पाकिस्तान आतंकियों की जगह भारत के खिलाफ करेगा अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल : हक्कानी
Updated at : 21 Apr 2015 3:52 PM (IST)
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न्यूयार्क : पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक रह चुके हुसैन हक्कानी का कहना है कि जिहादियों से मुकाबले के लिए अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को बेचे गए करीब एक अरब डॉलर के जंगी हेलिकॉप्टरों, मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों को भारत के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है. हुसैन हक्कानी अमेरिका में […]
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न्यूयार्क : पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक रह चुके हुसैन हक्कानी का कहना है कि जिहादियों से मुकाबले के लिए अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को बेचे गए करीब एक अरब डॉलर के जंगी हेलिकॉप्टरों, मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों को भारत के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है.
हुसैन हक्कानी अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं और पाकिस्तान की भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. बेनजीर भुट्टो के भरोसेमंद राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी हक्कानी ने काम किया है. फिलहाल हुसैन हक्कानी अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर के तौर पर भी कार्यरत हैं. पाकिस्तान और भारत के संबंधों पर हक्कानी समय-समय पर अपनी राय जाहिर करते रहे हैं. अभी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे पर भी हक्कानी ने पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन में भारत और अमेरिका की निकटता को लेकर पाकिस्तान के लिए चीन के साथ एक नए रिश्ते की शुरुआत की बात कही थी.
हक्कानी ने कहा कि ओबामा प्रशासन के पाकिस्तान को अमेरिका निर्मित जंगी हेलिकॉप्टरों, मिसाइलों और अन्य उपकरण बेचने के फैसले से इस्लामी चरमपंथियों के खिलाफ देश की लडाई का मकसद तो पूरा नहीं होगा बल्कि इससे दक्षिण एशिया में संघर्ष भडकेगा.
हक्कानी ने ‘क्यों हम ये हमलावर हेलिकॉप्टर पाकिस्तान को भेज रहे हैं’ शीर्षक से वाल स्टरीट जर्नल में लिखा है कि अपने जेहादियों से निपटने में पाकिस्तान को नाकामयाबी हथियारों की कमी के कारण नहीं बल्कि इच्छाशक्ति नहीं रहने के कारण मिली है. जब तक पाकिस्तान अपना वैश्विक नजरिया नहीं बदलता तब तक अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल जिहादियों से मुकाबले की बजाए भारत और कथित घरेलू दुश्मनों के खिलाफ लडने में या उन्हें धमकाने में होता रहेगा.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पिछले व्यवहार को देखते हुए ऐसा लगता है कि 15 एएच-एक जेड वाइपर हेलिकॉप्टर और 1,000 हेलिफायर मिसाइलों के साथ ही संचार और प्रशिक्षण उपकरणों का इस्तेमाल उत्तर पश्चिम में जिहादियों के खिलाफ लड़ने की जगह कश्मीर में विवादित सीमा पर और दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत में बागियों के खिलाफ होगा.
हक्कानी ने कहा, भारत के साथ प्रतिस्पर्धा अभी भी पाकिस्तान की विदेशी और घरेलू नीतियों में दबदबे वाला विचार बना हुआ है. पिछले वर्षों में पाकिस्तान को 1950 के बाद से करीब 40 अरब डॉलर की सहायता से भारत के साथ क्षेत्रीय सैन्य बराबरी की खुशफहमी को बल मिला. अपने से बडे पडोसी के खिलाफ सुरक्षा लक्ष्य की बात तो जायज है लेकिन हमेशा बराबरी में लगे रहना, ये ठीक नहीं.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को और सैन्य उपकरण बेचने की बजाए अमेरिकी अधिकारियों को इस्लामाबाद को समझाना चाहिए कि भारत से होड़ वैसी ही है जैसे बेल्जियम प्रतिद्वंद्वी फ्रांस और जर्मनी से करता है.
दोनों दक्षिण एशियाई परमाणु हथियार संपन्न प्रतिद्वंद्वियों के बीच तुलना करते हुए हक्कानी ने कहा कि भारत की आबादी पाकिस्तान की आबादी से छह गुणा ज्यादा है जबकि भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से 10 गुणा बडी है. तकरीबन 2,000 अरब डॉलर की भारत की अर्थव्यवस्था लगातार बढ रही है, वहीं 245 अरब डॉलर के साथ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कभी-कभार ही बढती है और जिहादी आतंकवाद का इस पर साया है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंरिक राष्ट्रवादी एकता को बनाए रखने के लिए अपने स्कूली पाठ्यक्रम, प्रचार और इस्लामी विधान तक इस्लामी विचारधारा पर टिका हुआ है. निस्संदेह, इससे चरमपंथ और धार्मिक असहिष्णुता को बढावा मिलता है.
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