आधा भारत नहीं जानता उड़ान से पहले हवाई जहाज के इंजन को दी जाती है जिंदा मुर्गे की कुर्बानी! चौंका देगा यह वैज्ञानिक रहस्य
Published by : Shivani Shah Updated At : 26 Jun 2025 6:30 PM
Flight Fantastic facts
Flight Fantastic Facts: आपने हवाई जहाज से सफर तो किया ही होगा. लेकिन आप इससे जुड़ी एक अनोखी बात नहीं जानते हैं कि उड़ान भरने से पहले हवाई जहाज के इंजन में जिंदा मुर्गे झोंक दिए जाते हैं. यानी कि जिंदा मुर्गे डाल कर इंजन की टेस्टिंग की जाती है. किसी भी हवाई जहाज के सामने सबसे बड़ा खतरा बर्ड स्ट्राइक का होता है. ऐसे में इंजन के अंदर जिंदा मुर्गे को डालने के पीछे कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक कारण है. जानिए इस अजीबो-गरीब फैक्ट्स के बारे में.
Flight Fantastic Facts: आपने कभी न कभी तो हवाई जहाज से आना-जाना तो किया ही होगा. आज के समय में हर दूसरा आदमी समय की बचत के लिए हवाई जहाज से यात्रा कर रहा है. लेकिन क्या आप हवाई जहाज से जुड़ी एक अजीबो-गरीब बात जानते हैं कि हवाई जहाज के टर्बाइन इंजन में जिंदा मुर्गों को डाला जाता है? जी हां, जिंदा मुर्गे. ये बात सुनकर आपको थोड़ा अजीब जरूर लगेगा और आपके दिमाग में कई सारे सवाल भी उठ रहे होंगे. लेकिन ये बात जितनी अजीब है उतनी हैरान कर देने वाली इसकी सच्चाई भी. इस सवाल का जवाब साइंटिफिक और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. ऐसे में आपके दिमाग में ये सवाल भी जरूर उठता होगा कि आखिर जिंदा मुर्गे ही क्यों मरे हुए क्यों नहीं? तो चलिए फिर आपके दिमाग के सवालों को शांत करते हैं और आपको आज हम इस अजीबो-गरीब प्रोसेस के बारे में बताते हैं.
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क्यों किया जाता है Bird Strike Test?
दरअसल, जब कोई हवाई जहाज हवा में उड़ान भरता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा खतरा बर्ड स्ट्राइक होने यानी कि किसी पक्षी के टकराने का होता है. अगर उड़ान के दौरान कोई पक्षी हवाई जहाज के टर्बाइन इंजन में घुस जाए, तो इससे फ्लाइट का इंजन खराब यानी कि फेल हो सकता है. जिससे जान का खतरा बन जाता है. इसलिए लॉन्च करने से पहले किसी भी एयरक्राफ्ट के इंजन का Bird Strike Test किया जाता है. इस बर्ड स्ट्राइक टेस्ट में इंजन में स्पीड से पक्षी को डाला जाता है. जिससे यह पता किया जा सके कि इंजन पर पक्षी के टकराने से क्या असर पड़ता है. इस तरह के टेस्टिंग से यह सुनिश्चित किया जाता है कि इंजन इस तरह की कंडीशन में सुरक्षित तरीके से काम कर पाएगा या नहीं.
टेस्ट में जिंदा मुर्गा ही क्यों?
अब सवाल उठता है कि आखिर इस बर्ड स्ट्राइक टेस्ट के लिए जिंदा मुर्गे का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है, मरे मुर्गे का क्यों नहीं? दरअसल, मरे हुए पक्षी के शरीर में किसी तरह का मूवमेंट नहीं होता है, वह स्थिर रहता है. ऐसे में अगर उसे इंजन में डाला जाए तो वह किसी तरह का प्रतिक्रिया नहीं देगा. जिससे इंजन पर किसी तरह का दबाव नहीं पड़ेगा. जबकि जिंदा मुर्गे को अगर इंजन में डाला जाए तो वह तुरंत प्रतिक्रिया देगा. वह बचने के लिए फड़फड़ाएगा और बचने की कोशिश करेगा. जिससे असल में इंजन पर दबाव पड़ेगा. ऐसे में जिंदा पक्षी को टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल कर साइंटिस्ट यही समझ पाते हैं कि हवाई जहाज का इंजन बर्ड स्ट्राइक की कंडीशन में कितना सहन कर पाएगा और आपात स्थिति में यात्रियों की जान कैसे बचाई जा सकती है.
कौन करता है यह टेस्ट?
आमतौर पर इस तरह के टेस्ट बड़े जेट इंजन निर्माता (Rolls-Royce, GE Aviation, Safran) जैसी कंपनियां करती हैं. इस तरह की टेस्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय एविएशन रेगुलेटरी बॉडीज (International Aviation Regulatory Bodies) की गाइडलाइंस को फॉलो किया जाता है. बर्ड स्ट्राइक टेस्टिंग में आमतौर पर जिंदा मुर्गे या बत्तख जैसी पक्षियों का इस्टेमल किया जाता है. इस तरह के टेस्ट से यही पता किया जाता है कि इंजन किसी तरह के बर्ड हिट को झेल सकता है या नहीं.
हालांकि, इस तरह की प्रक्रिया विवादास्पद हो सकती है. लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह प्रक्रिया जरूरी भी है. क्योंकि, हजारों यात्रियों की जान इस प्रोसेस पर निर्भर करती है. इस टेस्टिंग से इंजन की खामी का पता चल जाता है. वहीं, अगर इंजन में खामी मिलती है तो उसे बेहतर बनाने के लिए फिर से काम किया जाता है.
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शिवानी कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर टेक-ऑटो कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में वह 3 सालों से सक्रिय हैं. वह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं. वह आसान भाषा और साफ तरीके से खबर लिखती हैं. टेक कैटेगरी में वह स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स पर खबर लिखती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी शिवानी नई कार-बाइक लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटो अपडेट्स, कार और बाइक से जुड़े टिप्स व नई तकनीक पर खबरें लिखती हैं. वह टेक और ऑटो की खबरों को आसान तरीके से पेश करती हैं, ताकि हर रीडर उसे आसानी से समझ सके. उनकी लेखन शैली आसान, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है. शिवानी ने करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे कंटेन्ट राइटिंग की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिवानी ने Lagatar.Com और The News Post जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है. यहां उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य न्यूज बीट पर कंटेंट तैयार किया. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में उनकी खास रुचि है और वह लगातार नए विषयों पर बेहतर और भरोसेमंद कंटेंट तैयार कर रही हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शिवानी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि रीडर्स तक सही, काम की खबरें और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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