भारत-अमेरिका के संबंधों का विकास जारी रहेगा : अमेरिकी अधिकारी

Published at :04 Dec 2013 11:22 AM (IST)
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भारत-अमेरिका के संबंधों का विकास जारी रहेगा : अमेरिकी अधिकारी

वाशिंगटन : द्विपक्षीय संबंधों में किसी तरह के ठहराव की बात को खारिज करते हुए ओबामा प्रशासन की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों का विकास जारी रहेगा. उन्होंने साथ ही दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु समझौते के अधर में लटकने से जुड़ी खबरों को भी नकारा. दक्षिण […]

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वाशिंगटन : द्विपक्षीय संबंधों में किसी तरह के ठहराव की बात को खारिज करते हुए ओबामा प्रशासन की एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों का विकास जारी रहेगा. उन्होंने साथ ही दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु समझौते के अधर में लटकने से जुड़ी खबरों को भी नकारा.

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की सहायक विदेश मंत्री निशा बिस्वाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि हम यहां रुक गए हैं. मेरा मानना है कि हम आगे की ओर बढ़ना जा रखेंगे.’’

उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मुझे पता है कि हमारे बीच अगले साल की शुरुआत में उर्जा को लेकर वार्ता होने वाली है. इस वजह से मुझे लगता है कि कोई ठहराव नहीं है. मुझे लगता है कि सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है.’’ बिस्वाल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह संबंध मजबूत होते, गहराते और विकसित होते जाएंगे. मुझे लगता है कि यह केवल द्विपक्षीय संबंध नहीं हैं बल्कि एक क्षेत्रीय एवं वैश्विक संबंध हैं.’’ उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सबसे कुशलतापूर्ण इसे एक ऐसी भागीदारी और संबंध के रुप में चित्रित किया है जो 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारियों में से एक है.

बिस्वाल ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी साझा मूल्यों, साझा नीतियों पर आधारित है. हमारा मनाना है कि भारत लोकतांत्रिक विकास का एक बेजोड़ उदाहरण है और हम ऐसे उदाहरण का समर्थन करना चाहते हैं जिसका और देश अनुसरण करें.’’ सवालों का जवाब देते हुए बिस्वाल ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच असैन्य परमाणु समझौता दोनों देशों के संबंधों का एक जबरदस्त एवं शक्तिशाली प्रतीक रहा है.

बिस्वाल ने साथ ही इस समझौते के अधर में लटके होने से जुड़ी खबरों को खारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम प्रगति कर रहे हैं. क्या यह उतना ही तेज और पूर्ण है जितना हम चाहते हैं? नहीं. मेरा मानना है कि निश्चित तौर पर ऐसे कदम हैं जिनसे चीजों को साथ बढ़ने में मदद मिलेगी. लेकिन मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्र के दौरान घोषित किया गया छोटा अनुबंध समझौता सही दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था.’’

बिस्वाल ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इससे बेहतर कदमों के लिए मार्ग प्रशस्त होता रहेगा. मुझे लगता है कि भारत को अपने परमाणु जवाबदेही कानूनों और जबावदेही को लेकर निजी क्षेत्र की जो चिताएं हैं, उनके संबंध में क्या किया जा सकता है इसके लिए खुद ही कदम उठाने होंगे.’’

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