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SEBI Warning: फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप से हो जाएं सावधान, वरना हो सकती है भयानक ठगी

Updated at : 21 May 2025 7:54 PM (IST)
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SEBI warning

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SEBI Warning: सेबी ने निवेशकों को सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप और कम्युनिटी से सतर्क रहने की चेतावनी दी है. इन ग्रुप्स में VIP ट्रेडिंग या फ्री कोर्स के नाम पर निवेशकों को ठगा जा रहा है. नकली प्रोफाइल और झूठे लाभ के सबूत दिखाकर भोले-भाले निवेशकों को भ्रमित किया जाता है. सेबी ने सलाह दी है कि केवल पंजीकृत मध्यस्थों और प्रमाणित प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही निवेश करें और किसी भी अनचाहे संदेश पर भरोसा न करें.

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SEBI Warning: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने आम निवेशकों के हित में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है. यह चेतावनी सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप ग्रुप्स और ऑनलाइन कम्युनिटी के माध्यम से फैल रही फर्जी निवेश योजनाओं को लेकर है. सेबी ने साफ तौर पर कहा है कि निवेशक ऐसे अनचाहे संदेशों और ग्रुप इनवाइट्स से दूर रहें, जो उन्हें VIP ट्रेडिंग टिप्स या फ्री कोर्स के नाम पर ठगने की कोशिश कर रहे हैं.

सोशल मीडिया बन रहा है ठगों का नया अड्डा

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से व्हाट्सएप, टेलीग्राम, और फेसबुक शेयर बाजार में निवेश के नाम पर फर्जीवाड़े का नया जरिया बन चुके हैं. सेबी ने अपनी हालिया जांच में पाया कि कुछ असत्यापित कंपनियां और व्यक्ति खुद को एक्सपर्ट बताकर फर्जी ग्रुप बनाते हैं और भोले-भाले निवेशकों को उसमें शामिल होने का लालच देते हैं.

VIP ग्रुप और फ्री कोर्स है ठगी की चाल

सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, ये इकाइयां अकसर ‘VIP ग्रुप’, ‘फ्री ट्रेडिंग कोर्स’ या ‘100% गारंटीड रिटर्न’ जैसे नामों का इस्तेमाल करती हैं, ताकि यूजर्स को विश्वास दिलाया जा सके कि यह कोई भरोसेमंद योजना है. ग्रुप में शामिल होते ही उन्हें मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट, फर्जी ग्राहकों की तारीफें और आकर्षक रिटर्न की झूठी कहानियां दिखाई जाती हैं.

फर्जी प्रोफाइल से बनते हैं विश्वास के जाल

इन फर्जी ग्रुप्स को और भी भरोसेमंद बनाने के लिए ठग खुद को सेबी-पंजीकृत मध्यस्थ, किसी प्रतिष्ठित संस्था के सीईओ या सार्वजनिक हस्तियों के रूप में पेश करते हैं. नकली प्रोफाइल फोटो, नाम, और फॉलोअर्स के माध्यम से ये लोगों को भ्रमित करते हैं. इससे प्रभावित होकर लोग लाखों रुपये तक इनके बताए बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं.

नकली लाभ के प्रमाण भी होते हैं योजनाबद्ध

सेबी ने यह भी पाया है कि इन ग्रुप्स में शामिल अन्य लोग भी ठगों के साथ मिले होते हैं. वे खुद को असली निवेशक बताकर बड़े मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट और अनुभव साझा करते हैं. यह एक रणनीतिक ढंग से रची गई सोशल इंजीनियरिंग ट्रिक होती है, जो नए निवेशकों का भरोसा जीतने में मदद करती है.

सतर्क रहें और रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म का ही करें इस्तेमाल

सेबी ने कहा है कि निवेशक किसी भी अनधिकृत स्रोत से आई टिप्स या निवेश सुझावों पर ध्यान न दें. निवेश केवल उन्हीं सेबी से रजिस्टर्ड ब्रोकर या वित्तीय सलाहकार के माध्यम से करें. साथ ही, किसी भी WhatsApp या Telegram ग्रुप में शामिल होने से पहले उस ग्रुप की प्रामाणिकता और वैधता की पुष्टि अवश्य करें.

ऐसे मामलों से कैसे बचें?

  • अनचाहे WhatsApp ग्रुप्स या लिंक पर क्लिक न करें.
  • किसी भी निवेश से पहले सेबी की वेबसाइट पर जाकर ब्रोकर या सलाहकार की पुष्टि करें.
  • अगर किसी ग्रुप या व्यक्ति द्वारा बड़ा रिटर्न जल्दी देने का दावा किया जाए, तो सतर्क हो जाएं.
  • किसी भी अनधिकृत बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर न करें.
  • सोशल मीडिया पर दिख रहे मुनाफे के स्क्रीनशॉट या रिव्यू पर विश्वास न करें.

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गलत सूचना और फर्जी प्रोफाइल्स के झांसे में न आएं

निवेश एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय होना चाहिए. यदि आप गलत सूचना या फर्जी प्रोफाइल्स के झांसे में आ जाते हैं, तो आपका मेहनत का पैसा मिनटों में डूब सकता है. ऐसे में सेबी की यह चेतावनी सभी निवेशकों के लिए एक सावधान करने वाला संदेश है. इसलिए हमेशा प्रमाणिक स्रोतों पर भरोसा करें और डिजिटल दुनिया में निवेश करते समय हर कदम फूंक-फूंक कर रखें.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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