15 मिनट में बात मानो या मौत चुनो… वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन मादुरो’ के लिए तख्तापलट वाली डील, प्रेसिडेंट का ऑडियो लीक

Venezuela Delcy Rodriguez Leaked Audio: वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर हाल ही में आरोप लगे कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीक्रेट डील की है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नवंबर 2025 के आसपास अमेरिकी अधिकारियों और रोड्रिगेज के बीच गुप्त बातचीत शुरू हुई थी. अब रोड्रिगेज का एक ऑडियो लीक हुआ है. इसमें वे कहती सुनाई दे रही हैं कि मादुरो को गिरफ्तार करने के दौरान उन्हें और उनके मंत्रिमंडल को 15 मिनट में फैसला लेन का मौका दिया गया था. अगर वे फैसला नहीं करती हैं, तो मौत उनका इंतजार कर रही थी.
Venezuela Delcy Rodriguez Leaked Audio: वेनेजुएला में 3 जनवरी की रात उस समय के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से ही ‘उठा’ लिया गया. अमेरिकी सैनिकों ने एक दुस्साहसिक कार्रवाई करते हुए मादुरो को रात 1.30 बजे उनकी पत्नी के साथ गिरफ्तार किया और सीधे अमेरिका की ब्रुकलिन जेल ले गए. यह कार्रवाई इतनी तेज हुई कि किसी को पता ही नहीं चला. अब इस मामले में और खुलासा हो रहा है. वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का एक बयान सामने आया है. इसमें वह कहती हैं कि जब पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ा गया, तब अमेरिकी बलों ने उनके मंत्रिमंडल के लोगों को सिर्फ 15 मिनट का समय दिया था. जिसमें यह तय करना था कि वे अमेरिका की शर्तें मानेंगे या नहीं. अगर वह नहीं मानते तो जान से मारने की धमकी दी गई थी.
गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कथित तौर पर इसका एक लीक ऑडियो तेजी से फैल रहा है. इस ऑडियो में रोड्रिगेज दावा करती हैं कि जैसे ही मादुरो को हिरासत में लिया गया, उसी पल से दबाव और धमकियां शुरू हो गई थीं. उन्होंने कहा कि उनसे, गृह मंत्री डियोसदादो काबेलो और अपने भाई जॉर्ज रोड्रिगेज से तुरंत जवाब मांगा गया था. अगर वह फैसला नहीं लेतीं तो बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी. वह यह भी कहती हैं कि अब तक उन पर दबाव और ‘ब्लैकमेल’ जारी है, इसलिए उन्हें सबके सामने सच रखना पड़ रहा है.
पूरा घटनाक्रम कैसे हुआ ऑडियो की बात को पॉइंट्स में पढ़ें
- यह बातें एक लीक ऑडियो कथित तौर पर अमेरिकी कार्रवाई के एक हफ्ते बाद हुई दो घंटे लंबी बैठक की रिकॉर्डिंग बताई जा रही है. यह ऑडियो स्थानीय पत्रकारिता समूह ‘ला होरा दे वेनेजुएला’ के हाथ लगा है. इसमें सुनाई दे रहा है कि मादुरो के हटने के बाद सरकार के बचे हुए लोग हालात संभालने और दोबारा नियंत्रण बनाने की कोशिश कर रहे थे.
- रोड्रिगेज ऑडियो में यह भी कहती सुनाई देती हैं कि ऐसे हालात में सत्ता की जिम्मेदारी उठाना बेहद दर्दनाक था. साथ ही वह बताती हैं कि अमेरिकी बलों ने उनसे कहा था कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस जिंदा नहीं हैं, बल्कि मारे जा चुके हैं. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि अगर ऐसा है तो वे और उनके साथी भी उसी अंजाम के लिए तैयार हैं.
- वह कहती हैं कि वह और काबेलो भी उसी अंजाम के लिए तैयार थे. उनकी आवाज में तनाव साफ महसूस होता है, जब वह कहती हैं कि ऐसे हालात में सत्ता की जिम्मेदारी संभालना बेहद दर्दनाक है. इसके बावजूद वह वहां मौजूद लोगों से पेशेंस रखने, समझदारी से काम लेने और शांति बनाए रखने की अपील करती हैं. वह यह भी कहती हैं कि सबसे जरूरी चीज है एकजुट रहना.
- मीटिंग में उन्हें स्पीकरफोन पर लाने से पहले, उस समय के कम्यूनिकेशन मिनिस्टर फ्रेडी नान्येज उनका बचाव करते सुने जा रहे हैं. वह लोगों से अपील करते हैं कि अफवाहों और बदनाम करने की कोशिशों पर ध्यान न दें. नान्येज के मुताबिक, रोड्रिगेज ही वह शख्स हैं जो मादुरो और उनकी पत्नी की वापसी सुनिश्चित कर सकती हैं और देश को दोबारा संभालने का रास्ता दिखा सकती हैं.
