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UP News: बीमारू से बेमिसाल बना उत्तर प्रदेश, CAG रिपोर्ट ने किया प्रगति का जिक्र, ऐसे बदली सूरत

Updated at : 23 Sep 2025 9:17 PM (IST)
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UP News: उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक पिछड़ेपन और ‘बीमारू राज्य’ की छवि ने घेरा रहा. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पिछले आठ वर्षों में उठाए गए आर्थिक कदमों ने उत्तर प्रदेश को विकास की दौड़ में नई पहचान दिलाई है. 2012-13 में टैक्स कलेक्शन ₹54,000 करोड़ था, जो 2016-17 में बढ़कर ₹85,000 करोड़ हुआ. यूपी का ₹37,000 करोड़ अधिशेष किसी भी राज्य से कहीं अधिक है.

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UP News: उत्तर प्रदेश को लंबे समय तक पिछड़ेपन और ‘बीमारू राज्य’ की छवि ने घेरा रहा. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. भारत के महालेखाकार (सीएजी) की ताज़ा रिपोर्ट में यूपी को उन चुनिंदा 16 राज्यों में शामिल किया गया है, जो राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) में हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश ₹37,000 करोड़ अधिशेष के साथ देश में नंबर-1 पर है. यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की वित्तीय मजबूती का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पिछले आठ वर्षों में उठाए गए आर्थिक कदमों ने उत्तर प्रदेश को विकास की दौड़ में नई पहचान दिलाई है.

कैसे बदली यूपी की तस्वीर?

1.टैक्स कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल

2012-13 में टैक्स कलेक्शन ₹54,000 करोड़ था, जो 2016-17 में बढ़कर ₹85,000 करोड़ हुआ.
योगी सरकार के कार्यकाल में यह 2017-18 के ₹95,000 करोड़ से 2024-25 में अनुमानित ₹2.25 लाख करोड़ तक पहुंच गया.
यानी 8 वर्षों में 1.3 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त कमाई.

2.बजट हुआ दोगुना से ज्यादा

  • 2012-13 में राज्य का बजट ₹2 लाख करोड़ था, जो 2016-17 तक ₹3.46 लाख करोड़ हुआ.
  • 2017-18 में योगी सरकार ने ₹3.84 लाख करोड़ का बजट पेश किया.
  • 2025-26 तक यह आकार ₹8.08 लाख करोड़ तक पहुंचने जा रहा है.

3.आर्थिक उत्पादन में बेमिसाल छलांग

  • 2012-13 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग ₹8 लाख करोड़ था.
  • 2016-17 तक यह ₹12.5 लाख करोड़ हुआ.
  • वर्तमान सरकार के दौरान 2017-18 के ₹13.6 लाख करोड़ से 2025-26 तक यह ₹30 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.

यूपी बनाम अन्य राज्य

यूपी का ₹37,000 करोड़ अधिशेष किसी भी राज्य से कहीं अधिक है. गुजरात (₹19,856 करोड़) और ओडिशा (₹15,560 करोड़) जैसे राज्य भी अधिशेष में हैं, लेकिन यूपी का प्रदर्शन सबसे अलग है. दूसरी ओर आंध्र प्रदेश (-₹43,488 करोड़), तमिलनाडु (-₹36,215 करोड़) और राजस्थान (-₹31,491 करोड़) जैसे बड़े राज्य  अब भी भारी घाटे से जूझ रहे हैं. यह तुलना साफ करती है कि वित्तीय अनुशासन और नीतिगत सुधार ने यूपी को उस श्रेणी में खड़ा कर दिया है, जहां कई पारंपरिक रूप से समृद्ध राज्य भी पीछे रह गए.

  • पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल जैसे कई राज्य अब भी केंद्र के राजस्व घाटा अनुदान पर निर्भर हैं.
  • इसके उलट यूपी ने अपनी आंतरिक कमाई के स्रोत मजबूत किए हैं—जैसे जीएसटी, वैट, एक्साइज और गैर-टैक्स राजस्व.
  • यही कारण है कि प्रदेश ने घाटे की छवि से बाहर आकर अधिशेष की स्थिति हासिल की है.

विशेषज्ञों का मानना

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यूपी का यह प्रदर्शन केवल संयोग नहीं है. यह टैक्स सुधार, डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश का परिणाम है. “अगर यही रफ्तार जारी रही, तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में भारत की सबसे बड़ी राज्यीय अर्थव्यवस्था बन सकता है.”

सरकार का दावा

प्रदेश सरकार का कहना है कि यह उपलब्धि ‘डबल इंजन सरकार’ और मजबूत वित्तीय अनुशासन का नतीजा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि—“उत्तर प्रदेश अब न केवल देश के विकास में भागीदार है, बल्कि नए भारत के आर्थिक नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.”

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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