सुप्रीम लीडर मुजतबा लापता, लारीजानी भी खत्म; अब किसके हाथ में ईरान की कमान?

Updated at : 18 Mar 2026 8:40 PM (IST)
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Iran Power Crisis mojtaba khamenei missing ali larijani killed

बाएं से अली लारीजानी और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई.

Iran Power Crisis: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 19 दिन बाद भी वहां हालात संभल नहीं रहे हैं. इजराइल ने एक के बाद एक कई बड़े अधिकारियों को ढेर कर दिया है, जिससे ईरान का पावर स्ट्रक्चर पूरी तरह हिल गया है. ताजा हमलों में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी (जो कभी ईरान के दूसरे सबसे ताकतवर इंसान थे) और बासिज फोर्स के चीफ गुलामरजा सुलेमानी मारे गए हैं.

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Iran Power Crisis: बुधवार (17 मार्च 2026) को इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कन्फर्म किया कि ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को भी एक रात के हमले में मार गिराया गया है. काट्ज ने चेतावनी दी है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आज के दिन कई मोर्चों पर ‘बड़े सरप्राइज’ देखने को मिल सकते हैं. उन्होंने साफ कहा कि वे चुन-चुनकर सबको खत्म करना जारी रखेंगे.

नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का पता नहीं 

ईरान ने 9 मार्च को मुजतबा खामेनेई को अपना नया सुप्रीम लीडर घोषित किया था. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जिस हमले में उनके पिता, पत्नी और बेटे के मारे जाने की खबर आई थी, उसके बाद से मुजतबा पब्लिक के सामने नहीं आए हैं. उनके गायब रहने से इस बात को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है कि आखिर ईरान की कमान असल में किसके हाथ में है.

कुवैती अखबार अल-जरिदा के मुताबिक, मुजतबा ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति पुतिन की मदद से उन्हें इलाज के लिए गुपचुप तरीके से रूस ले जाया गया है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि या फोटो-वीडियो सामने नहीं आया है.

हाथ-पैर कटने और कोमा में होने का दावा

इससे पहले ब्रिटिश अखबार द सन ने अपनी रिपोर्ट में और भी चौंकाने वाले दावे किए थे. सूत्रों के हवाले से कहा गया कि एक ड्रोन हमले में मुजतबा ने अपने पैर गंवा दिए हैं और उनके पेट व लीवर में भी गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण वे कोमा में चले गए हैं. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सुप्रीम लीडर पूरी तरह स्वस्थ हैं और हालात पर उनकी पकड़ मजबूत है, लेकिन उन्होंने भी अपनी बात के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं किया है.

IRGC बनी असली पावर सेंटर 

इस अनिश्चितता के बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) सबसे ताकतवर बनकर उभरी है. IRGC का नेटवर्क इतना बड़ा है कि लीडरशिप खत्म होने के बाद भी वह खुद को संभालने में सक्षम है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई के घायल होने की खबरों के बीच अब IRGC एक ‘मिलिट्री जुंटा’ की तरह काम कर रही है और सरकार के फैसलों पर हावी है.

कौन बनेगा अगला बड़ा चेहरा? 

मिडल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट यिगल कार्मन के मुताबिक, सादिक लारीजानी (अली लारीजानी के भाई) अंतरिम लीडर बन सकते हैं क्योंकि वे कट्टरपंथी हैं और IRGC को उनके साथ काम करने में आसानी होगी. वहीं, संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ भी रेस में हैं, जिनके पास IRGC वायुसेना के पूर्व कमांडर होने का अनुभव है और वे सेना के काफी करीबी माने जाते हैं.

कागजों पर तीन लोगों की काउंसिल

सरकारी तौर पर देश चलाने के लिए तीन लोगों की काउंसिल बनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, सीनियर मौलवी अलीरेजा आराफी और न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई शामिल हैं. लेकिन अंदरूनी तौर पर फूट पड़ी हुई है. IRGC कमांडर अहमद वाहिद ने अमेरिका और इजराइल को चुनौती देने के लिए मुजतबा खामेनेई के नाम को आगे बढ़ाया था, जबकि उदारवादी गुट हसन रूहानी जैसे चेहरों के पक्ष में थे.

एक्सपर्ट की चेतावनी: और खतरनाक होगा ईरान का भविष्य

प्रोफेसर वली नस्र ने सोशल मीडिया पर आगाह किया है कि इन हत्याओं के बाद ईरान की लीडरशिप और भी ज्यादा कट्टरपंथी हो जाएगी. उनके अनुसार, इजराइल और अमेरिका की इस रणनीति से ईरान का भविष्य काफी धुंधला और अशांत हो सकता है, जिससे इस क्षेत्र में चल रहे अंतहीन युद्ध से अमेरिका का निकलना और मुश्किल हो जाएगा.

विदेशी मंत्री बोले- ईरान का ढांचा नहीं टूटेगा

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में अली लारीजानी और गुलामरेजा सुलेमानी का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. इस बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान का राजनीतिक ढांचा बहुत मजबूत है और किसी एक व्यक्ति के होने या न होने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने इस युद्ध के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए.

राष्ट्रपति पेजेशकियान ने दी चेतावनी

ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अली लारीजानी को अपना प्रिय भाई बताते हुए कहा कि उनकी कमी पूरी करना मुश्किल है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले के पीछे जो ‘आतंकी’ हैं, उनसे भयानक बदला लिया जाएगा. संसद अध्यक्ष गालिबाफ और न्यायपालिका प्रमुख एजेई ने भी कहा कि यह संघर्ष तब तक नहीं रुकेगा जब तक इजराइल और अमेरिका को करारा जवाब नहीं मिल जाता.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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