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खोजी चांद पर गेहूं उगाने की तकनीक

Updated at : 21 Dec 2016 7:36 AM (IST)
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खोजी चांद पर गेहूं उगाने की तकनीक

लैब टू मून प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम उम्र का प्रतिभागी चांद पर जीवन की उम्मीद कर रहे वैज्ञानिकों के लिए जमशेदपुर के 11वीं कक्षा के छात्र प्रशांत रंगनाथन ने बड़ी उम्मीद जगा दी है. उसने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके मूर्त होते ही वहां गेहूं की पैदावार संभव हो जायेगी. प्रतिष्ठित संस्था […]

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लैब टू मून प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम उम्र का प्रतिभागी

चांद पर जीवन की उम्मीद कर रहे वैज्ञानिकों के लिए जमशेदपुर के 11वीं कक्षा के छात्र प्रशांत रंगनाथन ने बड़ी उम्मीद जगा दी है. उसने एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके मूर्त होते ही वहां गेहूं की पैदावार संभव हो जायेगी. प्रतिष्ठित संस्था टीम इंडस द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में कारमेल के 11वीं के छात्र प्रशांत रंगनाथन ने टॉप 25में स्थान हासिल किया है.

संदीप सावर्ण, जमशेदपुर

कारमेल जूनियर कॉलेज (जमशेदपुर) के 11 वीं क्लास के छात्र प्रशांत रंगनाथन ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया है. इसे अगर अगर धरातल पर उतारा जाता है, तो चांद पर भी गेंहू या जौ की खेती आसानी से की जा सकती है. टीम इंडस द्वारा किये गये लैब टू मून प्रोजेक्ट में प्रशांत का प्रोजेक्ट दुनिया भर के 3000 प्रोजेक्टों में टॉप 25 में शामिल रहा. मार्च के पहले सप्ताह में बेंगलुरू में इसका अगला राउंड होगा, इसमें अगर उक्त प्रोजेक्ट को पहला स्थान हासिल होता है, तो 2017 में भारत से जो स्पेस क्राफ्ट चांद पर जायेगा उसमें इस प्रोजेक्ट को शामिल किया जायेगा.

मार्च में होने वाली प्रतियोगिता में जज के रूप में इसरो के पूर्व चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन, फ्रेंच स्पेस एजेंसी सीएनइएस के पूर्व अध्यक्ष एलेन बेनसॉउसन और याले यूनिर्वसिटी के एस्ट्रो फिजिक्स के प्रोफेसर प्रियंवदा नटराजन उपस्थित रहेंगे.

नौ महीने लगे प्रोजेक्ट तैयार करने में : प्रशांत रंगनाथन ने कहा कि उसने 9 महीने की मेहनत के बाद उक्त प्रोजेक्ट को तैयार किया है. वह भविष्य में वैज्ञानिक बनना चाहता है, वह यह फील करना चाहता है कि किसी नये परिवर्तन को उसने सबसे पहले महसूस किया और इसके बाद किसी अन्य ने. इस फील को वह भविष्य में इन्जॉय करना चाहता है. प्रथांत के पिता डॉ रंगनाथन एनएमएल में वैज्ञानिक हैं. उसने अपने प्रोजेक्ट तैयार करने में एनएमएल की वैज्ञानिक सुप्रभा नायर और टीचर परमजीत कौर का योगदान बताया है.

2017 में स्पेस क्राफ्ट जायेंगे चांद पर: बेंगलुरु स्थित एक्सोम रिसर्च लैब द्वारा एक स्पेस क्राफ्ट बनाया जा रहा है. यह स्पेस क्राफ्ट निजी स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे वर्ष 2017 में चांद पर भेजा जायेगा. इससे पूर्व गूगल ल्यूनर एक्सप्राइज कंपीटिशन का आयोजन किया गया. इस कंपीटिशन को इंडिया में टीम इंडस द्वारा आयोजित किया जा रहा है.

नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल : प्रशांत ने बताया कि गेहूं या जौ को उगाने के लिए आयरन ऑक्साइड जरूरी होता है. प्रोजेक्ट को तैयार करने से पूर्व मिट्टी की जांच की गयी. इस जांच के दौरान पाया गया कि भारत की मिट्टी में आयरन ऑक्साइड का पार्टिककल बड़़ा होता है. इसमें नैनो ऑप्टिकल मिलाकर अगर उसका इस्तेमाल गेंहू के बीच में किया जाता है, तो यह क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है. इसी क्लोरोफिल की वजह से पौधा हरा होने के साथ ही इसका ग्रोथ भी तेजी से होता है.

सबसे कम उम्र का प्रतियोगी है प्रशांत : गूगल लूनर एक्सप्राइज की ओर से दुनिया में बड़े पैमाने पर रिसर्च किया जाता है. इस बार चूंकि भारत से चांद पर स्पेसक्राफ्ट भेजा जाना है, इसी वजह से बेंगलुरु स्थित टीम इंडस को उक्त प्रतियोगिता के लिए लैब टू मून प्रोजेक्ट को तैयार करने का जिम्मा दिया गया. इस प्रोजेक्ट को तैयार करने से संबंधित 2 मिनट का वीडियो व पूरा प्रोजेक्ट को लिख कर जमा करना था. इसमें पूरी दुनिया के युवाओं ने हिस्सा लिया. प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए अधिकतम आयु 25 वर्ष थी. चुने गये टॉप 25 प्रोजेक्ट में सबसे कम उम्र का जमशेदपुर का प्रशांत रंगनाथन ही है, वह फिलहाल 11 वीं का छात्र है और 17 साल उसकी उम्र है.

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