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फिल्म डंकी के नए पोस्टर में पीसीजे 9127 नंबर वाले वेस्पा स्कूटर पर दिखे शाहरुख खान, कोई बात तो है!

Updated at : 11 Nov 2023 9:25 AM (IST)
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फिल्म डंकी के नए पोस्टर में पीसीजे 9127 नंबर वाले वेस्पा स्कूटर पर दिखे शाहरुख खान, कोई बात तो है!

इतालवी और लैटिन भाषा में वेस्पा शब्द का इस्तेमाल ततैया के लिए किया जाता है. हाल के वर्षों में वेस्पा का पुराना स्कूटर भारत की सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आता था. इसके बाद कंपनी ने नए अवतार में इस स्कूटर को उतारा है.

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Vespa Scooter in Dunki Movie : शाहरुख खान की आने वाली फिल्म डंकी का नया पोस्टर जारी किया गया है. इस नए पोस्टर में बॉलीवुड के बादशाह वेस्पा स्कूटर पर नजर आ रहे हैं. एक वक्त था, जब भारत की सड़कों पर यह स्कूटर तेजी से फर्राटा भरते नजर आता था. ये स्कूटर पेट्रोल से चलते थे और अच्छी माइलेज भी देते थे. दिवाली से पहले डंकी के जारी नए पोस्टर में शाहरुख खान वेस्पा स्कूटर चलाते नजर आ रहे हैं. आखिर, इस स्कूटर में ऐसी क्या खास बात है कि बॉलीवुड के सुपर स्टार इसे चलाते दिखाई दे रहे हैं? आइए, इस स्कूटर के बारे में जानते हैं.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बना था वेस्पा स्कूटर

आपको बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद वेस्पा स्कूटर को इटली के लोगों के लिए बनाया गया था. यह स्कूटर इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो की ओर से बनाया गया था. यह कंपनी स्कूटर और मोपेड बनाने वाली इटली की लग्जरी ब्रांड है. इतालवी और लैटिन भाषा में वेस्पा शब्द का इस्तेमाल ततैया के लिए किया जाता है. हाल के वर्षों में वेस्पा का पुराना स्कूटर भारत की सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आता था. इसके बाद कंपनी ने नए अवतार में इस स्कूटर को उतारा है. अब उसके इलेक्ट्रिक वर्जन को बाजार में पेश किया गया है. 19वीं-20वीं सदी में यह स्कूटर भारत और यूरोपीय देशों में खूब बेचा जाता था.

1960 के दशक में पहली बार बाजार ने लॉन्च किया गया था वेस्पा

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इतालवी ऑटोमेकर पियाजियो ने पहली बार 1960 के दशक में बजाज ऑटो को भारत में वेस्पा स्कूटर के उत्पादन का लाइसेंस दिया था. 1971 में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के निजीकरण कार्यक्रमों के एक भाग के रूप में पियाजियो के लाइसेंस का रीन्यूअल नहीं किया गया. यह साझेदारी समाप्त होने के बाद भी बजाज ने वेस्पा के डिजाइन पर चेतक स्कूटर का उत्पादन जारी रखा.

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बजाज के बाद एलएमएल ने थामा पियाजियो का था

भारत में एक और वेस्पा पार्टनर एलएमएल मोटर्स था. 1983 में पियाजियो के साथ एक संयुक्त उद्यम के रूप में एलएमएल ने भारतीय बाजार में वेस्पा से प्रेरित स्कूटर जारी किए. वर्ष 1999 में पियाजियो के साथ लंबे विवाद के बाद एलएमएल ने पियाजियो की हिस्सेदारी वापस खरीद ली और साझेदारी समाप्त हो गई. फिर भी एलएमएल ने वेस्पा से प्रेरित स्कूटर का उत्पादन जारी रखा. 2 जून 2017 को एलएमएल ने दिवालिया होने का नोटिस जारी किया और वह 2018 में स्थायी रूप से बंद हो गई.

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2012 में भारत में दोबारा आया वेस्पा स्कूटर

एलएमएल को दिवालिया घोषित होने से पहले वर्ष 2012 में नई दिल्ली में आयोजित ऑटो एक्सपो से वेस्पा ने भारतीय बाजार में दोबारा प्रवेश किया. पियाजियो ने एक्सपो में अपने स्कूटरों के कई एडिशन लॉन्च किए. वेस्पा ने इस बार किसी भी भारतीय कंपनी से साझेदारी नहीं की और भारत में अपने स्कूटर खुद ही जारी करना शुरू कर दिया. अब भारत में वेस्पा स्कूटर का पांच मॉडल में बिकता है, जिनकी कीमत 1.17 लाख से 1.54 लाख के बीच है. पियाजियो अब इन स्कूटरों का इलेक्ट्रिक एडिशन भी लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसका नाम वेस्पा इलेक्ट्रिका रखा गया है. इसके बारे में कंपनी का दावा है कि वह 3.5 घंटे में फूल चार्ज होने के बाद 100 किलोमीटर तक का माइलेज देगा और वह 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पकड़ सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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