सुरक्षा परिषद ने दक्षिण सूडान में शांति रक्षकों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी की

Published at :25 Dec 2013 11:57 AM (IST)
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सुरक्षा परिषद ने दक्षिण सूडान में शांति रक्षकों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी की

संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दक्षिण सूडान में जातीय एवं राजनीतिक हिंसा पर नियंत्रण के प्रयास के तहत अपने शांति रक्षकों की संख्या 7,000 से बढ़ाकर करीब 14,000 करने का फैसला किया है.विश्व के सबसे नए देश में जारी हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं. संयुक्त […]

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संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दक्षिण सूडान में जातीय एवं राजनीतिक हिंसा पर नियंत्रण के प्रयास के तहत अपने शांति रक्षकों की संख्या 7,000 से बढ़ाकर करीब 14,000 करने का फैसला किया है.विश्व के सबसे नए देश में जारी हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हजारों विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से पत्र मिलने के बाद परिषद ने दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन में शांति सैनिकों की संख्या 7,000 से बढ़ाकर 12,500 करने और 1,323 पुलिसकर्मियों की तैनाती करने को कल सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी.

दक्षिण सूडान में शांति सैनिकों की संख्या में बढ़ोतरी कांगो, दारफुर, अबयेई, कोट डी इवोरी और लाइबेरिया में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के तबादले के जरिए की जाएगी.संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर..7 के तहत पारित प्रस्ताव में 15 सदस्यीय परिषद ने शत्रुता तत्काल खत्म करने और प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच वार्ता का रास्ता खोलने का आह्वान किया.इसमें नागरिकों के खिलाफ हिंसा और विशेष जातीय तथा अन्य समुदायों एवं संयुक्त राष्ट्र मिशन को निशाना बनाए जाने की कड़े शब्दों में निन्दा की गई.

पिछले हफ्ते भारी हथियारों से लैस करीब 2,000 विद्रोहियों ने दक्षिण सूडान में जोंगलेई राज्य के अकोबो स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन परिसर पर हमला किया था जिसमें दो भारतीय शांति सैनिकों सहित करीब 20 लोग मारे गए थे. प्रस्ताव में मिशन पर हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की गई. दक्षिण सूडान वर्ष 2011 में सूडान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था.

बान ने परिषद की बैठक में कहा, ‘‘मैं लगातार राष्ट्रपति साल्वा कीर :दक्षिण :सूडान: और विपक्षी नेताओं से बाचीत और संकट से निजात का रास्ता निकालने का आह्वान करता रहा हूं.’’उन्होंने कहा, ‘‘चाहे जो मतभेद हों, हिंसा को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता है.’’बान ने जोर देकर कहा कि संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता.

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