Jio, Airtel, Vi क्यों कर रहे लाखों कीपैड-फोन यूजर्स के साथ धोखा?

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 23 Nov 2025 2:38 PM

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टेलीकॉम कंपनियां कर रही हैं लाखों यूजर्स के साथ ठगी!

भारत में करोड़ों कीपैड-फोन यूजर्स को स्मार्टफोन-डेटा जैसा प्लान थोपना, टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल उठा रहा है. जानिए पूरा मामला और क्या हो सकता है इसका समाधान

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभी भी लगभग 200 से 350 मिलियन कीपैड-फोन (Keypad Phone Users) या फीचर-फोन यूजर्स (Feature Phones India) मौजूद हैं, जो डेटा-एनेबल्ड स्मार्टफोन तक नहीं पहुंच पाए हैं. लेकिन इन भारी संख्या में यूजर्स के साथ तीन बड़ी टेलीकॉम कंपनियां- Jio, Airtel और Vi ऐसा व्यवहार कर रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि कहीं ये कंपनियां उन लोगों के साथ ठगी तो नहीं कर रहीं? आइए देखें कैसे:

डेटा-प्लान्स की कमी

कीपैड/2G फोन यूजर्स के पास स्मार्टफोन-एबल्ड डेटा यूजेज नहीं है. और रिपोर्ट बताती है कि 2G यूजर्स द्वारा डेटा का इस्तेमाल न के बराबर है. लेकिन कंपनियां उन्हें ऐसे रिचार्ज पैक या प्लान थोप रही हैं, जिसमें डेटा को मुख्य हिस्सा बनाया गया है, जबकि यूजर्स उस डेटा का फायदा उठा ही नहीं सकते. इस तरह यूजर्स बेवजह डेटा पैक लेने के लिए बाध्य हैं, जिसकी उन्हें जरूरत ही नहीं.

डिवाइस (फोन) बदलने का दबाव

टेलीकॉम कंपनियां समय-समय पर कहती हैं- आप स्मार्टफोन ले जाइए, 5G/4G पर अपग्रेड हो जाइए. लेकिन इसमें फोन खरीदने के खर्च से लेकर उसे मेनटेन करने और हर महीने रिचार्ज का खर्च बढ़ता ही जाता है. हर यूजर की कुछ आर्थिक सीमाएं होती हैं, ऐसे में साधारण यूजर पर अनावश्यक बोझ पड़ता जा रहा है.

यूजर की जरूरत का प्लान नहीं!

भारत में ज्यादातर कीपैड फोन आज भी 2G पर चलते हैं. लेकिन टेलीकॉम कंपनियां उन्हें ऐसे रिचार्ज प्लान देती हैं जिनमें डेटा ही डेटा भरा होता है. अब जब फोन ही डेटा ठीक से चला नहीं पाता, तो यूजर्स सोचते हैं कि पैसे तो दिये, पर फायदा क्या मिला? यानी एक तरफ पुराना कीपैड फोन और दूसरी तरफ डेटावाला प्लान. यानी सर्विस मिल भी रही है, पर यूज नहीं कर पा रहे. दरअसल, ये प्लान उनकी जरूरत के हिसाब से बने ही नहीं हैं.

बढ़ रहा डिजिटल डिवाइड

इस पूरे मामले से यह साफ दिखता है कि कंपनियों ने अपनी मार्केटिंग और रिचार्ज प्लान तैयार करने में कीपैड-फोन यूजर्स को भी स्मार्टफोन-डेटा यूजर मान लिया है, जबकि असलियत यह है कि वे उस स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में यूजर्स को ऐसा महसूस होता है कि वे सेवा ले तो रहे हैं, मगर उसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे. यह डिजिटल डिवाइड को और गहरा कर रहा है, जहां स्मार्टफोन वाले डेटा-सुविधा ले रहे हैं, वहीं कीपैड वाले फोन तो है, लेकिन डेटा यूज नहीं कर सकने वाली स्थिति में फंसे हैं.

टेलीकॉम कंपनियाें को क्या करना चाहिए?

कंपनियों को कीपैड-फोन यूजर्स के लिए ऑप्शनल प्लान ऑफर करना चाहिए. जिसमें वॉइस कॉलिंग और लिमिटेड डेटा के बेनिफिट्स यूजर की डिवाइस की क्षमता के अनुसार. टेलीकॉम कंपनियों को अपने यूजर्स को इस बात को लेकर भी जागरूक करना चाहिए कि कौन-से प्लान उनके फोन के लिए सही हैं. जैसे अगर फोन 2G वाला है, तो बहुत डेटा वाला प्लान लेना बेकार हो सकता है. नियामक TRAI को भी इस असंगति की समीक्षा करनी चाहिए कि क्या कंपनियों ने जो प्लान लाये हैं, वे यूजर फ्रेंडली हैं या नहीं.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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