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DBRAU के संविदा कर्मचारी ने सहायक कुल सचिव पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप, जानें पूरा मामला

Updated at : 03 Nov 2023 10:19 AM (IST)
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DBRAU के संविदा कर्मचारी ने सहायक कुल सचिव पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप, जानें पूरा मामला

डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में संविदा पर तैनात कर्मचारी ने विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव पर रेगुलर करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है. इसके लिए कर्मचारी ने राज्यपाल और विजिलेंस को पत्र लिखा है.

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डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में संविदा पर तैनात कर्मचारी ने विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव पर रेगुलर करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है. इसके लिए कर्मचारी ने राज्यपाल और विजिलेंस को पत्र लिखा है. कर्मचारी ने पत्र में लिखा है कि मेरी दोनों किडनी खराब है. हफ्ते में तीन बार डायलिसिस होती है. अगर मेरी मौत होती है तो विश्वविद्यालय के अधिकारी इसकी जिम्मेदार होंगे. ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा एक कमेटी बनाई गई है जो इस पूरे मामले की जांच करेगी.

अन्य कर्मचारियों को कर दिया गया है रेगुलर

विश्वविद्यालय में तैनात संविदा कर्मचारी रवि सक्सेना का कहना है कि 1999 में उनकी खंदारी परिषद स्थित आईआईटी में डाटा एंट्री करने के लिए 2500 रुपये प्रति महीने पर तैनाती हुई थी. 2016 में उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश के अनुसार 2001 से पहले कि संविदा कर्मचारियों को स्थायी किया जाना है. इस क्रम में विश्वविद्यालय में 7 जनवरी 2022 को 22 तृतीय श्रेणी व 21 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रेगुलर करने का आदेश जारी किया. लेकिन रवि को छोड़ उनके साथ के सभी कर्मचारियों को रेगुलर कर दिया गया. इस बारे में उन्होंने कई प्रत्यावेदन भी दिए लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई.

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कोर्ट के आदेश का भी किया अवहेलना

इसके बाद रवि ने उच्च न्यायालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई. वहां से मार्च 2023 में आदेश हुआ कि रवि के प्रत्यावेदन पर विश्वविद्यालय तीन हफ्ते में विधि अनुसार निस्तारण करेगा. लेकिन विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना कर दी. रवि ने बताया कि सहायक कुल सचिव पवन कुमार सुविधा शुल्क मांगते रहे. रवि ने दोबारा से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. जिस पर फिर से आदेश हुए कि मामले को विश्वविद्यालय एक सप्ताह में निस्तारित करे.

वही आपको बता दे विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब चार सदस्य की कमेटी बनाई है. जिसमें सेवा निवृत जज, प्रति कुलपति अजय तनेजा, प्रोफेसर यूसी शर्मा व सहायक कुल सचिव अनूप कुमार है. रवि सक्सेना ने बताया कि इस कमेटी की बैठक से पहले सहायक कुल सचिव पवन कुमार ने सुविधा शुल्क मांगा और कहा कि इस सुविधा शुल्क में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी का हिस्सा है. रवि का कहना है कि चार कर्मचारियों को सुविधा शुल्क देकर रेगुलर कर दिया है. यही नहीं यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल में 2000 में सुरक्षा कर्मी के रूप में नियुक्ति की गई. एक कर्मचारी को स्थाई कर्मचारियों के रूप में नियुक्त कर दिया है.

पीड़ित रवि सक्सेना का कहना है कि उसकी कहीं भी सुनवाई नहीं हुई तो उसने अब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और विजिलेंस को शिकायती पत्र भेजा है. और उसमें साफ तौर पर लिख दिया है कि अगर मेरे साथ कुछ भी होता है तो विश्वविद्यालय के चार से पांच अधिकारी इसके जिम्मेदार होंगे. जिसमें रवि ने कमेटी के सदस्यों के साथ कुलपति को भी जिम्मेदार ठहराया है.

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