ईरान का ‘जासूसी’ पर कड़ा एक्शन, मोसाद के 6 जासूसों को अब तक दी गई फांसी

Updated at : 19 Mar 2026 7:48 AM (IST)
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Iran Mossad Spies Executed after israel war

तस्वीर में कुरुश कीवानी

Iran Mossad Spies Executed: तेहरान में इजरायली जासूसों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू हो चुका है. जून 2025 की जंग के बाद से अब तक मोसाद के लिए काम करने वाले 6 कथित एजेंटों को फांसी दी जा चुकी है. वहीं इजरायली हमलों में ईरान के खुफिया मंत्री सहित तीन बड़े सैन्य अधिकारियों की भी मौत हुई है.

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Iran Mossad Spies Executed: ईरान में जून 2025 की जंग के बाद से इजरायली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के लिए जासूसी करने वालों पर एक्शन बहुत तेज हो गया है. हाल ही में कुरुश कीवानी को दी गई फांसी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. कीवानी पर आरोप था कि उन्होंने जून 2025 की जंग के दौरान ईरान के खास ठिकानों की फोटो और जानकारी इजरायल को दी थी. रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अकेली घटना नहीं है; बल्कि, युद्ध के बाद से ऐसे मामलों में तेजी आई है.

कुरुश कीवानी: मार्च 2026 में दी गई फांसी

कुरुश कीवानी को 18 मार्च 2026 की सुबह फांसी दी गई. ईरान की ‘मिज़ान न्यूज़ एजेंसी’ के मुताबिक, कीवानी को जंग के चौथे दिन यानी 16 जून 2025 को एक विला से गिरफ्तार किया गया था. उनके पास से 30,000 यूरो कैश, सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस और कई जासूसी उपकरण मिले थे. आरोप है कि मोसाद ने उन्हें 2023 में एक ऑनलाइन विज्ञापन के जरिए फंसाया था.

अली अर्देस्तानी: जनवरी 2026 में हुआ एक्शन

जनवरी 2026 की शुरुआत में अली अर्देस्तानी को फांसी दी गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अर्देस्तानी पर आरोप था कि उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी के बदले मोसाद को ईरान के रणनीतिक ठिकानों के वीडियो और फोटो भेजे थे. सरकारी मीडिया ने उन्हें इजरायल का ‘स्पेशल ऑपरेटिव’ बताया था.

हामिदरेजा साबेथ इस्माइलपुर 

जनवरी 2026 में ही हामिदरेजा साबेथ इस्माइलपुर को भी फांसी पर लटकाया गया. रॉयटर्स के मुताबिक, उन पर मोसाद के साथ मिलकर खुफिया जानकारी साझा करने का आरोप था. ईरान की सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा था, जो कि जंग के बाद ईरान के सख्त रुख को दिखाता है.

अकील केशवार्ज: दिसंबर 2025 में फांसी

दिसंबर 2025 में 27 साल के आर्किटेक्चर स्टूडेंट अकील केशवार्ज को फांसी दी गई. रॉयटर्स ने मानवाधिकार संगठनों के हवाले से बताया कि उन पर मोसाद और विपक्षी गुटों से संबंध होने का आरोप था. हालांकि, एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह सजा दबाव में लिए गए इकबालिया बयान के आधार पर दी गई थी.

बाबक शाहबाजी: सितंबर 2025 में दी गई मौत

बाबक शाहबाजी को सितंबर 2025 में फांसी दी गई. उन पर ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा डेटा इजरायल भेजने का आरोप था. एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से बताया गया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि उनसे जबरदस्ती जुर्म कबूल करवाया गया था.

बहमन चोबी-असल: सितंबर 2025 का हाई-प्रोफाइल केस

‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ के अनुसार, बहमन चोबी-असल को सितंबर 2025 में फांसी दी गई. ईरान ने उन्हें इजरायल का ‘सबसे महत्वपूर्ण जासूस’ करार दिया था. उन पर सरकारी डेटाबेस हैक करने और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के आयात पर नजर रखने का आरोप था.

रोजबेह वादी: अगस्त 2025 में फांसी

रॉयटर्स के मुताबिक, रोजबेह वादी को अगस्त 2025 में फांसी दी गई. उन पर आरोप था कि मोसाद ने उन्हें ऑनलाइन भर्ती किया था और उन्होंने वियना (ऑस्ट्रिया) में मोसाद के अफसरों के साथ कई मुलाकातें की थीं.

दो दिनों में तीन बड़े अधिकारियों की मौत 

इस बीच, अल जजीरा के मुताबिक, इजरायली रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने दावा किया कि पिछले 48 घंटों में ईरान के तीन बड़े अधिकारी मारे गए हैं. इनमें इंटेलिजेंस मिनिस्टर खतीब के अलावा सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बासिज फोर्स के हेड गुलामरेजा सुलेमानी शामिल हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सेना को छूट दी है कि वे बिना किसी परमिशन के ईरान के बड़े अधिकारियों को निशाना बना सकते हैं.

अमेरिका ने रखा 10 मिलियन डॉलर का इनाम

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर और इस्माइल खतीब जैसे बड़े अधिकारियों की जानकारी देने वाले को 10 मिलियन डॉलर (करीब 83 करोड़ रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है. तेहरान में लारीजानी और सुलेमानी का अंतिम संस्कार किया गया. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने कहा है कि इजरायल और अमेरिका गलतफहमी में हैं, क्योंकि ईरान की सरकार किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं चलती.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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