- रोड्रिगेज ने बैठक में कहा कि उन पर अब भी धमकियों और दबाव का दौर जारी है, इसलिए उन्हें बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा. उन्होंने अपने सहयोगियों से धैर्य रखने और साफ लक्ष्य तय करने को कहा. उनके मुताबिक तीन बड़ी प्राथमिकताएं थीं. पहली देश में शांति बनाए रखना, दूसरी मादुरो को वापस लाना, और तीसरी राजनीतिक सत्ता को अपने हाथ में बनाए रखना.
तख्तापलट कहीं साजिश तो नहीं!
ऑडियो से यह भी साफ हो रहा है कि सरकार के अंदर बचे लोग इस बात से चिंतित थे कि कहीं उन्हें गद्दार न कहा जाने लगे. खासकर उन रिपोर्टों के बाद जिनमें दावा किया गया था कि रोड्रिगेज और उनके भाई पहले ही अमेरिका के साथ संपर्क में थे.
हालांकि, यह ऑडियो उन खबरों के तुरंत बाद ही सामने आया, जिनमें कहा गया था कि रोड्रिगेज ने सत्ता का नियंत्रण संभालने को लेकर अमेरिका के साथ चुपचाप संपर्क बनाए थे. रिपोर्टों के मुताबिक, वह नवंबर 2025 से अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रही थीं और मादुरो के हटने की स्थिति में नेतृत्व संभालने के लिए तैयार थीं.
ट्रंप और रोड्रिगेज के बीच समझौता
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कई इंटरनेशनल रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नवंबर 2025 के आसपास अमेरिकी अधिकारियों और रोड्रिगेज के बीच गुप्त बातचीत शुरू हुई थी. उसी दौरान जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मादुरो से पद छोड़ने की मांग की थी. गार्जियन की रिपोर्ट में ही, सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया कि रोड्रिगेज ने संकेत दिया था कि मादुरो का जाना तय है और वह उसके बाद बनने वाली किसी भी व्यवस्था के साथ काम करने को तैयार हैं, ताकि देश में अराजकता न फैले. इस बात को भी गार्जियन की रिपोर्ट ने कंफर्म किया था.
रोड्रिगेज के भागने की खबर सामने आई थी
जिस दिन मादुरो को पकड़े जाने की खबर आई, उस दिन यह अफवाह भी उड़ी कि रोड्रिगेज मॉस्को भाग गई हैं. बाद की रिपोर्टों में कहा गया कि वह उस समय मार्गरीटा द्वीप पर थीं. 5 जनवरी को वह कराकास लौटीं और कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. उनके भाई जॉर्ज रोड्रिगेज ने भी सत्ता के इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई. इस दौरान मादुरो के बेटे मादुरो ग्वेरा भी मौजूद थे. कहा जा रहा है कि यह सब एक पहले से तय संक्रमण योजना का हिस्सा था, जिस पर महीनों से बातचीत चल रही थी.
ट्रंप ने रोड्रिगेज की तारीफ भी की है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक तौर पर रोड्रिगेज की तारीफ की है और कहा है. उन्होंने कहा कि रोड्रिगेज ने उनकी मांगों के मुताबिक काम किया है. लेकिन रोड्रिगेज का कहना है कि उन्होंने जो भी कदम उठाए, वे लगातार मिल रही धमकियों और दबाव की वजह से उठाने पड़े. इससे पहले एक इंटरव्यू में ट्रंप ने इशारा किया था कि अगर रोड्रिगेज ‘सही काम’ नहीं करतीं, तो उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है.
मादुरो की गिरफ्तारी और डेल्सी के सत्ता में आने पर विशेषज्ञ क्या कह रहे?
इतिहासकार और राजनीतिक विश्लेषक मार्गरीटा लोपेज माया का मानना है कि यह कहानी रोड्रिगेज खुद को बचाने के लिए गढ़ रही हों, क्योंकि उनके मुताबिक मादुरो को हटाना अंदरूनी समर्थन के बिना संभव नहीं था. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद से वेनेजुएला की सरकार एक तरफ सार्वजनिक रूप से अमेरिका की आलोचना करती रही है, लेकिन दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन की कई मांगों को मानती भी दिखी है.
मादुरो के बाद सत्ता संभालने वाली रोड्रिगेज को ट्रंप का समर्थन मिला, खासकर तब जब वेनेजुएला के बड़े तेल भंडार तक अमेरिका की पहुंच का मुद्दा सामने आया. हाल ही में ट्रंप ने उनके नेतृत्व को ‘बहुत मजबूत’ बताया और कहा कि वेनेजुएला के तेल में हिस्सेदारी मिलने के बाद अमेरिका और ज्यादा खुशहाल होने वाला है. इसके साथ ही ट्रंप ने मारिया कोरिना मचाडो से नोबेल पीस प्राइज लेने के बाद भी, उन पर सार्वजनिक तौर पर विश्वास नहीं जताया. जबकि मचाडो विपक्ष की नेता रही हैं और उन्होंने ही ट्रंप से देश में सीधी कार्रवाई करने की मांग की थी.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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