Hero Splendor में है, लेकिन R15 में नहीं! आखिर क्यों खत्म हो रहा है किक स्टार्ट का दौर?

Edited by Rajeev Kumar
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नई बाइक और स्कूटर में किक स्टार्ट क्यों नहीं मिलता / एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

EFI टेक्नोलॉजी, एडवांस बैटरी और नए डिजाइन की वजह से कई आधुनिक बाइक और स्कूटर से किक स्टार्ट गायब हो चुका है. जानिए किन मॉडल्स में यह फीचर अब भी मिलता है और किनमें नहीं.

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आज के कई नई बाइक्स और स्कूटर्स में किक स्टार्ट क्यों नहीं मिलता? कभी बैटरी बैठ जाए तो क्या होगा? यह सवाल आज भी लाखों भारतीय टू-व्हीलर खरीदारों के मन में आता है. एक समय था जब लगभग हर मोटरसाइकिल और स्कूटर में किक स्टार्ट आम फीचर हुआ करता था, लेकिन अब बाजार में आने वाले ज्यादातर नए मॉडल केवल सेल्फ स्टार्ट के साथ ही उपलब्ध हैं. इसके पीछे सिर्फ डिजाइन का बदलाव नहीं, बल्कि आधुनिक इंजन टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और ग्राहकों की बदलती जरूरतें भी बड़ी वजह हैं.

EFI टेक्नोलॉजी ने बदल दिया पूरा खेल

पुराने जमाने की बाइक और स्कूटर कार्ब्यूरेटर सिस्टम पर काम करते थे. ऐसे वाहनों में इंजन को किक मारकर आसानी से स्टार्ट किया जा सकता था. लेकिन अब ज्यादातर टू-व्हीलर्स में इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन (EFI) सिस्टम आता है. इसमें फ्यूल पंप, सेंसर और ECU जैसे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स होते हैं, जिन्हें काम करने के लिए बैटरी से पर्याप्त पावर चाहिए होती है.

अगर बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाए तो केवल किक मारने से इंजन स्टार्ट नहीं हो पाता. यही वजह है कि कई कंपनियां किक स्टार्ट मैकेनिज्म को हटाकर पूरी तरह सेल्फ स्टार्ट सिस्टम पर फोकस कर रही हैं. यह भी पढ़ें: Plug-in Hybrid vs Strong Hybrid: भारत में कौन-सी कार टेक्नोलॉजी है ज्यादा समझदारी?

बेहतर बैटरी और स्टार्टर मोटर ने घटाई जरूरत

आज के टू-व्हीलर्स में मेंटेनेंस-फ्री बैटरियां और ज्यादा भरोसेमंद स्टार्टर मोटर दी जाती हैं. पहले बैटरी जल्दी खराब हो जाती थी, इसलिए किक स्टार्ट बैकअप जरूरी माना जाता था. अब आधुनिक बैटरियां ज्यादा समय तक चलती हैं और इलेक्ट्रिकल सिस्टम भी काफी एडवांस हो चुके हैं.

यही कारण है कि कंपनियां मानती हैं कि ज्यादातर ग्राहकों को अब किक स्टार्ट की जरूरत महसूस नहीं होती.

डिजाइन और वजन कम करने पर भी है जोर

नई स्पोर्ट्स बाइक, प्रीमियम स्कूटर और एडवेंचर मोटरसाइकिलों में हर किलो वजन और हर इंच जगह मायने रखती है. किक स्टार्ट लगाने के लिए अतिरिक्त लीवर, गियर और मैकेनिकल पार्ट्स की जरूरत होती है. इससे वाहन का वजन बढ़ता है और डिजाइन भी प्रभावित हो सकता है.

इसी वजह से Yamaha R15, TVS Apache, Bajaj Pulsar NS200 और Royal Enfield Classic 350 जैसे मॉडल अब बिना किक स्टार्ट के आते हैं.

किन बाइक्स में आज भी मिलता है किक स्टार्ट?

हालांकि किक स्टार्ट पूरी तरह गायब नहीं हुआ है. बजट और कम्यूटर सेगमेंट में कई मॉडल अभी भी ड्यूल स्टार्ट सिस्टम के साथ आते हैं.

Hero Splendor Plus, Hero HF Deluxe, Honda Shine 125, Honda SP125 और Bajaj Pulsar 125 जैसी मोटरसाइकिलों में किक स्टार्ट का विकल्प मिलता है. स्कूटर सेगमेंट में Honda Activa 6G, TVS Jupiter 110, Suzuki Access 125 और Yamaha RayZR 125 Fi Hybrid के कुछ वेरिएंट्स में भी यह सुविधा मौजूद है.

इन वाहनों को खासतौर पर ऐसे ग्राहकों के लिए डिजाइन किया जाता है जो अतिरिक्त भरोसेमंद स्टार्टिंग विकल्प चाहते हैं.

किन स्कूटर और बाइक्स में नहीं मिलता किक स्टार्ट?

प्रीमियम और परफॉर्मेंस सेगमेंट में किक स्टार्ट लगभग खत्म हो चुका है. Hero Xtreme 125R, TVS Raider 125, TVS Apache RTR 160 4V, Yamaha R15 V4, Bajaj Pulsar NS200 और Royal Enfield Classic 350 जैसे मॉडल केवल सेल्फ स्टार्ट के साथ आते हैं.

स्कूटर सेगमेंट में TVS Ntorq 125 और Yamaha Aerox 155 जैसे मॉडल भी बिना किक स्टार्ट उपलब्ध हैं. वहीं इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में किक स्टार्ट का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि उनमें इंजन नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक मोटर होती है. Ola S1 Pro, Ather 450X और TVS iQube जैसे ईवी पूरी तरह डिजिटल स्टार्ट सिस्टम पर निर्भर करते हैं.

क्या भविष्य में पूरी तरह खत्म हो जाएगा किक स्टार्ट?

ऑटो इंडस्ट्री जिस तेजी से इलेक्ट्रॉनिक और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की तरफ बढ़ रही है, उसे देखते हुए किक स्टार्ट का इस्तेमाल आने वाले वर्षों में और कम हो सकता है. हालांकि ग्रामीण इलाकों और कम्यूटर सेगमेंट में इसकी मांग अभी भी बनी हुई है. यही वजह है कि कुछ कंपनियां बजट मॉडल्स में इसे बनाए हुए हैं. लेकिन प्रीमियम और नई पीढ़ी के टू-व्हीलर्स में किक स्टार्ट अब धीरे-धीरे इतिहास बनता जा रहा है. यह भी पढ़ें: इन 4 नंबरों में छिपी है टायर की पूरी कुंडली, 1 मिनट में जानें बदलने का सही समय

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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