अब बिना सुई लगेंगे टीके

लंदन : ब्रिटेन के एडिनबरा में एक ऐसे स्किनपैच को पेश किया गया, जिसके जरिये सस्ते और अधिक प्रभावी टीके तैयार किये जा सकते हैं. इस टीके के आविष्कारक ने बताया कि सुई की जगह पैच के इस्तेमाल से दुनिया भर में बीमारियों की रोकथाम के तौरे तरीके बदले सकते हैं. प्रोफेसर मार्ककेंडल ने कहा […]
लंदन : ब्रिटेन के एडिनबरा में एक ऐसे स्किनपैच को पेश किया गया, जिसके जरिये सस्ते और अधिक प्रभावी टीके तैयार किये जा सकते हैं. इस टीके के आविष्कारक ने बताया कि सुई की जगह पैच के इस्तेमाल से दुनिया भर में बीमारियों की रोकथाम के तौरे तरीके बदले सकते हैं.
प्रोफेसर मार्ककेंडल ने कहा कि इस नये तरीके से मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए उपयोगी टीके तैयार हो सकते हैं. चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस खबर का स्वागत किया है, लेकिन यह चेतावनी भी दी है कि यह कुछ मरीजों के लिए उचित नहीं हो सकता है.
सही निशाना
परंपरागत सुई का पहला इस्तेमाल आज से करीब 160 साल पहले किया गया था. प्रो केंडल बताते हैं कि इसके अलावा कुछ अन्य वजहें भी इसे अहम आविष्कार बना देती हैं. पैच में हजारों की संख्या में छोटे प्रक्षेपक टीके को रिलीज करते हैं, जिसे सूखे रूप में त्वचा पर लगाया जाता है.
वह बताते हैं कि नैनोपैच में प्रक्षेपक त्वचा की प्रतिरोधक प्रणाली पर काम करते हैं. हम त्वचा की सतह से इन कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं, जो बाल की चौड़ाई के बराबर होती हैं. ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय स्थित उनकी प्रयोगशाला में परीक्षणों के दौरान नैनोपैच का इस्तेमाल फ्लू टीके के लिए किया गया.
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