ईरान से जंग के बीच 'ग्रेटर इजरायल' की तैयारी? लेबनान के बाद सऊदी अरब का नंबर!

Updated at : 01 Apr 2026 4:00 PM (IST)
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Greater Israel Plan

तस्वीर में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू.

Greater Israel Plan: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच इजरायल की विस्तारवादी नीति पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं. बाइबिल की सीमाओं और थियोडोर हर्जल के पुराने नक्शों को आधार बनाकर नील से फरात नदी तक कब्जे की चर्चा तेज है. नेतन्याहू और उनके मंत्रियों के बयानों ने पड़ोसी अरब देशों की चिंता बढ़ा दी है.

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Greater Israel Plan: ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अब ‘ग्रेटर इजरायल’ (Greater Israel) को लेकर बहस तेज हो गई है. दुनिया का ध्यान अभी अमेरिका-ईरान जंग और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के बंद होने से बिगड़ी सप्लाई चेन पर है, लेकिन इसी दौरान इजरायल ने लेबनान में जमीनी हमला शुरू कर दिया है. इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्ला को रोकने के लिए ‘बफर जोन’ बना रहा है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह ‘ग्रेटर इजरायल’ की तरफ बढ़ता एक कदम है.

क्या है ‘ग्रेटर इजरायल’ का पूरा प्लान?

‘ग्रेटर इजरायल’ एक ऐसी सोच है जिसमें इजरायल की सीमाएं मिस्र (इजिप्ट) की नील नदी से लेकर इराक की फरात (Euphrates) नदी तक फैली होंगी. इसमें पूरा फिलिस्तीन, लेबनान, जॉर्डन और सीरिया, इराक, मिस्र (इजिप्ट) व सऊदी अरब के बड़े हिस्से शामिल हैं. इस विचार को 19वीं सदी में यहूदी विचारक थियोडोर हर्जल ने सामने रखा था, जिसका आधार बाइबिल (जेनेसिस 15:18-21) में दी गई सीमाओं को माना जाता है.

लेबनान और वेस्ट बैंक में बढ़ती हलचल

इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक पर कंट्रोल मजबूत करने और अब लेबनान में घुसने को इसी प्रोजेक्ट से जोड़कर देखा जा रहा है. भारत में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 28 मार्च 2026 को सोशल मीडिया (एक्स) पर लिखा कि यह युद्ध ‘ग्रेटर इजरायल’ के विजन को आगे बढ़ाने और फिलिस्तीन राष्ट्र की उम्मीदों को खत्म करने का एक कवर है.

इतिहास के पन्नों में ग्रेटर इजरायल

मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, 1967 के ‘छह दिनों के युद्ध’ के बाद यह विचार मुख्यधारा में आया. उस समय इजरायल ने मिस्र, सीरिया और जॉर्डन को हराकर गाजा पट्टी, सिनाई प्रायद्वीप, वेस्ट बैंक और गोलान हाइट्स पर कब्जा कर लिया था. 1977 में दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के सत्ता में आने के बाद इस विचारधारा को और मजबूती मिली.

इजरायली नेताओं के बयान

इजरायल की मौजूदा सरकार के कई बड़े नेताओं ने खुलकर इस विजन का समर्थन किया है:

बेजलेल स्मोट्रिच (वित्त मंत्री): एक्सियोस की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पेरिस में एक ऐसा मैप दिखाया जिसमें जॉर्डन और वेस्ट बैंक इजरायल का हिस्सा थे. 2024 में उन्होंने सीमाएं दमिश्क (सीरिया) तक बढ़ाने की बात भी कही.

बेंजामिन नेतन्याहू (प्रधानमंत्री): अल जजीरा की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ‘ग्रेटर इजरायल’ के विजन से जुड़ाव महसूस करते हैं, तो उन्होंने ‘बिल्कुल’ कहा.

याइर लापिड (विपक्ष के नेता): मिडिल ईस्ट आई के अनुसार, उन्होंने भी माना कि इजरायल की सीमाएं बाइबिल के हिसाब से तय होनी चाहिए.

विदेशी समर्थन और वैश्विक चिंताएं

अगस्त 2025 में अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने पत्रकार मारियो नवाफल को बताया था कि इजरायल अब पुरानी सीमाओं (साइक्स-पिको समझौते) को मानने के मूड में नहीं है और वह सीरिया-लेबनान तक जा सकता है. फरवरी 2026 में इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकबी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर इजरायल पूरे मिडिल ईस्ट पर कब्जा कर ले, तो यह ‘ठीक’ होगा. वहीं, तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कलन ने 28 मार्च 2026 को आरोप लगाया कि इजरायल लेबनान और सीरिया में जमीन कब्जाने की नई नीति पर काम कर रहा है.

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लेबनान युद्ध और मौजूदा स्थिति

लेबनान के अखबार एल-ओरिएंट डेली ने 25 मार्च को हिजबुल्ला नेता नईम कासिम के हवाले से लिखा कि इजरायल का ‘ग्रेटर इजरायल’ प्रोजेक्ट अब छिपा नहीं है. पत्रकार मेहदी हसन ने भी लिखा कि इजरायल अपनी सीमाएं घोषित नहीं करता क्योंकि वह सुरक्षा के नाम पर लगातार विस्तार कर रहा है. फिलहाल इजरायली सेना (IDF) गाजा, सीरिया और लेबनान में अपनी ‘सुरक्षा लाइन’ बढ़ा रही है, जिसे दुनिया विस्तारवाद के तौर पर देख रही है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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