डायना, जैक्सन और पोप के अंतिम संस्कार से भी बड़ा होगा मंडेला का अंतिम संस्कार

Published at :09 Dec 2013 11:08 AM (IST)
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डायना, जैक्सन और पोप के अंतिम संस्कार से भी बड़ा होगा मंडेला का अंतिम संस्कार

जोहानिसबर्ग : रंगभेद विरोधी आंदोलन के प्रणोता नेल्सन मंडेला के गृहनगर कूनू में 15 दिसंबर को होने वाला उनका अंतिम संस्कार, अब तक दुनिया में हुए सबसे बड़े अंतिम संस्कारों में से एक होगा.अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ( एएनसी ) के नेता इस्माइल वादी का कहना है कि अगर राजकुमारी डायना, माइकल जैक्सन और पोप जॉन […]

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जोहानिसबर्ग : रंगभेद विरोधी आंदोलन के प्रणोता नेल्सन मंडेला के गृहनगर कूनू में 15 दिसंबर को होने वाला उनका अंतिम संस्कार, अब तक दुनिया में हुए सबसे बड़े अंतिम संस्कारों में से एक होगा.अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस ( एएनसी ) के नेता इस्माइल वादी का कहना है कि अगर राजकुमारी डायना, माइकल जैक्सन और पोप जॉन पॉल द्वितीय के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों को साथ मिला दें तो मंडेला का अंतिम संस्कार कार्यक्रम उससे भी बड़ा होगा.

वादी ने कल लेनासिया के गांधी हॉल में एक प्रार्थना सभा में यह बात कही. उन्होंने कहा, ‘‘ये सब लोग वैश्विक स्तर पर जाने माने लोग थे जिनके अंतिम संस्कार में लाखों लोग जुटे लेकिन मुझेइसमें कोई शक नहीं है कि ना केवल संगीत या धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग बल्कि पूरी दुनिया नेल्सन मंडेला को याद करेगी.’’ वादी ने कहा, ‘‘मुङो लगता है कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों की संख्या इन तीनों लोगों के अंतिम संस्कारों में शामिल हुए लोगों की कुल संख्या को पीछे छोड़ देगी.’’

वानी ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि मंडेला दुनिया भर के देशों में लोकप्रिय थे और उनकी लोकप्रियता में राजनीतिक, भाषायी, सांस्कृतिक, जातीय और सामाजिक विभाजनों की बाधा बिल्कुल नहीं थी. चाहे आप पश्चिमी लोकतांत्रिक दुनिया, पूंजीवादी व्यवस्था से हों या फिर इससे उलट किसी दूसरी व्यवस्था से हों, मंडेला का प्रभाव दुनिया के हर हिस्से में पहुंचा था.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मंडेला शक्ति से परे सिद्धांतों के लिए खड़े रहे. वह खुद ही असीम शक्ति वाले थे, लेकिन वह शक्ति के दुरुपयोग के लिए नहीं बल्कि सिद्धांतों के लिए खड़े रहे.’’कल गांधी हॉल में हुए कार्यक्रम में 30 से अधिक धार्मिक एवं सामुदायिक संगठन शामिल हुए और मंडेला को श्रद्धांजलि दी गई. गांधी हॉल का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है और प्रांत के इस विशाल भारतीय हिस्से में अपनी 10 यात्रओं में से एक के दौरान मंडेला ने इस गांधी हॉल को आधिकारिक तौर पर खोला था. वानी ने बताया कि लेनसिया शायद एकमात्र ऐसा शहर है जहां मंडेला इतने बार आए.

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