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अमेरिका के इस नामी कंपनी में भारतीय दलित व्यक्ति के साथ भेदभाव, पीड़ित ने दर्ज किया कंपनी के सुपरवाइजर पर मुकादमा

Updated at : 02 Jul 2020 10:46 AM (IST)
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अमेरिका के इस नामी कंपनी में भारतीय दलित व्यक्ति के साथ भेदभाव, पीड़ित ने दर्ज किया कंपनी के सुपरवाइजर पर मुकादमा

अमेरिकी कंपनी सिस्को सिस्टम्स के सुपरवाइजर पर एक दलित व्यक्ति ने भेदबाव करते हुए उन पर मुकदमा दर्ज किया है

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कैलिफोर्निया के नियामकों ने अमेरिकी कंपनी सिस्को सिस्टम्स पर मुकदमा करते हुए आरोप लगाया कि इसके सिलिकॉन वैली स्थित मुख्यालय में एक इंजीनियर को इसलिए भेदभाव का सामना करना पड़ा क्योंकि वह एक दलित भारतीय है. कैलिफोर्निया के निष्पक्ष रोजगार एवं आवासीय विभाग (डीएफईएच) द्वारा मंगलवार को दायर मुकदमे के अनुसार इस इंजीनियर ने सिस्को के सैन जोस स्थित मुख्यालय में भारतीयों के साथ काम किया जो सभी आव्रजन पर अमेरिका आए और वे सभी ऊंची जाति के हैं.

मुकदमे में कहा गया है कि ऊंची जाति के सुपरवाइजरों और सहकर्मियों ने टीम में और सिस्को के कार्यस्थल पर भी भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया. इसमें कहा गया है कि सिस्को में कर्मचारी के साथ किया गया व्यवहार नागरिक अधिकार कानून, 1964 और कैलिफोर्निया निष्पक्ष रोजगार एवं आवासीय कानून का उल्लंघन है.

मुकदमे में कहा गया है कि यह कर्मचारी दलित भारतीय हैं और गैर दलित भारतीयों के मुकाबले उसकी त्वचा का रंग गहरा है. डीएफईएच के निदेशक केविन किश ने कहा, ‘‘जन्म द्वारा निर्धारित वंशानुगत सामाजिक स्थिति से कार्यस्थल की परिस्थितियों और अवसरों को तय करना अस्वीकार्य है. ” इस मुकदमे में कर्मचारी से भेदभाव करने और उसे प्रताड़ित करने के लिए सिस्को के सुपरवाइजर सुंदर अय्यर और रमन कोम्पेल्ला को नामजद किया गया है.

ये दोनों ही ऊंची जाति के हैं. मुकदमे में कहा गया है कि सिस्को ने इस भेदभाव को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए. इसमें कहा गया है कि अय्यर ने अन्य कर्मचारियों से कहा कि यह कर्मचारी दलित है और उसे भाई-भतीजावाद के कारण भारत के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला मिला.

कर्मचारी ने सिस्को के मानव संसाधन विभाग से संपर्क किया और वह अय्यर के खिलाफ भेदभाव की शिकायत दर्ज कराना चाहता था और इसके बाद अय्यर ने उससे उसकी सारी जिम्मेदारियां छीन ली और उसे ऐसा काम दिया जो उसकी भूमिका को कमतर करता था और उसे अलग-थलग महसूस कराया. अय्यर ने सहकर्मियों से कहा कि वह उस कर्मचारी को नजरंदाज करें. मुकदमे में कहा गया कि उस कर्मचारी को वेतन भी तुलनात्मक रूप से कम मिलता था तथा अवसर भी कम दिए जाते थे.

Posted By : Sameer Oraon

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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