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ट्रंप ने पहली बार शी को किया फोन, कहा - वन चाइना पॉलिसी का करेंगे सम्मान

Updated at : 10 Feb 2017 10:37 AM (IST)
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ट्रंप ने पहली बार शी को किया फोन, कहा - वन चाइना पॉलिसी का करेंगे सम्मान

वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग से फोन पर बात की है. बातचीत के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को आश्वस्त किया कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करेगा. ट्रंप के अमेरिका में सत्ता में आने के बाद शी से यह उनकी पहली बात है. यह बातचीत […]

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वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग से फोन पर बात की है. बातचीत के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को आश्वस्त किया कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करेगा. ट्रंप के अमेरिका में सत्ता में आने के बाद शी से यह उनकी पहली बात है. यह बातचीत इसलिए अहम है, क्योंकि पिछले दिनों ट्रंप ने ताइवान की नेता से बात की थी, जिसे चीन अपना हिस्सा मानता रहा है और इसके लिए चीन व अमेरिका के ढाई दशक पहले एक समझौता हुआ है, जिसे वन चाइना पॉलिसी के नाम से जाना जाता है.

व्हाइट हाउस ने अपने एक बयान में कहा है कि दोनों नेताओं के बीच अमेरिकी समय के अनुसार गुरुवार की रात फोन पर बात हुई. ट्रंप ने यह वार्ता जापानी प्रधानमंत्री शिंजे अबे की मेजबानी करने से ठीक पहले की है.

व्हाइट हाउस ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर बात हुई. इस वार्ता में ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी के उस आग्रह को मानने के लिए तैयार हो गये कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी का सम्मान करेगा. व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि दोनों देश के प्रतिनिधि आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करेंगे. दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने एक-दूसरे नागिरकों के प्रति सद्भावना व शुभकामनाएं व्यक्त की. शी ने इस बातचीत के लिए ट्रंप की सराहना की.

क्या है वन चाइना पॉलिसी?

वन चाइन पॉलिसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन एवं पिपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइन के चेयरमैन माओ त्से तुंग के बीच 1972 में संघाई में सहमति बनी थी. इसके तहत अमेरिका यह मानने को तैयार हुआ था कि ताइवान चीन का हिस्सा है और वह चीन के इस दावे को चुनौती नहीं देगा. पर, इसे तुरंत अमेरिका की ओर से वैधानिकता प्रदान नहीं की गयी. कार्टर के समय 1978 में बीजिंग को एकमात्र सरकार की मान्यता प्रदान की गयी और अगले साल ताइवान में अमेरिका ने अपने दूतावास बंद कर लिये. हालांकि इसके बावजूद अमेरिका ने ताइवान के साथ अपने अनौपचारिक रिश्तों को बरकरार रखा.

ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने जब राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ताइवान की राष्ट्रपति त्साइ इंग वेन से फोन पर बात की थी तो चीन इससे भड़क गया था और उसने इसे तुच्छ कार्य की संज्ञा दी थी.

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