छुट्टियों में बेइंतहा प्यार करो… चाइनीज यूनिवर्सिटी की छात्रों से अपील, पॉपुलेशन बढ़ाने को बेकरार चीन

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छुट्टियों का टास्क- प्यार करो.

China News: चीन की एक यूनिवर्सिटी अपने छात्रों से अपील कर रही है कि इस बार की स्प्रिंग छुट्टियों के दौरान प्यार करो. ये एक प्रोजेक्ट जैसा दिख रहा है, जिसकी थीम है फूलों को देखो और रोमांस का आनंद लो. चीन ने लगभग 46 साल तक वन चाइल्ड पॉलिसी चलाई, लेकिन अब वह इसके दुष्परिणाम झेल रहा है.

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China News: प्यार करने का भी कोई समय होता है भला! कहीं हो न हो… चीन में जरूर हो रहा है. वन चाइल्ड पॉलिसी की मार झेल रहे चीन की एक यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स से प्यार की पींगें बढ़ाने के लिए कह रही है.  यूनिवर्सिटी ने छात्रों से मिड-टर्म ब्रेक के दौरान ‘फूलों का आनंद लेने और प्यार में पड़ने’ की अपील की है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सिचुआन साउथवेस्ट वोकेशनल कॉलेज ऑफ एविएशन ने अपने आधिकारिक वीचैट अकाउंट पर बताया कि 1 से 6 अप्रैल तक होने वाली स्प्रिंग छुट्टियों की थीम ‘फूलों को देखो और रोमांस का आनंद लो’ रखी गई है. मंगलवार को जारी इस नोटिस में छात्रों और शिक्षकों से किताबें कुछ समय के लिए छोड़कर इस ब्रेक का आनंद लेने को कहा गया. 

यह कदम उस घोषणा के करीब दो हफ्ते बाद आया है, जिसमें चीन ने पारंपरिक गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के अलावा स्कूलों में वसंत और शरद ऋतु की छुट्टियां शुरू करने की बात कही थी. यह एक असामान्य पहल मानी जा रही है, क्योंकि चीन जैसे देश में आमतौर पर पढ़ाई और अच्छे अंक लाने पर ज्यादा जोर दिया जाता है. दरअसल, सरकार अब शादी और घरेलू खपत (कंजम्प्शन) को बढ़ावा देने के नए तरीके तलाश रही है. 

वन चाइल्ड पॉलिसी ने चीन को मुश्किल में डाला

चीन ने 25 सितंबर 1980 को आधिकारिक रूप से वन चाइल्ड पॉलिसी अपनाई थी. लेकिन 46 साल में ही उसे अब लेने के देने पड़ रहे हैं. टाइरीन व्हाइट की किताब, चाइनाज लांगेस्ट कैंपेन के मुताबिक, चीन में 1980 के बाद के शुरुआती सालों में, बेटे को प्राथमिकता देने की सामाजिक सोच के कारण बड़ी संख्या में कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन हुआ. 

हालांकि, यह केवल शुरुआती सालों में ही हुआ, बाद में सरकार ने छूट दी कि अगर पहला बच्चा लड़की होती है, तो वे दूसरा बच्चा पैदा कर सकते हैं. वन चाइल्ड पॉलिसी को लागू करने के लिए कई बार जबरन गर्भपात और नसबंदी जैसे कदम उठाए गए, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई.

इस नीति के कारण जन्म दर तेजी से गिर गई. आज चीन में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि कामकाजी युवाओं की संख्या घट रही है. इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है. माता-पिता की एक संतान होने की वजह से, एक बच्चे पर दो माता-पिता और चार दादा-दादी की जिम्मेदारी आ गई. इससे युवा पीढ़ी पर आर्थिक और मानसिक दबाव बहुत बढ़ गया.

हालांकि, इस नीति का नतीजा यह हुआ कि अब चीन में पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी ज्यादा हो गई, जिससे सामाजिक असंतुलन पैदा हुआ. कम महिलाओं की वजह से कई पुरुषों को शादी नहीं मिल पाई. साथ ही, एक बच्चे की आदत और बढ़ती महंगाई के कारण लोग अब कम बच्चे पैदा करना चाहते हैं, जिससे जनसंख्या और घट रही है.

काम करने वाली आबादी घटने से उद्योगों और उत्पादन पर असर पड़ा. लंबे समय में इससे चीन की आर्थिक ग्रोथ धीमी पड़ने का खतरा बढ़ गया. इसके साथ ही इकलौते बच्चों पर अत्यधिक दबाव देखा गया. उन्हें ‘लिटिल एम्परर’ सिंड्रोम से जोड़ा गया, जहां बच्चे ज्यादा लाड़-प्यार में बड़े हुए लेकिन सामाजिक कौशल कमजोर रहे. 

वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि चीन दुनिया भर में किसी देश की सेना से सीधा युद्ध भी इसीलिए नहीं लड़ता, क्योंकि उसकी युवा जनसंख्या अगर खत्म हो गई, तो आश्रित जनसंख्या का बोझ और बढ़ जाएगा. लेकिन अब चीन चाहता है कि उसके देश में और किलकारियां गूंजे. बच्चे हों, जनता बढ़े, देश सही समय पर युवा हो जाए. 

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चीन की सरकार अब क्या कर रही है?

सरकार ने अब कर्मचारियों को ऑफ-सीजन में यात्रा करने के लिए स्टैगर्ड (अलग-अलग समय पर) पेड लीव को बढ़ावा दे रही है. सिचुआन और पूर्वी जिआंगसू जैसे प्रांतों के साथ-साथ सूझोउ और नानजिंग जैसे शहरों ने भी स्प्रिंग ब्रेक की योजनाएं पेश की हैं, जो ज्यादातर अप्रैल या मई की शुरुआत में होंगी.

चीन अपनी 1.4 अरब की आबादी के बीच यात्रा और मनोरंजन को बढ़ावा देकर घरेलू खपत बढ़ाना चाहता है. इसके साथ ही, सरकार को उम्मीद है कि ज्यादा खाली समय मिलने से जन्म दर में गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है. साल 2025 में चीन की आबादी लगातार चौथे साल घटी और जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई, जिसे लेकर विशेषज्ञ आगे और गिरावट की आशंका जता रहे हैं.

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बीजिंग ने बच्चों के अनुकूल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नई गाइडलाइन भी जारी की है. शक्तिशाली योजना आयोग, नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा, खेल और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में बेहतर सार्वजनिक सेवाएं देकर ‘चाइल्ड-फ्रेंडली शहर’ विकसित किए जाने चाहिए.

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अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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