Bermo Vidhan Sabha Result 2024: बेरमो से जयराम महतो हारे, अनूप सिंह को मिली जीत
Bermo Chunav Result 2024: बेरमो विधानसभा गिरडीह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है. बेरमो विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. अब कभी भाजपा जीतती है, तो कभी कांग्रेस. बारी-बारी से दोनों दलों के उम्मीदवार यहां जीतते रहे हैं.
Bermo Assembly Election Result 2024: झारखंड बेरमो विधानसभा सीट से कांग्रेस के कुमार जयमंगल (अनूप सिंह) ने जेएलकेएम के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो को पराजित कर दिया. इस चुनाव में कुमार जयमंगल ने जयराम महतो को 29375 मतों से पराजित किया. कुमार जयमंगल को कुल 90246 वोट मिले, जबकि जयराम महतो को 60871 वोटों से ही संतोष करना पड़ा. इस सीट से तीसरे स्थान पर भाजपा के रवींद्र कुमार पांडेय रहे. उन्हें कुल 58352वोट मिले.
बेरमो विधानसभा गिरडीह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है. यह झारखंड की 81 विधानसभा सीटों में एक है. वर्ष 1957 में यह निर्वाचन क्षेत्र अस्तित्व में आया. तब यह इलाका बिहार का हिस्सा हुआ करता था. 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग करके झारखंड राज्य का गठन किया गया. इसके बाद यह विधानसभा सीट झारखंड के हिस्से में आ गई. बेरमो विधानसभा सीट पर झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में कुल 3,27,601 (3 लाख 27 हजार 601) मतदाता हैं.
बेरमो विधानसभा सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. अब कभी भाजपा जीतती है, तो कभी कांग्रेस. बारी-बारी से दोनों दलों के उम्मीदवार यहां जीतते रहे हैं.
झारखंड राज्य के गठन के बाद पहली बार वर्ष 2005 में राज्य विधानसभा के चुनाव हुए, तो यहां से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के योगेश्वर महतो ने जीत हासिल की. वर्ष 2009 के चुनाव में यहां से ट्रेड यूनियन के बड़े नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह कांग्रेस के टिकट पर जीतकर विधायक बने. वर्ष 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में फिर से भाजपा के योगेश्वर महतो विधायक चुने गए, तो वर्ष 2019 में कांग्रेस के राजेंद्र प्रसाद सिंह ने अपनी हार का बदला ले लिया.
2024 के चुनाव में भाग ले रहे प्रमुख प्रतिभागी
| 1 | Kumar Jaimangal (Anup Singh) | कुमार जयमंगल सिंह (अनूप सिंह) | Indian National Congress |
| 2 | Jagdish Kewat | Bahujan Samaj Party | |
| 3 | Ravindra Kumar Pandey | रवींद्र कुमार पांडेय | Bharatiya Janata Party |
| 4 | Jairam Kumar Mahato | जयराम कुमार महतो | Jharkhand Loktantrik Krantikari Morcha |
| 5 | Manzoor Alam | Aazad Samaj Party (Kanshi Ram) | |
| 6 | Mohan lal Saw | Lokhit Adhikar Party | |
| 7 | Uma Shankar Shastri (Ranjeet) | Independent | |
| 8 | Ghanshyam Mishra | Independent | |
| 9 | Tirth Nath Akash | Independent | |
| 10 | Mantosh Soren | Independent | |
| 11 | Mohammad Belal Hasmi | Independent | |
| 12 | Ruplal Thakur | Independent | |
| 13 | Lalit Narayan | Independent | |
| 14 | Santosh Kumar Mahto | Independent |
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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