ट्रंप की 48 घंटे की धमकी पर ईरान का दोटूक जवाब, राष्ट्रपति बोले- हम डरने वाले नहीं

Edited by Pritish Sahay
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान

Iran US War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम पर ईरान ने कड़ा जवाब दिया है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि यह ईरान को मिटाने की बातें करने वाले विरोधियों की बौखलाहट हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन उन ताकतों के लिए नहीं जो ईरान के खिलाफ हैं.

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Iran US War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी और बढ़ गई है. युद्ध के साथ-साथ जुबानी जंग भी जारी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, साथ ही कहा था कि अगर यह रणनीतिक समुद्री मार्ग जल्द नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले करेगा. अब ट्रंप की धमकी पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पलटवार किया है.

ईरान के राष्ट्रपति का ट्रंप को दो टूक जवाब

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ट्रंप की धमकी पर जोरदार पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ईरान को मिटाने की बातें विरोधियों की बौखलाहट हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा ईरान को मानचित्र से मिटाने का भ्रम एक इतिहास रचने वाले राष्ट्र की इच्छा के विरुद्ध हताशा को दर्शाता है. धमकियां और आतंक केवल हमारी एकता को मजबूत करते हैं.

कुछ देशों को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी के लिए खुला है- ईरानी राष्ट्रपति

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन उन ताकतों के लिए नहीं जो ईरान की सरजमीं, संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन करने की कोशिश करती हैं. पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान किसी भी दबाव, धमकी या सैन्य उकसावे के आगे झुकने वाला नहीं है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रणनीतिक महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की गिनती दुनिया के सबसे रणनीतिक और संवेदनशील समुद्री मार्गों में होती है. दुनिया भर के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है. हालांकि भोगोलिक बनावट के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुस पर ईरान का काफी प्रभाव है. यहां से जहाजों और टैंकरों की बेरोकटोक आवाजाही बंद है. सीमित संख्या में यहां से जहाज गुजर रहे है. इसके कारण वैश्विक स्तर पर तेज और ऊर्जा की आपूर्ति को चोट पहुंची है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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