहर अथॉरिटी के डेटा बताते हैं कि 2025 की आखिरी तिमाही में यहां से निकले 3,426 जहाजों में से 40% जीवाश्म ईंधन (तेल और गैस) लेकर जा रहे थे. इसके अलावा अनाज, कोयला और लोहे जैसे सामान भी यहीं से गुजरते हैं. अगर हुती यहां हमले तेज करते हैं, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.

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क्या इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद किया जा सकता है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि होर्मुज की तरह बाब-अल-मंदेब को पूरी तरह बंद करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि इसके दूसरे छोर से जहाज स्वेज नहर की तरफ निकल सकते हैं. हालांकि, एशिया जाने वाले जहाजों के लिए यह बहुत महंगा पड़ेगा. सऊदी अरब ने होर्मुज से बचने के लिए ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ जैसा विकल्प तैयार किया है, लेकिन वहां से निकलने वाला तेल भी आखिर में बाब अल-मंडेब के पास ही पहुंचता है. शिपिंग एनालिस्ट क्रिस वेस्टन के मुताबिक, हुती की हमले की क्षमता ही सबसे बड़ा रिस्क है.

बढ़ता इनश्योरेंस खर्च और जहाजों का बदलता रास्ता

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, नवंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच यहां 67 हमले हुए थे. भले ही हुती इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक न करें, लेकिन हमलों के डर से कंपनियां यहां से जहाज भेजने से कतरा रही हैं. सबसे बड़ी समस्या इंश्योरेंस की है. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में जहाजों के सामान की वैल्यू पर बीमा खर्च 0.6% था, जो रेड सी संकट के बाद बढ़कर 2% तक पहुंच गया है. अगर होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं, तो दुनिया भर में चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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