आपकी गाड़ी की EMI बाउंस हो गई है? रिकवरी एजेंट परेशान करें तो तुरंत दिखाएं सुप्रीम कोर्ट का ये नियम
गाड़ी की EMI बाउंस होने पर क्या बैंक जबरन कार-बाइक ले सकता है? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
अगर आपकी कार या बाइक की EMI बाउंस हो गई है, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट जबरन आपकी गाड़ी नहीं छीन सकते. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि गाड़ी जब्त करने से पहले 7 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है.
Car Bike EMI Bounce: अगर आपने लोन पर कार, बाइक या ट्रक खरीदा है तो सबसे बड़ा डर EMI बाउंस होने का होता है. ऐसी स्थिति में बैंक या NBFC के पास कुछ परिस्थितियों में वाहन वापस लेने का अधिकार हो सकता है.
तो क्या वे बीच सड़क आपकी गाड़ी रोक सकते हैं या आपके घर के बाहर से गाड़ी उठा सकते हैं? इस अहम मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तर प्रदेश के अयोध्या का है. हरि दत्त शर्मा ने 2019 में Cholamandalam Investment and Finance Company से Tata SFC 407 ट्रक खरीदने के लिए लोन लिया था. बाद में EMI का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने कार्रवाई शुरू की. इससे पहले भी कंपनी ने ट्रक अपने कब्जे में लिया था, लेकिन भुगतान के बाद उसे वापस कर दिया गया था. इसके बाद दोबारा EMI डिफॉल्ट हुआ.
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रात 1 बजे उठा ले गए ट्रक
ट्रक मालिक के मुताबिक, 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 बजे चार लोग उसके ट्रक के पास पहुंचे. ट्रक अयोध्या में एक जगह खड़ा था. आरोप था कि लोगों ने स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और ट्रक लेकर चले गए. मालिक ने उसी दिन e-FIR भी दर्ज कराई. बाद में उसे पता चला कि फाइनेंस कंपनी ने ट्रक को अपने कब्जे में लिया था और 31 अगस्त 2023 को इसे 4.50 लाख रुपये में बेच दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने माना कि लोन डिफॉल्ट होने पर फाइनेंसर को कॉन्ट्रैक्ट के तहत वाहन वापस लेने का अधिकार हो सकता है. लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल कानून और तय प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए. यानी सिर्फ EMI न भरने की वजह से रिकवरी एजेंट को बल प्रयोग, चोरी-छिपे कार्रवाई या मनमाने तरीके से वाहन उठाने की छूट नहीं मिल जाती.
7 दिन के नोटिस पर क्या कहा गया?
इस मामले में लोन एग्रीमेंट में वाहन जब्त करने से पहले 7 दिन का नोटिस देने की शर्त थी. सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2023 में ट्रक उठाने से पहले इस तरह का 7 दिन का नोटिस नहीं दिया गया था. कोर्ट ने यह भी माना कि जिस तरीके से वाहन कब्जे में लिया गया, वह शांतिपूर्ण और तय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था.
ध्यान दें: इसका मतलब यह नहीं है कि हर वाहन लोन में कानून की ओर से एक जैसा 7 दिन का नियम लागू होता है. आपके लोन एग्रीमेंट में जब्ती और नोटिस की क्या शर्तें हैं, यह भी जरूरी है.
RBI के नियम भी क्या कहते हैं?
RBI लंबे समय से बैंकों और NBFCs को रिकवरी के दौरान उत्पीड़न और जबरदस्ती से बचने के निर्देश देता रहा है. RBI के नियमों के मुताबिक रिकवरी एजेंट:
- धमकी या शारीरिक दबाव नहीं बना सकते.
- ग्राहक को सार्वजनिक रूप से अपमानित नहीं कर सकते.
- परिवार की निजता में अनावश्यक दखल नहीं दे सकते.
- धमकी भरे या गुमनाम कॉल नहीं कर सकते.
- तय नियमों के खिलाफ मनमाने तरीके से रिकवरी नहीं कर सकते.
RBI के वाहन जब्ती संबंधी निर्देशों में NBFC के लोन एग्रीमेंट में नोटिस पीरियड, वाहन कब्जे में लेने की प्रक्रिया और बिक्री से पहले उधार लेने वाले को अंतिम मौका जैसी शर्तों को स्पष्ट रखने की बात कही गई है.
तो क्या बैंक आपकी गाड़ी जब्त कर सकता है?
हां, कुछ परिस्थितियों में कर सकता है. अगर लोन एग्रीमेंट में वाहन को सिक्योरिटी के तौर पर रखा गया है और उधार लेने वाला लगातार भुगतान में डिफॉल्ट करता है, तो फाइनेंसर के पास कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक जब्ती का अधिकार हो सकता है. लेकिन तरीका जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉन्ट्रैक्चुअल जब्ती का अधिकार बलपूर्वक या चोरी-छिपे वाहन छीनने का लाइसेंस नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को कितना मुआवजा दिया?
कोर्ट ने ट्रक वापस करने का आदेश नहीं दिया, क्योंकि वह पहले ही बेचा जा चुका था. इसके बजाय कंपनी को:
- दोनों लोन अकाउंट बंद करने का आदेश दिया गया.
- ट्रक की बिक्री से मिले ₹4.50 लाख वापस करने को कहा गया.
- इस रकम पर बिक्री की तारीख से भुगतान तक 6% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया गया.
- मानसिक पीड़ा और आजीविका के नुकसान के लिए ₹10 लाख मुआवजा दिया गया.
- मुकदमे के खर्च के लिए ₹50,000 देने का आदेश दिया गया.
यानी कुल मिलाकर ₹14.50 लाख, साथ में ₹4.50 लाख की रकम पर निर्धारित ब्याज का आदेश हुआ.
अगर रिकवरी एजेंट गाड़ी लेने आए तो क्या करें?
अगर आपकी EMI डिफॉल्ट हुई है और फाइनेंसर वाहन वापस लेने की कार्रवाई कर रहा है, तो सबसे पहले लोन एग्रीमेंट और भेजे गए नोटिस की शर्तें देखें. ध्यान रखें:
- रिकवरी एजेंट से पहचान और ऑथराइजेशन मांगें.
- फाइनेंस कंपनी से लिखित में बकाया रकम और जब्ती की प्रक्रिया पूछें.
- किसी तरह की धमकी या जबरदस्ती हो तो उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें.
- विवाद होने पर फाइनेंसर के grievance redressal mechanism का इस्तेमाल करें.
- जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लें.
RBI के नियमों में बैंकों और NBFCs को रिकवरी एजेंट की गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है और एजेंट्स को उत्पीड़न या धमकाने से रोकने के निर्देश हैं.
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