इन 4 नंबरों में छिपी है टायर की पूरी कुंडली, 1 मिनट में जानें बदलने का सही समय

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कार का टायर / फोटो- एआई इमेज

Car Tyre Expiry Date: कार के टायर सड़क पर आपकी सुरक्षा की पहली कड़ी होते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग उनकी उम्र पर ध्यान ही नहीं देते. ऐसे में सिर्फ एक मिनट में टायर पर लिखे एक खास कोड को देखकर आप पता लगा सकते हैं, कि आपका टायर कितना पुराना है और उसे बदलने का समय आ गया है या नहीं.

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क्या आप जानते हैं कि आपकी कार के टायर बाहर से बिल्कुल ठीक दिखने के बावजूद खतरनाक साबित हो सकते हैं? अक्सर हम कार की सर्विस, इंजन ऑयल और माइलेज पर ही सिर्फ ध्यान देते हैं, लेकिन टायरों को तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए. बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि टायरों की भी एक एक्सपायरी डेट होती है और समय के साथ उनका रबर कमजोर होने लगता है. कई बार टायर दिखने में बाहर से बिल्कुल नए जैसे लगते हैं, फिर भी वे अंदर से पुराने और कमजोर हो चुके होते हैं. ऐसे टायर अचानक फट सकते हैं, गाड़ी की पकड़ कम कर सकते हैं और बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं. इसलिए टायर की उम्र जानना आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अच्छी बात यह है कि आप सिर्फ एक मिनट में अपने टायर की उम्र का पता लगा सकते हैं. आइए जानते हैं इसका आसान तरीका.

टायर की उम्र जानना क्यों है जरूरी?

टायर रबर से बने होते हैं और समय के साथ उनकी मजबूती कम होने लगती है. तेज धूप, गर्मी, बारिश और खराब सड़कें टायरों को धीरे-धीरे कमजोर बना देती हैं. यही वजह है कि बाहर से ठीक दिखने वाला टायर भी अंदर से पुराना हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कार के टायरों को 5 से 6 साल के भीतर बदल देना चाहिए, भले ही उनका इस्तेमाल कम हुआ हो. भारत जैसे गर्म मौसम वाले देशों में टायरों की उम्र और तेजी से कम हो सकती है.

टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट कैसे चेक करें?

टायर की उम्र जानने के लिए आपको किसी खास डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ेगी. बस टायर की साइडवॉल (किनारे वाले हिस्से) को ध्यान से देखें. यहां आपको DOT से शुरू होने वाला एक कोड दिखाई देगा. इस कोड के आखिर में चार नंबर लिखे होते हैं. यही नंबर बताते हैं कि टायर कब बनाया गया था. जैसे कि मान लीजिए, टायर के किनारे वाले हिस्से पर DOT XXXX 2226 लिखा हुआ है. इसमें 22 का मतलब साल का 22वां सप्ताह, 26 का मतलब साल 2026 है. यानी कि यह टायर साल 2026 के 22वें सप्ताह यानी लगभग मई 2026 में बनाया गया था. वहीं, अगर आपके टायर पर सिर्फ 3 अंकों का कोड दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि वह टायर साल 2000 से पहले का है और उसे तुरंत बदल देना चाहिए.

कितने पुराने टायर को सुरक्षित माना जाता है?

  • 0 से 3 साल: पूरी तरह सुरक्षित
  • 3 से 5 साल: इस्तेमाल के लायक, लेकिन रेगुलर चेक करना जरूरी
  • 5 से 6 साल: बदलने की तैयारी कर लें
  • 6 साल से ज्यादा: इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता

कई लोग स्टेपनी (स्पेयर टायर) को भूल जाते हैं, लेकिन उसकी उम्र भी उसी तरह बढ़ती है. इसलिए उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट भी जरूर चेक करें.

टायर पुराने होने के संकेत

कई बार टायर की उम्र पूरी होने से पहले ही कुछ संकेत मिलने लगते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देकर तुरंत जांच कर टायर बदलने पर विचार करना चाहिए.

  • टायर के किनारों पर छोटी-छोटी दरारें दिखना
  • रबर का सख्त या भुरभुरा होना
  • बार-बार हवा कम होना
  • सड़क पर ज्यादा शोर सुनाई देना
  • गाड़ी की पकड़ और ब्रेकिंग में कमी महसूस होना

नया टायर खरीदते समय रखें यह बात ध्यान

जब भी आप अपनी गाड़ी के लिए नया टायर खरीदें, तो उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर चेक करें. कई बार टायर लंबे समय तक गोदाम में पड़े रहते हैं. ऐसे में दिखने में नया टायर भी पहले से पुराना हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, टायर खरीदते समय 6 से 12 महीने के भीतर बने टायर को प्राथमिकता देनी चाहिए.

यह भी पढ़ें: टायरों का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? सालों से गाड़ी चलाने वाले भी नहीं जानते इसकी वजह

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शिवानी शाह

लेखक के बारे में

By शिवानी शाह

शिवानी शाह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में वह कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह स्मार्टफोन्स, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, बायर्स गाइड और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं.

टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

शिवानी का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करती हैं. इसलिए वह हर खबर को अच्छी तरह रिसर्च करके, आसान भाषा में और सही जानकारी के साथ लिखती हैं, ताकि हर उम्र के पाठक उसे आसानी से समझ सकें.

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