मालदा के हिमसागर आम पर मौसम की मार, अमेरिका जाने वाली पहली खेप अटकी, निर्यातकों में हड़कंप

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 07 Jun 2026 3:42 PM

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Himsagar Mango Export Crisis: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के प्रसिद्ध हिमसागर आम के निर्यात पर मौसम के कारण संकट मंडरा रहा है. बारिश और गर्मी के चलते आमों पर काले धब्बे आने से अमेरिका की पहली खेप रोकनी पड़ी है.

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Himsagar Mango Export Crisis: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के विश्व प्रसिद्ध ‘हिमसागर’ आम के शौकीनों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेहद निराश करने वाली खबर है. मौसम के अजीबोगरीब मिजाज और बेमौसम चक्रव्यूह ने हिमसागर आम के निर्यात (Export) पर संकट खड़ा कर दिया है. लगातार हुई मूसलाधार बारिश और उसके तुरंत बाद बढ़े अत्यधिक तापमान की वजह से पेड़ों पर लगे आमों पर काले धब्बे उभर आये हैं.

आधुनिक बैकिंग तकनीक भी हो गयी फेल

इस बार किसानों और बागवानी विभाग द्वारा आमों की सुरक्षा के लिए अपनायी गयी आधुनिक बैगिंग तकनीक (फलों को विशेष कवर से ढकना) भी मौसम की दोहरी मार के आगे पूरी तरह फेल साबित हुई. बैगिंग के अंदर ही अत्यधिक नमी और बाद में बढ़ी भीषण गर्मी के कारण फलों में फंगल इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षण दिखने लगे हैं, जिसने निर्यातकों की रातों की नींद उड़ा दी है.

अमेरिका जाने वाला पहला कंसाइनमेंट रोकना पड़ा

मालदा के प्रमुख निर्यातक और ‘सृष्टि फूड प्रोडक्ट्स’ के सह-संस्थापक प्रसून चितलांगिया ने खुलासा किया कि इस सीजन में अमेरिका भेजी जाने वाली हिमसागर आम की पहली बड़ी खेप को ऐन वक्त पर रोकना पड़ा. विदेशी आयातक धब्बेदार या हल्के से भी संक्रमित फलों को कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के कारण स्वीकार नहीं करते.

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ऑर्डर भरपूर, पर माल नहीं

अंतरराष्ट्रीय बाजार से इस बार रिकॉर्ड ऑर्डर मिले. इसके बावजूद विदेशी मानकों पर खरे उतरने वाले दाग-रहित और उच्च गुणवत्ता वाले फल जुटाने में निर्यातकों को पसीना बहाना पड़ रहा है.

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क्या पूरा बिजनेस डूबा? मैंगो मर्चेंट्स ने बतायी हकीकत

इस बड़ी चुनौती के बीच मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष उज्ज्वल साहा का मानना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर या निराशाजनक नहीं है. आंतरिक सर्वे के अनुसार, मौसम और फंगल इन्फेक्शन का असर केवल 15 प्रतिशत बैग किये गये आमों पर ही देखा गया है. जिले के बागानों में अभी भी लाखों आम सुरक्षित और पूरी तरह स्वस्थ हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मालदा के हिमसागर की मांग अब भी बहुत मजबूत बनी हुई है.

Himsagar Mango Export Crisis: अब चुनिंदा बागानों पर टिकी उम्मीदें

इस साल मालदा से आम और लीची के रिकॉर्ड तोड़निर्यात की उम्मीद थी. इसके लिए राज्य बागवानी विभाग (State Horticulture Department) और निर्यातकों ने मिलकर किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई और कड़े निर्यात मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए लगातार ट्रेनिंग और प्रोत्साहन दिया. इस अप्रत्याशित रोग के बाद अब रणनीति बदल गयी है.

निर्यातक अब उन चुनिंदा और सुरक्षित बागानों की पहचान करने में जुटे हैं, जहां मौसम का असर नहीं पड़ा है. वहां से उच्च गुणवत्ता वाले आमों की छंटनी (Sorting) कर विदेशी बाजारों में आपूर्ति की चेन को बनाये रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस साल के कुल निर्यात लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा अब भी हासिल किया जा सके.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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