ब्रिटिश पीएम की सख्ती पर नरम पड़े ट्रंप, अपने बयान से मारी पलटी, यूके के सैनिकों की बहादुरी पर कही ये बात

Updated at : 25 Jan 2026 8:06 AM (IST)
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Donald Trump U-Turn on NATO Troops in Afghanistan Comment praises bravery of UK soldiers after British PM's firm response.

दावोस में WEF की बैठक में भाग लेने के दौरान डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स.

Donald Trump NATO: अमेरिका के राष्ट्रपति अपने बयानों पर हमेशा सख्त रहते हैं. हाल ही में उन्होंने NATO में गैर अमेरिकी सैनिकों को लेकर एक कमेंट किया, जिस पर ब्रिटिश पीएम ने कड़ी आपत्ति जताई. हालांकि, इस बार अपने कड़े रुख से अलग हटकर ट्रंप ने नरमी दिखाई और यूके के सैनिकों की बहादुरी को सराहा है.

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Donald Trump NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान से अब यूटर्न मारा है. शनिवार को उन्होंने कहा कि यूनाइटेड किंगडम के बहादुर सैनिक हमेशा अमेरिका के साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने याद दिलाया कि अफगानिस्तान में करीब 20 साल तक चले युद्ध के दौरान 457 ब्रिटिश सैनिक मारे गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए. ट्रंप ने पिछले हफ्ते NATO में गैर अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि नाटो सहयोगियों की सेनाएं अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान फ्रंटलाइन पर नहीं थीं. इस पर ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने आपत्ति जताई थी. उन्होंने ट्रंप से तुरंत माफी की मांग की थी. 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ब्रिटिश सैनिक दुनिया के सबसे बहादुर योद्धाओं में रहे हैं. वह हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रहेंगे. अफगानिस्तान में 457 सैनिक शहीद हुए, कई गंभीर रूप से घायल हुए और वे अब तक के सबसे महान योद्धाओं में शामिल थे. अमेरिका-ब्रिटेन के बीच का यह एक ऐसा रिश्ता है, जो कभी टूट नहीं सकता. उन्होंने यूके की सेना की तारीफ करते हुए कहा कि वह दिल और हिम्मत के मामले में किसी से कम नहीं, बस अमेरिका को छोड़कर. अंत में ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका आप सभी से प्यार करता है और हमेशा करता रहेगा.

कीर स्टार्मर, प्रिंस हैरी ने जताई थी आपत्ति

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब एक दिन पहले ही उन्हें अफगानिस्तान युद्ध को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी. इससे पहले फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान में नाटो सहयोगी देशों की सेनाएं अक्सर फ्रंट लाइन से दूर रहती थीं और अमेरिकी सैनिकों जितनी सक्रिय भूमिका नहीं निभाती थीं. उन्होंने यह भी शक जताया था कि अगर कभी अमेरिका पर हमला हो तो क्या नाटो देश सच में उसके समर्थन में खड़े होंगे. यह बात इसलिए भी चुभी क्योंकि 9/11 के हमलों के बाद नाटो का आर्टिकल 5 (सामूहिक रक्षा का नियम; एक पर हमला यानी सभी पर हमला) पहली और अब तक केवल एक बार अमेरिका के लिए ही लागू किया गया था.

इन टिप्पणियों पर खास तौर पर ब्रिटेन में तीखी प्रतिक्रिया हुई. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ट्रंप के बयान को अपमानजनक और बेहद निंदनीय बताया और कहा कि सहयोगी सैनिकों के बलिदान का सम्मान होना चाहिए. प्रिंस हैरी ने भी कहा कि सैनिकों की कुर्बानियों पर सच्चाई और सम्मान के साथ बात की जानी चाहिए. वह खुद अफगानिस्तान युद्ध में सेवा दे चुके हैं.

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ट्रंप के इस बयान पर न सिर्फ ब्रिटेन, बल्कि दूसरे नाटो देशों ने भी नाराजगी जताई. डेनमार्क और कनाडा के नेताओं ने याद दिलाया कि उनके देशों ने भी अफगानिस्तान में भारी नुकसान झेला है. पोलैंड के पूर्व जनरल रोमन पोल्को ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप ने रेड लाइन पार कर दी. उन्होंने यह भी कहा कि इस सैन्य गठबंधन की कीमत कई देशों ने अपने सैनिकों के खून से चुकाई है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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