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चीन की सेना में क्या चल रहा है? शी जिनपिंग के करीबी टॉप जनरल जांच के घेरे में, PLA में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

25 Jan, 2026 11:05 am
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China Military Crackdown xi jinping close general zhang youxia under investigation

शी जिनपिंग के करीबी टॉप जनरल झांग योउशिया जांच के घेरे में.

चीन की सेना में बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी और देश के सबसे ताकतवर जनरल झांग योउशिया पर जांच शुरू हो गई है. इस कार्रवाई को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी में अब तक की सबसे अहम और ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है.

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चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में अब तक की सबसे बड़ी अंदरूनी कार्रवाई सामने आई है. चीन के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को पुष्टि की कि देश के सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में शामिल जनरल झांग योउशिया को जांच के दायरे में लिया गया है. 

उन पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. झांग को लंबे समय से राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भरोसेमंद सहयोगी और सेना में उनका दूसरा सबसे ताकतवर अधिकारी माना जाता रहा है.

कौन हैं झांग योउशिया और क्यों अहम है यह मामला?

75 वर्षीय झांग योउशिया, कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष हैं. CMC चीन की सेना की सर्वोच्च कमान है और इसके अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं. झांग उन गिने-चुने चीनी सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं जिनके पास रियल वॉर अनुभव रहा है. सैन्य मामलों के जानकारों के अनुसार, माओ काल के बाद पहली बार इतने ऊंचे लेवल के अधिकारी पर कार्रवाई हुई है.

झांग अकेले नहीं, एक और टॉप जनरल भी जांच में

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, झांग योउशिया के साथ-साथ जनरल ल्यू झेनली (61 वर्ष) पर भी जांच चल रही है. ल्यू झेनली, CMC के जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं, यानी सेना की ऑपरेशनल योजना और रणनीति से जुड़े सबसे अहम पदों में से एक पर हैं. हालांकि सरकार ने आरोपों का विस्तार से खुलासा नहीं किया है, लेकिन चीन में इस तरह की भाषा आमतौर पर भ्रष्टाचार, अधिकारों के दुरुपयोग या राजनीतिक निष्ठा पर सवाल से जुड़े मामलों में इस्तेमाल की जाती है.

शी जिनपिंग का एंटी-करप्शन अभियान है

विश्लेषकों के अनुसार, यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है. शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से अब तक 2 लाख से ज्यादा अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है. हाल के वर्षों में यह अभियान खास तौर पर सेना पर केंद्रित रहा है, जिसमें रॉकेट फोर्स, हथियार खरीद प्रणाली और रक्षा मंत्रालय के पूर्व मंत्री भी जांच और कार्रवाई के दायरे में आए हैं.

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सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, सत्ता नियंत्रण का संदेश भी?

सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार, यह कदम साफ संकेत देता है कि शी जिनपिंग सेना पर पूरी और बिना किसी सवाल वाली पकड़ चाहते हैं. ताइवान, दक्षिण चीन सागर और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच, शी किसी भी स्तर पर अलग सोच या स्वतंत्र शक्ति केंद्र को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं.

क्या इससे चीन की सैन्य क्षमता पर असर पड़ेगा?

रक्षा मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी कार्रवाई से फैसले लेने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. हथियारों की खरीद और मॉडर्नाइजेशन पर असर पड़ सकता है. हालांकि, शी जिनपिंग के करीबी माने जाने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इससे सेना ज्यादा अनुशासित और पार्टी के प्रति वफादार बनेगी.

यह कार्रवाई क्यों मानी जा रही है ऐतिहासिक?

झांग योउशिया अब तक जांच में आए सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं. इससे पहले कई रक्षा मंत्री और जनरल हटाए गए, लेकिन CMC के उपाध्यक्ष पर कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई. विश्लेषकों के अनुसार, यह दिखाता है कि करीबी संबंध या पुरानी वफादारी भी अब सुरक्षा की गारंटी नहीं है.

सेंट्रल मिलिट्री कमीशन अब लगभग खाली

इन जांचों के बाद CMC में अब केवल दो सदस्य बचे हैं जिसमें शामिल हैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग (अध्यक्ष), जनरल झांग शेंगमिन, जो सैन्य जांच और अनुशासन से जुड़े मामलों की निगरानी करते हैं. 2022 में नियुक्त सभी छह वर्दीधारी कमांडर अब हटाए जा चुके हैं. झांग शेंगमिन को भी पिछले साल ही CMC में प्रमोट किया गया था.

अक्टूबर में CMC के दूसरे उपाध्यक्ष हे वेइदोंग को पार्टी से बाहर किया गया. 2024 में दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया. यह लगातार कार्रवाई बताती है कि सेना की टॉप लीडरशिप में बड़ा बदलाव चल रहा है.

अमेरिका की नजर भी चीन की सेना पर

इसी बीच, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को नई नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी जारी की. इसमें चीन को ऐसी सैन्य शक्ति बताया गया है जिसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबदबा बनाने से रोका जाना जरूरी है. हालांकि रणनीति में यह भी कहा गया कि यह किसी सत्ता परिवर्तन या टकराव की लड़ाई नहीं है. रिपोर्ट के साफ कहा गया है कि ऐसी शांति संभव है जो अमेरिका के लिए अनुकूल हो और जिसे चीन भी स्वीकार कर सके.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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