Cash Withdrawal: बांग्लादेश में पैसों पर पहरा, ज्यादा कैश निकालने पर पाबंदी

Edited by Amitabh Kumar
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Cash Withdrawal: बांग्लादेश में कैश निकालने पर पाबंदी लगाई गई है. आखिर बांग्लादेश बैंक ने ये फैसला क्यों लिया. शेख हसीना के हटने के बाद से क्या हैं हालात जानें

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Cash Withdrawal: बांग्लादेश में आरक्षण सुधार विरोधी प्रदर्शन के बीच अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना 5 अगस्त को भारत आ गईं. इसके बाद से वहां से कई खबरें आ रहीं हैं. देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है जिसकी वजह से कई तरह की पाबंदियां लगाईं गईं. इस बीच एक अच्छी खबर आ रही है. दरअसल, बांग्लादेश बैंक ने इस सप्ताह बैंकों से नकद निकासी की सीमा बढ़ा दी है. इसे 5 लाख टका करने का फैसला किया गया है. यह पिछले सप्ताह 4 लाख टका थी. केंद्रीय बैंक ने शनिवार रात इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं.

केंद्रीय बैंक की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सुरक्षा कारणों से बैंक शाखाओं में पैसों का ट्रांसफर करना मुश्किल है. इसलिए, एक खाते से 5 लाख टका से अधिक की निकासी नहीं की जा सकती. चेक के माध्यम से लेन-देन की निगरानी की जानी चाहिए और संदिग्ध लेन-देन को रोकने की जरूरत है.

निकासी सीमा में 1 लाख टका की वृद्धि

पिछले सप्ताह निकासी की सीमा चार टका 4 तक थी, जबकि इससे पहले यह सीमा 3 लाख टका थी. इसी तरह, पिछले दो सप्ताहों में अधिकतम निकासी सीमा क्रमशः 2 लाख टका और 1 लाख टका थी. इसपर गौर करें तो चार सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह निकासी सीमा में 1 लाख टका की वृद्धि हुई है. हालांकि केंद्रीय बैंक के निर्देश के अनुसार नकद निकासी सीमित है, फिर भी ग्राहक कितनी भी राशि को ट्रांसफर कर सकते हैं और डिजिटल लेनदेन कर सकते हैं.

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बैंक से ज्यादा नकदी निकालने पर रोक क्यों ?

शेख हसीना की सरकार बदलने के बाद नकद निकासी का दबाव थोड़ा बढ़ता नजर आया. खास तौर पर अवामी लीग समर्थक नेताओं और कारोबारी घराने नकद निकासी पर जोर देने लगे. इसके बाद केंद्रीय बैंक ने नकद निकासी पर पाबंदी लगाना शुरू किया. ऐसा इसलिए ताकि इन पैसों का इस्तेमाल किसी भी तरह से आतंकी या अवैध गतिविधियों के लिए न हो.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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