झारखंड गुवा गोलीकांड : तिल-तिल कर मर रहा शहीद परिवार, बहादुर उरांव को 2 बेटों को खोकर चुकानी पड़ी कीमत

Published by :Guru Swarup Mishra
Published at :08 Sep 2022 6:38 AM (IST)
विज्ञापन
झारखंड गुवा गोलीकांड : तिल-तिल कर मर रहा शहीद परिवार, बहादुर उरांव को 2 बेटों को खोकर चुकानी पड़ी कीमत

चक्रधरपुर : आठ सितंबर आते ही गुवा गोलीकांड के शहीदों के परिवार के जख्म ताजा हो जाते हैं. बीते 42 साल से शहीदों का परिवार तिल-तिल कर मर रहा है. 8 सितंबर, 1980 को गुवा गोलीकांड में 10 आदिवासियों की शहादत हुई थी. आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं में शामिल बहादुर उरांव ने अपने जुड़वां बेटों को खो दिया था.

विज्ञापन

चक्रधरपुर : आठ सितंबर आते ही गुवा गोलीकांड के शहीदों के परिवार के जख्म ताजा हो जाते हैं. बीते 42 साल से शहीदों का परिवार तिल-तिल कर मर रहा है. 8 सितंबर, 1980 को गुवा गोलीकांड में 10 आदिवासियों की शहादत हुई थी. आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं में शामिल बहादुर उरांव ने अपने जुड़वां बेटों को खो दिया था. इसकी टीस उन्हें, उनकी पत्नी लखीमुनी उरांव समेत पूरे परिवार को आजीवन रहेगी. गुवा में संघर्ष के बाद पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिये थे. इससे बचने के लिए बहादुर किसी तरह वहां से निकल गये. रेलवे में नौकरी के बावजूद बहादुर उरांव ने गुवा व अलग राज्य आंदोलनों में हिस्सा लिया.

घटना के बाद फरार बहादुर के घर की कुर्की-जब्ती हुई

गोलीकांड के बाद पुलिस बहादुर उरांव को तलाश कर रही थी. वह जंगलों में छिपते फिर रहे थे. महीनों तक फरारी की सजा काटते रहे. उनके घर के बाहर पुलिस की घेराबंदी कर दी गयी. पुलिस ने थक-हार कर चक्रधरपुर राखा आसनतलिया उरांव बस्ती स्थित बहादुर उरांव की घर की कुर्की जब्ती की. बर्तन, अनाज, बिस्तर समेत घर का हर सामान जब्त कर लिया. मकान का खपड़ा तक उतार लिया. दरवाजे-खिड़कियां ले गये. पत्नी लखीमुनी उरांव ने भोजन के लिए बर्तन और बच्चों को सुलाने के लिए बिस्तर की मांग की, लेकिन पुलिस वालों ने कुछ नहीं छोड़ा.

Also Read: UG NEET Result 2022 : झारखंड के आयुष कुमार झा को ऑल इंडिया रैंक 133, आर्यमन साहू को ऑल इंडिया रैंक 1671

इलाज के बिना जुड़वां बच्चों की हो गयी मौत

गुवा गोलीकांड के दिन लखीमुनी उरांव गर्भ से थी. जब घर की कुर्की जब्ती हुई, तो जुड़वां बेटों का जन्म हो चुका था. पुलिस द्वारा बिस्तर जब्त कर लेने से वह जुड़वां बच्चों को विवश होकर जमीन पर सुलाती थी. ठंड लगने के कारण दोनों बच्चे निमोनिया के शिकार हो गये. लखीमुनी बच्चों का इलाज नहीं करा पायी और दोनों मासूम की मौत हो गयी. बहादुर उरांव की तीन पुत्रियां सावित्री उरांव, सरिता उरांव व सीमा उरांव हैं. जुड़वां बेटों में एक का नाम बहादुर उरांव के पिता के नाम पर सखुवा उरांव व दूसरे का नाम दादी करमी उरांव के नाम पर करम उरांव रखा गया था.

जेल से छूटने पर दो साल तक पत्नी ने बात नहीं की

बाद में बहादुर उरांव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. वह जेल से रिहा हुए, तो पत्नी लखीमुनी ने 2 साल तक बेटों को खोने के कारण माफ नहीं की थी. दोनों में मतभेद रहा. अब बहादुर 82 और लखीमुनी 72 साल की हो गयी हैं, लेकिन आज भी उन्हें जुड़वां बेटों को खोने और एक भी बेटा नहीं होने की कमी खलती है.

विज्ञापन
Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola