Lockdown : 1,116 किलोमीटर साइकिल चला कर दो युवक पहुंचे जमालपुर

लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रांत में मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के सामने विकट परिस्थिति पैदा हो गई है. बिहारी मजदूरों के नियोक्ता ने इस राष्ट्रीय आपदा की घड़ी में मजदूरों को भगवान भरोसे छोड़ दिया.
जमालपुर : लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रांत में मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों के सामने विकट परिस्थिति पैदा हो गई है. बिहारी मजदूरों के नियोक्ता ने इस राष्ट्रीय आपदा की घड़ी में मजदूरों को भगवान भरोसे छोड़ दिया. इसी प्रकार के एक मामले में जमालपुर के दो युवक साइकिल से लगभग 1116 किलोमीटर की यात्रा कर अपना घर पहुंचे. दोनों युवकों को अधिकारियों द्वारा क्वॉरेंटिन सेंटर में रखा गया है.
आपबीती बताते हुए दोनों युवकों में शामिल ईस्ट कॉलोनी थाना क्षेत्र निवासी रवि कुमार 25 वर्ष और अमित कुमार 25 वर्ष ने बताया कि वे दोनों पिछले लंबे समय से उत्तर प्रदेश के मथुरा वृंदावन में एक ठेकेदार के साथ मिलकर मार्बल टाइल्स लगाने का काम करता था. इस बीच 22 मार्च को लॉक डाउन की घोषणा की गई तब तक यह लगा कि 14 अप्रैल को संभवतया लॉकडाउन हटाने की घोषणा की जाएगी. परंतु ऐसा नहीं हुआ. इस बीच ठेकेदार ने भी यह कहकर हाथ खड़ा कर दिया कि अब वह उन लोगों को बैठाकर कोई पैसा नहीं देगा और न ही लॉकडाउन के दौरान कहीं कोई काम आरंभ किया जाएगा. इसलिए अपनी व्यवस्था स्वयं करो.
आनन-फानन में इन लोगों ने काफी मगजमारी के बाद लॉकडाउन में ही किसी तरह जुगत भिड़ा कर अलग-अलग दो साइकिल खरीदी और दोनों साइकिल से ही पिछले 24 अप्रैल को जमालपुर के लिए निकल पड़े. मथुरा से जमालपुर तक आने में ढेर सारी मशक्कत का सामना करना पड़ा और 1,116 किलोमीटर तय करने में पूरे 9 दिन लग गए. जमालपुर पहुंचने पर दोनों युवकों के बारे में प्रशासन को जानकारी मिली.
इस संबंध में बीडीओ राजीव कुमार ने बताया कि जानकारी मिलते ही दोनों युवकों को एनसी घोष प्लस टू बालिका विद्यालय में बनाए गए क्वॉरेंटिन सेंटर में अगले 21 दिन के लिए रखा गया है. दोनों युवकों की चिकित्सकीय जांच कराई गई है.
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By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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