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ईरान में हाहाकार! प्रदर्शनकारियों ने सरकारी टीवी भवन में लगाई आग, सड़कों पर मचा बवाल

Iran Protests: ईरान इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है. महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक तबाही के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन अब खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक सिस्टम के खिलाफ खुली बगावत में बदल चुका है. देश के 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं, सरकारी टीवी की इमारत जलाई गई है और सरकार ने इंटरनेट बंद कर दिया है. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दर्जनों मौतें और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं.

Iran Protests: ईरान इन दिनों उबल रहा है. गुस्सा, भूख, बेरोजगारी और बरसों की नाराजगी अब सड़कों पर फूट पड़ी है. हालात ऐसे बन चुके हैं कि आम लोग खुलकर सरकार और देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खड़े हो गए हैं. देशभर में हो रहे प्रदर्शन अब सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे इस्लामिक रिपब्लिक सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं. प्रदर्शनों के दौरान एक बड़ी घटना इस्फहान शहर में सामने आई, जहां प्रदर्शनकारियों ने ईरान के सरकारी टीवी चैनल IRIB (Islamic Republic of Iran Broadcasting) की एक इमारत में आग लगा दी. IRIB को सरकार की आवाज माना जाता है, ऐसे में इस इमारत पर हमला सरकार के लिए बड़ा संदेश है कि अब लोग सिर्फ नारे नहीं, बल्कि प्रतीकों पर भी वार कर रहे हैं.

Iran Protests in Hindi: बंदर अब्बास से तेहरान तक फैला आंदोलन

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन सिर्फ राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं हैं. दक्षिणी ईरान के अहम बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. यह शहर ईरान की अर्थव्यवस्था और व्यापार के लिए बेहद जरूरी है. ऐसे में यहां प्रदर्शन होना बताता है कि आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है. जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, सरकार ने देश के बड़े हिस्से में लगभग पूरा इंटरनेट बंद कर दिया. इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्थाएं क्लाउडफ्लेयर और नेट बॉक्स बताती हैं कि यह बंदी सरकारी दखल की वजह से हुई. वहीं एपी की रिपोर्ट के अनुसार, दुबई से ईरान में फोन कॉल तक नहीं लग पा रही थीं. इस बंदी से करीब 8.5 करोड़ लोग बाहरी दुनिया से कट गए. (Protesters Set Fire To State Tv Building in Hindi)

28 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन 

यह पूरा आंदोलन 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ. शुरुआत में लोग गिरती मुद्रा, बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की परेशानियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे. ईरानी मुद्रा रियाल बुरी तरह गिर चुकी है, महंगाई करीब 40 फीसदी तक पहुंच गई है. मांस, चावल और जरूरी सामान आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं. समय के साथ यह आंदोलन सिर्फ आर्थिक नहीं रहा. अब लोग खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें पूरा सिस्टम नहीं चाहिए. सड़कों पर नारे गूंज रहे हैं कि तानाशाह को मौत और इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद. रिपोर्टों के मुताबिक, अब प्रदर्शनकारियों की मांग रिजीम चेंज तक पहुंच चुकी है.

100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन, हर वर्ग शामिल

देशभर के 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन की खबरें हैं. इन प्रदर्शनों में युवा, बुजुर्ग, मजदूर, व्यापारी और महिलाएं सब शामिल हैं. सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए कड़ी कार्रवाई की है. आंसू गैस, गोलियां और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की जा रही हैं. अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के मुताबिक अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,270 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असली आंकड़े इससे ज्यादा हो सकते हैं.

सरकार का आरोप- विदेशी साजिश

इंटरनेट बंद होने के बावजूद सरकारी टीवी चैनलों ने इस पर कोई चर्चा नहीं की. शुक्रवार सुबह 7 बजे के बुलेटिन में IRIB ने सिर्फ खाद्य सब्सिडी और सरकारी योजनाओं की बातें दिखाईं, जबकि देश सुलग रहा था. ईरानी सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आंदोलन देश के अंदर की समस्याओं से पैदा हुआ है.

रजा पहलवी की विरोध करने की अपील

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने लोगों से रात 8 बजे विरोध करने की अपील की. गुरुवार और शुक्रवार को तय समय पर तेहरान और दूसरे शहरों में लोग खिड़कियों से नारे लगाने लगे, सड़कों पर उतर आए और नारे लगे तानाशाह को मौत और यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस आएंगे. इससे पहले भी ईरान के इतिहास में ऐसी घटना हो चुकी है.

1979 में शाह मोहम्मद रजा पहलवी देश छोड़कर भागे थे और अयातुल्ला खुमैनी की अगुवाई में इस्लामिक क्रांति हुई थी. अब करीब 46 साल बाद, हालात फिर उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं. इंटरनेट बंद, सख्ती और मौतों के बावजूद प्रदर्शन थमे नहीं हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, अब आम हड़ताल की तैयारी भी शुरू हो गई है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ सकता है.

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Govind Jee
Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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