खगड़िया में बीमारियों का इलाज के दावे पर उमड़ी 5 हजार लोगों की भीड़, वायरल बाबा के शिविर पर उठे सवाल

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खगड़िया में बीमारियों का इलाज के दावे पर उमड़ी 5 हजार लोगों की भीड़, वायरल बाबा के शिविर पर उठे सवाल

वायरल बाबा के शिविर में उमड़ी हजारों की भीड़

Khagaria News खगड़िया में एक तरफ हजारों लोग इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे, दूसरी तरफ बिना जांच 34 बीमारियों के इलाज के दावों ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी. खगड़िया में लगे वायरल बाबा के शिविर में उमड़ी भीड़ अब कई सवाल खड़े कर रही है.

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खगड़िया में अमित कुमार की रिपोर्ट.

Khagaria News : खगड़िया जिले के मोरकाही थाना क्षेत्र स्थित बछौता रोड के एक विवाह भवन में रविवार को आयोजित कथित आयुर्वेदिक शिविर में हजारों मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी. सोशल मीडिया पर ‘जमुई वाले वैद्य बाबा’ के नाम से चर्चित इस शिविर में बिना चिकित्सीय जांच और रिपोर्ट के 34 प्रकार की बीमारियों के इलाज का दावा किया गया. भारी भीड़ और इलाज की प्रक्रिया को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है.

इलाज की उम्मीद में घंटों लाइन में खड़े रहे मरीज

रविवार को आयोजित शिविर में करीब पांच हजार मरीज पहुंचे. सुबह से ही लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं. दूर-दराज के इलाकों से आए लोगों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मरीजों के लिए बैठने, पेयजल और पर्याप्त पंखों जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था. भीड़ बढ़ने से आसपास के इलाके में जाम जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो गई.

बिना जांच दवा देने के दावों पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिविर में मरीजों से केवल बीमारी की जानकारी लेकर दवाएं लिखी जाती हैं. आरोप है कि कई मामलों में किसी प्रकार की चिकित्सीय जांच या रिपोर्ट नहीं देखी जाती.

बताया गया कि मरीजों को दो हजार से छह हजार रुपये तक की दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. कुछ लोगों ने दावा किया कि इलाज के नाम पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है, जबकि अपेक्षित लाभ मिलने को लेकर अलग-अलग अनुभव सामने आते हैं.

डॉक्टरों ने जताई चिंता

इस पूरे मामले पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी चिंता व्यक्त की है. भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) के अध्यक्ष डॉ. प्रेम शंकर ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों और चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर ही परखा जाना चाहिए.

उन्होंने चेतावनी दी कि बिना प्रमाणित उपचार पद्धति या लंबे समय तक बिना विशेषज्ञ सलाह के दवाओं का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है.

अनुमति और नियमों पर भी उठे सवाल

भासा के अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मरीजों को एकत्रित कर चिकित्सा शिविर संचालित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन जरूरी है.

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी और आवश्यक जांच कराई जाएगी.

इलाज की तलाश या भरोसे की कहानी?

खगड़िया में लगा यह शिविर एक बार फिर उस सवाल को सामने ला रहा है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की तलाश में लोग कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं. हजारों लोगों की मौजूदगी यह दिखाती है कि वैकल्पिक उपचार पद्धतियों पर भरोसा करने वालों की संख्या कम नहीं है. वहीं विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि किसी भी उपचार को अपनाने से पहले उसकी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विश्वसनीयता को समझना जरूरी है.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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