कोर्ट ने बुगती हत्या मामले में मुशर्रफ को दोषी करार दिया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jan 2015 6:16 PM (IST)
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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाज अकबर खान बुगती की हत्या के मामले में आतंकवाद विरोधी अदालत ने अभ्यारोपित किया. बुगती मुशर्रफ के शासनकाल में चलाए गए एक सैन्य अभियान में मारे गए थे. प्रांतीय राजधानी क्वेटा में अदालत ने 71 वर्षीय नेता को आरोपित किया और […]
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इस्लामाबाद : पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को बलूच राष्ट्रवादी नेता नवाज अकबर खान बुगती की हत्या के मामले में आतंकवाद विरोधी अदालत ने अभ्यारोपित किया. बुगती मुशर्रफ के शासनकाल में चलाए गए एक सैन्य अभियान में मारे गए थे. प्रांतीय राजधानी क्वेटा में अदालत ने 71 वर्षीय नेता को आरोपित किया और मामले की सुनवाई चार फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी.
न्यायाधीश ने कहा कि चार फरवरी से मामले की नियमित सुनवाई की जाएगी. बलूचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने कबीले के मुखिया बुगती वर्ष 2006 में सैन्य अभियान में मारे गए थे. उस समय देश के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख रहे मुशर्रफ ने इस अभियान को हरी झंडी दिखाई थी.
बुगती की मौत ने राष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दे दिया था और इसने 2006 में बलूचिस्तान में पहले ही पांव पसार चुके सशस्त्र चरमपंथ में आग में घी डालने का काम किया था. इस मामले में दो अन्य सह आरोपियों मुशर्रफ शासनकाल में आफताब खान शेरपाओ और पूर्व प्रांतीय गृह मंत्री शोएब नूशेरवान को भी बलूच नेता की हत्या में उनकी कथित भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया.
इस मामले की पूरी न्यायिक प्रक्रिया में मुशर्रफ कभी अदालत में पेश नहीं हुए जो वर्ष 2009 से ही जारी है. यह उनकी दोष सिद्धि की वजह बनी. अदालत में आरोपपत्र पढे जाने के समय मुशर्रफ गैर हाजिर थे.
इससे पूर्व , मुशर्रफ के वकील ने अदालत में एक मेडिकल रिपोर्ट पेश की और पूर्व राष्ट्रपति को पेशी से छूट दिए जाने की अपील की. मुशर्रफ के वकील ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति पीठ दर्द से परेशान हैं. अदालत ने इस पर कहा कि मेडिकल बोर्ड द्वारा मुशर्रफ की जांच करने और उनके स्वास्थ्य के बारे में निष्पक्ष आकलन किए जाने के बाद ही उन्हें पेशी से छूट दी जाएगी.
मुशर्रफ पहले ही वर्ष 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में आरोपों का सामना कर रहे हैं. वह इस मामले में जमानत पर हैं. पांच वर्षो के स्व-निर्वासन के बाद 2013 में देश लौटने के बाद से ही वह राष्ट्रद्रोह समेत विभिन्न अदालती मामलों का सामना कर रहे हैं.
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