WATCH: आंखों की देखभाल या सोशल मीडिया स्टंट? डॉक्टर बोले- Urine Eye Wash का यह ट्रेंड खतरनाक

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 26 Jun 2025 4:39 PM

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Urine Eye Wash: प्राकृतिक उपचार या गंभीर खतरा?

Viral Urine Eye Wash Trend: वायरल वीडियो में पुणे की महिला ने आंखों में पेशाब डालने का दावा किया. डॉक्टरों ने इसे खतरनाक और अवैज्ञानिक बताया है. जानिए विशेषज्ञों की राय और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम.

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WATCH Urine Eye Wash Viral Trend: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पुणे की एक महिला खुद को ‘होलिस्टिक हेल्थ कोच’ बताते हुए अपनी आंखों में सुबह की यूरीन डालती नजर आ रही है. इस ‘प्राकृतिकइलाज’ के दावे ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है, वहीं डॉक्टरों ने इसे ‘खतरनाक और गैर-वैज्ञानिक’ बताया है.

पुणे की नुपुर पिट्टी नामक महिला ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें वह ‘यूरीन आई वॉश’ को प्राकृतिक चिकित्सा बताते हुए अपनी आंखों में पेशाब डालती हैं. उनका दावा है कि इससे आंखों की जलन, सूखापन और लालिमा में राहत मिलती है.

‘डरावना और अवैज्ञानिक’ ट्रेंड

हालांकि, यह वीडियो वायरल होते ही चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. प्रसिद्ध हेपेटोलॉजिस्ट डॉ सायरियक एबी फिलिप्स (TheLiverDoc) ने इस ट्रेंड को ‘डरावना और अवैज्ञानिक’ बताया. उन्होंने कहा, “पेशाब स्टरल नहीं होता, इसे आंखों में डालना संक्रमण और दृष्टि हानि का कारण बन सकता है.”

https://twitter.com/theliverdr/status/1937803909839651077
Urine Eye Wash Viral Trend / X

डॉ जैसन फिलिप, यूरोलॉजिस्ट, ने भी चेतावनी दी कि पेशाब का pH अम्लीय होता है जबकि आंखों के लिए सुरक्षित घोल क्षारीय होता है. उन्होंने कहा, “ऐसे घरेलू नुस्खों से दूर रहें और आंखों की देखभाल के लिए प्रमाणित उपाय ही अपनाएं.”

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई यूजर्स ने इसे ‘गंभीर गलत जानकारी फैलाने वाला’ बताया और इंस्टाग्राम से ऐसे कंटेंट को हटाने की मांग की.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखाए जा रहे ऐसे ‘प्राकृतिकइलाज’ को आंख मूंदकर न अपनाएं और किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए प्रमाणित डॉक्टर से सलाह लें.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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