यौनकर्मियों को एड्स संक्रमण से बचाने के लिए सोनागाछी में होगी नयी शुरुआत
Updated at : 01 Jan 2015 3:09 PM (IST)
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कोलकाता : यौनकर्मियों को एड्स के संक्रमण से बचाने के लिए कोलकाता में एक नयी योजना शुरू की जा रही है. इस योजना की शुरुआत एशिया में देह व्यापार के सबसे बड़े बाजार सोनागाछी से होगी. ऐसा होने पर यह देश में इस तरह का पहला इलाका होगा जहां परियोजना लागू की जायेगी. यौनकर्मियों के […]
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कोलकाता : यौनकर्मियों को एड्स के संक्रमण से बचाने के लिए कोलकाता में एक नयी योजना शुरू की जा रही है. इस योजना की शुरुआत एशिया में देह व्यापार के सबसे बड़े बाजार सोनागाछी से होगी. ऐसा होने पर यह देश में इस तरह का पहला इलाका होगा जहां परियोजना लागू की जायेगी.
यौनकर्मियों के कल्याण के लिए काम करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीआरईपी) परियोजना के तहत एचआईवी से ग्रस्त व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने वाली असंक्रमित यौन कर्मियों को नियमित तौर पर दवाएं दी जायेंगी.
सोनागाछी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एसआरटीआई) के प्रधान समरजीत जना ने कहा कि दवाओं से यौनकर्मियों को एचआईवी विषाणु के संक्रमण से बचने में मदद मिलेगी.बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन परियोजना के लिए पैसे देगी.परियोजना की रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दी गयी है और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है.
जना ने कहा, हमने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी है जिसने इसे नाको को भेज दिया है. हमें अगले कुछ महीनों में नाको से मंजूरी मिलने का इंतजार होगा.एसआरटीआई दरबार महिला समन्वय समिति (डीएमएससी) की एक इकाई है. डीएमएससी पश्चिम बंगाल के 1,30,000 यौनकर्मियों का एक मंच है. जना ने कहा कि कंडोम के इस्तेमाल और हर रोज पीआरईपी दवाएं लेने से एचआईवी संक्रमण से सुरक्षा दोहरी हो जायेगी.
नाको के राष्ट्रीय कार्यक्रम अधिकारी बीबी रेवाडी ने कहा कि पीआरईपी में यौनकर्मियों जैसे सबसे ज्यादा खतरे वाले समूहों में खतरे के कारकों को 60-70 प्रतिशत कम करने की क्षमता है.
उन्होंने कहा, हमें दरबार से कुछ दिनों पहले परियोजना की रिपोर्ट मिली.हम इसे देख रहे हैं. पीआरईपी अभी देश में नहीं आयी है. परियोजना को मंजूरी मिलने पर इसे सबसे पहले सोनागाछी में लागू किया जायेगा.रेवाड़ी ने कहा कि हालांकि कुछ चीजों पर ध्यान दिये जाने की जरूरत है जैसे विशेषकर यौनकर्मियों समेत समाज में इसकी स्वीकार्यता.विदेशों में एचआईवी संक्रमण को रोकने में कंडोम के इस्तेमाल के साथ औषधीय उपचार बहुत सफल रहा है.
एड्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आईएस गिलाडा ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश में एड्स के प्रसार को कम करने में मदद मिलेगी.
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