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राहुल गांधी ने सुनी प्रदेश संगठन की बात

Updated at : 01 Nov 2014 5:49 AM (IST)
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राहुल गांधी ने सुनी प्रदेश संगठन की बात

रांची : कांग्रेस ने झामुमो को छोड़ एकला चलो की राह पकड़ ली है. गंठबंधन को लेकर प्रदेश नेतृत्व आला नेताओं को मनाने में सफल रहा. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और प्रदेश के दूसरे बड़े नेता गंठबंधन के पक्ष में नहीं थे. झामुमो के साथ बातचीत के क्रम में पहले दौर में ही मामला बिगड़ […]

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रांची : कांग्रेस ने झामुमो को छोड़ एकला चलो की राह पकड़ ली है. गंठबंधन को लेकर प्रदेश नेतृत्व आला नेताओं को मनाने में सफल रहा. प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और प्रदेश के दूसरे बड़े नेता गंठबंधन के पक्ष में नहीं थे.
झामुमो के साथ बातचीत के क्रम में पहले दौर में ही मामला बिगड़ गया था. झामुमो ने 50 सीटों की सूची कांग्रेस को सौंप कर प्रदेश नेतृत्व के सामने चुनौती पेश कर दी थी. संताल परगना में झामुमो दो से तीन सीट भी देने के लिए बमुश्किल तैयार था. वहीं कांग्रेस कम-से-कम आठ सीट पर अड़ी थी. कोल्हान में झामुमो सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. प्रदेश प्रभारी बीके हरि प्रसाद गंठबंधन के पक्ष में थे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष की रिपोर्ट थी कि संताल-कोल्हान में समझौता कर लिया, तो संगठन खत्म हो जायेगा.
इधर झामुमो के साथ कांग्रेस के समझौता होता, तो संताल-कोल्हान में भगदड़ होता. कई बड़े नेता झाविमो या दूसरे दल का दामन थाम लेते. प्रदेश अध्यक्ष संताल परगना के कई सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर चुके थे. कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी सुखदेव भगत के साथ खड़े थे. उन्होंने पहले ही नेताओं को कह दिया था कि प्रदेश नेतृत्व जमीनी हकीकत देखें और फैसला लें. प्रदेश नेतृत्व को गंठबंधन पर दो टूक राय देने को कहा था. प्रदीप बलमुचु, फुरकान अंसारी, आलमगीर आलम सहित कई नेताओं ने गंठबंधन का पूरा विरोध किया था. वहीं वर्तमान विधायक मुखर रूप से कुछ बोल नहीं रहे थे, लेकिन झामुमो से रिश्ता चाहते थे.
सोनिया गांधी ने भी गंठबंधन पर दो टूक पूछा
कांग्रेस के आला नेता दिल्ली में गंठबंधन और विधानसभा चुनाव की बात लेकर सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. सोनिया ने प्रदेश के नेताओं से साफ कहा कि वह बतायें कि झामुमो के साथ जाना है या नहीं. सोनिया से मिलने पहुंचे ज्यादा नेताओं का कहना था कि वर्तमान समय में झामुमो की दावेदारी के बाद संगठन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. सम्मानजनक समझौता नहीं हो रहा है. इसके साथ ही कई नेताओं ने सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाया.
सीटिंग सीट पर नहीं था कांग्रेस को भरोसा
झामुमो को गंठबंधन में 14 सीटिंग सीट मिल रही थी. इन सीटों पर कांग्रेस को भरोसा नहीं था. कांग्रेस को भनक थी कि सीटिंग सीट पर दुबारा जीतना मुश्किल भरा है. कांग्रेस ने पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे दो दर्जन सीटों पर दावेदारी की थी.इसमें नौ सीटें झामुमो से टकरा रही थी. इसकी पूरी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष ने तैयार की थी. आला कमान को प्रदेश अध्यक्ष समझाने में सफल रहे.
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