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आईएस के आतंकवाद से लडने के लिए दृढसंकल्प के साथ कार्रवाई जरुरी : भारत

Updated at : 22 Apr 2015 7:30 PM (IST)
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आईएस के आतंकवाद से लडने के लिए दृढसंकल्प के साथ कार्रवाई जरुरी : भारत

जकार्ता : आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को गंभीर चिंता का कारण बताते हुए भारत ने आज एशियाई और अफ्रीकी देशों से आतंकवाद से लडने और समुद्री लूटपाट के खिलाफ कार्रवाई करने में दृढ संकल्पित होने को कहा. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां एशियन अफ्रीकन सम्मेलन 2015 को संबोधित करते हुए नई वैश्विक व्यवस्था […]

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जकार्ता : आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को गंभीर चिंता का कारण बताते हुए भारत ने आज एशियाई और अफ्रीकी देशों से आतंकवाद से लडने और समुद्री लूटपाट के खिलाफ कार्रवाई करने में दृढ संकल्पित होने को कहा.
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां एशियन अफ्रीकन सम्मेलन 2015 को संबोधित करते हुए नई वैश्विक व्यवस्था के लिए संयुक्त राष्ट्र के सुधारों और इसके लिए कार्रवाई की मांग की.
उन्होंने कहा कि उग्रवाद और आतंकवाद की हिंसा सुरक्षा के लिहाज से सबसे परेशान करने वाली चीज है और दोनों महाद्वीपों के बहुत से क्षेत्र आतंकवादी संगठनों की मिलीभगत का शिकार हैं.
सुषमा ने कहा, पिछले साल में आईएसआईएस बडी चिंता का कारण बनकर उभरा है. हमें हमारी सभ्यता को चुनौती देने वाले इस अभिशाप का मुकाबला करने में दृढ संकल्पित रहना है. पैर की चोट का उपचार करा रहीं विदेश मंत्री ने अपनी जगह बैठकर भाषण दिया.
उन्होंने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मलक्का जलडमरु-मध्य और अदन की खाडी में कार्रवाई के बावजूद जलदस्युओं का खतरा बना हुआ है.
सुषमा ने कहा, हमने मलक्का जलडमरु-मध्य और अदन की खाडी में जलदस्युओं से निपटने के लिए मिलकर काम किया है, फिर भी हमारे क्षेत्र के कुछ हिस्सों में राजनीतिक अस्थिरता, गरीबी तथा विकास की कमी की वजह से खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा, सक्रिय व्यापार मार्ग के तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र का महत्व बढेगा. जैसे-जैसे हम विकास के नये स्तंभ के तौर पर ब्लू इकोनॉमी की अवधारणा की ओर बढते हैं, हमारे समुद्रों की सुरक्षा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है.
सुषमा ने कहा, हम भारत-अफ्रीका फोरम समिट (आईएएफएस) के फ्लैगशिप कार्यक्रम के माध्यम से आर्थिक विकास, मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी संरचना विकास और समुद्री सुरक्षा में भी सक्रियता से लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि एशियाई और अफ्रीकी देशों को संयुक्त राष्ट्र को सुधारने, संयुक्त राष्ट्र महासभा को नया स्वरुप प्रदान करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता का विस्तार करने के लिए सतत प्रयास करने की जरुरत है.
सुषमा ने कहा, मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार इसमें एशिया और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण तरीके से बढाएगा. उन्होंने कहा कि भारत एशियाई और अफ्रीकी क्षेत्र को अपने विस्तारित पडोस का हिस्सा मानता है और दोनों महाद्वीपों के साथ साझेदारी को विशेष मानता है.
उन्होंने कहा, एशिया में आज सबसे तेजी से बढती अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत दोनों महाद्वीपों के देशों के साथ आर्थिक साझेदारी को अत्यंत महत्व दे रहा है. सुषमा ने कहा कि 1992 में ‘लुक ईस्ट नीति’ की शुरुआत के बाद दक्षिण और पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत का संवाद और एकीकरण विकसित हुआ है और हमें एक एशियाई सदी का सपना पूरा करने के लिए अपनी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के माध्यम से अपने ऊर्जावान पडोसियों के साथ व्यापक एकीकरण की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि अफ्रीका नये अवसरों का मंच है और भारत उसके आर्थिक विकास में तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ उसके एकीकरण में दिलचस्पी रखता है.
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