हजारीबाग के इस किसान ने खेती में वाईफाई को बना दिया लाखों की कमाई का जरिया, जानिये कैसे

Updated at : 14 Dec 2020 7:40 PM (IST)
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हजारीबाग के इस किसान ने खेती में वाईफाई को बना दिया लाखों की कमाई का जरिया, जानिये कैसे

Jharkhand news, Hazaribagh news :परिवार वालों से सहयोग स्वरूप मिले 60 हजार रुपये से कुआं खोदकर झारखंड के सर्वश्रेष्ठ किसान बनने का सपना संतोष कुमार साव ने पूरा किया है. एक घंटे में टपक सिंचाई योजना से 11 एकड़ में लगे सब्जी फसल पर पटवन करते हैं. खेतों को वाईफाई जोन बनाकर सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से अपने मोबाइल से कार्यों पर निगरानी भी रखते हैं.

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Jharkhand news, Hazaribagh news : हजारीबाग (सलाउद्दीन) : परिवार वालों से सहयोग स्वरूप मिले 60 हजार रुपये से कुआं खोदकर झारखंड के सर्वश्रेष्ठ किसान बनने का सपना संतोष कुमार साव ने पूरा किया है. एक घंटे में टपक सिंचाई योजना से 11 एकड़ में लगे सब्जी फसल पर पटवन करते हैं. खेतों को वाईफाई जोन बनाकर सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से अपने मोबाइल से कार्यों पर निगरानी भी रखते हैं.

खेत में काम करनेवाले 16 स्थायी खेतिहर मजदूर को प्रशिक्षण एवं कार्य मोबाइल से निर्देश देकर कराते हैं. खेतों में सालोभर मौसमी सब्जी लगाकर सलाना 15 लाख से अधिक की आमदनी पिछले 10 वर्षों से कर रहे हैं. ये हैं हजारीबाग- चतरा रोड स्थित बांका गांव के संतोष. संतोष प्रगतिशील किसान बनकर गांव में सभी सुख सुविधाओं से लैस 3 तल्ला घर बनाया. साइकिल से चलने की बजाय अब कार से घूमते हैं. इन्हें देखकर सैकड़ों युवक अपने खेतों में लौट गये और किसान बनकर आज आत्मनिर्भर हुए हैं.

हजारीबाग- चतरा रोड में बांका गांव के साहू मुहल्ला के नेमन साव के पुत्र हैं संतोष कुमार साव. 10वीं की पढ़ाई छोड़कर परिवार को आर्थिक तंगी से उठाने के लिए वर्ष्ज्ञ 2001 में खेती से जुड़े. पत्नी फुलमति, दो पुत्री और एक पुत्र भी खेती-बारी में विशेष रुचि लेते हैं. अभी तक 18 वर्षों में 2000 से अधिक किसानों को अपने खेत में बुलाकर प्रशिक्षण दिया है. सबसे पहले वर्ष 2008 में शिमला मिर्च उत्पादन में रिकॉर्ड बनाने के कारण झारखंड सरकार ने सम्मानित किया था. वर्ष 2012 में टपक सिंचाई योजना से गहन खेती करने के लिए सम्मान मिला है.

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खेतों में तकनीक का उपयोग

प्रगतिशील किसान संतोष ने बताया कि जब मेरी उम्र 15 साल की थी. 10वीं की पढ़ाई कर रहा था. मेरे पिता नमन साव खेती-बारी में कर्ज के बोझ से दब गये थे. कर्ज नहीं चुकाने के कारण पूरा परिवार काफी परेशान था. पिता ने कहा कि पढ़ाई- लिखाई छोड़ो और खेती- बारी में लग जाओ. संतोष ने बताया कि शुरूआती दिनों में सालभर में 2 बार सब्जी उगाने के बाद 3 फसल लेने लगे. आमदनी बढ़ाने के लिए तकनीक एवं हाई ब्रीड बीज का इस्तेमाल कर लगातार सफल होते रहे. इसमें निजी बीज एवं खाद कंपनी के लोग आकर सलाह देते रहे. जिसे हमने मेहनत कर खेत में इस्तेमाल किया.

16 मजदूरों को मिल रहा रोजगार

संतोष वर्तमान में 11 एकड़ खेत में जनवरी माह में खीरा, टमाटर, तरबूत, शिमला मिर्च, करेला, बीम, गोभी लगाकर मार्च माह में सब्जी बाजारों में बेचते हैं. मई माह में फूलगोभी, खीरा, टमाटर लगाकर अगस्त माह में बेचते हैं. सितंबर माह में मटर और बीन लगाकर नवंबर और दिसंबर माह में बेचते हैं. साल भर में लगभग 12 लाख रुपये निवेश कर लगभग 27 लाख की आमदनी करते हैं. 16 मजदूरों को मानदेय और खेती सामग्री लगाने के बाद प्रतिमाह एक लाख से अधिक की आमदनी होती है.

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डॉक्टर-इंजीनियर छोड़ बेटा-बेटी भी बने किसान

प्रगतिशील किसान संतोष ने बताया कि दोनों बेटी और बेटा को डॉक्टर- इंजीनियर बनाने की बजाय प्रगतिशील किसान बनाना चाहता हूं. नौकरी के चक्कर में नौकर बनने के बजाय खेतों का मालिक मेरे बच्चे बने. किसान ही देश की तरक्की के आधार हैं. परिवार और देश की तरक्की के लिए किसान शब्द सभी परिवार में इज्जत से लिया जाये.

Posted By : Samir Ranjan.

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