अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए ईरानी विमान पाकिस्तान में शिफ्ट? हुआ ये खुलासा

Published by :Amitabh Kumar
Published at :12 May 2026 6:53 AM (IST)
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Iran US Mediation News

ईरान-यूएस मध्यस्थता के वक्त की तस्वीर (Photo: PTI)

ईरान-अमेरिका टकराव के बीच खबर है कि पाकिस्तान ने अपने नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को उतरने दिया. इससे उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाने में मदद मिली. इससे पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

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अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से CBS News की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान-अमेरिका टकराव के दौरान पाकिस्तान ने चुपचाप ईरान की मदद की. उसने अपने एक अहम एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को पार्क करने की इजाजत दी. खास बात ये है कि उसी समय पाकिस्तान खुद को तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा था.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया, उसके तुरंत बाद ईरान ने अपने कई सैन्य विमान रावलपिंडी के पास PAF Base Nur Khan पर भेज दिए. रिपोर्ट के अनुसार, इनमें ईरानी एयरफोर्स का RC-130 जासूसी विमान भी शामिल था. अधिकारियों के मुताबिक, ये सब गुप्त तरीके से हुआ. ईरान ने अपने बचे हुए विमान और सैन्य संसाधनों को बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित जगह शिफ्ट किया.

लिंडसे ग्राहम का एक्स पोस्ट

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने क्या कहा

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने X पर लिखा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से पूरी तरह सोचने की जरूरत होगी. मतलब ये कि अगर पाकिस्तान सच में ऐसा कर रहा है, तो उसकी मध्यस्थता पर सवाल उठेंगे और उसकी भरोसेमंद छवि पर असर पड़ेगा.

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लिंडसे ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के पहले के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए, अगर यह रिपोर्ट सच निकले तो उन्हें हैरानी नहीं होगी. यानी हालात और पुराने रुख को देखकर ऐसी बात असंभव नहीं लगती.

पाकिस्तान ने रिपोर्ट को किया खारिज

हालांकि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नूर खान एयरबेस से जुड़ी इन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया. उन्होंने CBS News से कहा कि ऐसी कोई भी गतिविधि छिप नहीं सकती, क्योंकि यह एयरबेस घनी आबादी वाले शहरी इलाके में स्थित है.

कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान भेजे गये

ईरान ने कथित तौर पर अपने कुछ नागरिक विमान अफगानिस्तान में भेज दिए, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह साफ नहीं है कि उनमें सैन्य विमान भी थे या नहीं.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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