जानिए क्या है एम-लर्निंग, ये है इसके चार बड़े फायदे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Sep 2017 11:26 AM
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स्मार्टफोन डिवाइस 21वीं सदी के सबसे बड़े तकनीकी बदलाव की प्रतीक है. मोबाइल एप अाधारित ऑनलाइन लर्निंग ने जिस बदलाव की शुरुआत की है, उसका बेहतर इस्तेमाल फायदा न केवल व्यक्तिगत स्तर हो रहा है, बल्कि तमाम संस्थान, बिजनेस और शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं इससे अपने तौर-तरीकों को बेहद प्रभावी ढंग बदल रही हैं. मोबाइल […]
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स्मार्टफोन डिवाइस 21वीं सदी के सबसे बड़े तकनीकी बदलाव की प्रतीक है. मोबाइल एप अाधारित ऑनलाइन लर्निंग ने जिस बदलाव की शुरुआत की है, उसका बेहतर इस्तेमाल फायदा न केवल व्यक्तिगत स्तर हो रहा है, बल्कि तमाम संस्थान, बिजनेस और शिक्षा से जुड़ी संस्थाएं इससे अपने तौर-तरीकों को बेहद प्रभावी ढंग बदल रही हैं. मोबाइल टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत है कि यह अन्य तकनीकों के मुकाबले कहीं ज्यादा यूजर फ्रैंडली है. कॉरपोरेट लर्निंग में मोबाइल एप की अहमियत कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है.
रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका स्मार्टफोन आज के प्रतिस्पर्धी दुनिया में स्किल डेवलपमेंट का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है. मोबाइल उपभोक्ताओं और मोबाइल एप की बढ़ती संख्या उन कंपनियों के लिए ढेरों मौके ला रही हैं, जो इ-लर्निंग की दिशा में उपभोक्ताओं के बर्तावों को परखने की लगातार मशक्कत कर रही हैं. आज औपचारिक प्रशिक्षण से लेकर रोजाना की जानकारी के लिए मोबाइल एप सबसे बेहतर और सबसे विश्वसनीय माध्यम बन चुके हैं.
अधिक सुविधाजनक
मोबाइल एप आधारित इ-लर्निंग उपभोक्ताओं को पहले से कहीं अधिक जोड़ने में सफल रही है. एम-लर्निंग अन्य प्रारूपों के मुकाबले अधिक सुविधाजनक है. इससे माना जा रहा है कि आनेवाले वक्त में एम-लर्निंग से जुड़नेवालों की संख्या तेज रफ्तार से बढ़ेगी. ज्यादा अनुकूल और सुविधाजनक होने के नाते एम-लर्निंग आकर्षक हैं, लेकिन इ-लर्निंग के भी अपने फायदे हैं.
जटिलताएं कम
मोबाइल लर्नर एप के माध्यम से कभी भी कहीं भी कंटेंट एक्सेस कर सकता है. ऐसे में एप डेवलपर इस बात पर विशेष रूप से ध्यान रखता है कि कंटेंट की जटिलताओं को कम-से-कम या न के बराबर रखा जाये. जबकि इ-लर्निंग का प्रारूप व्यापक होता है, जहां लर्नर अपनी आवश्यकता के मुताबिक कंटेंट के हर पहलू पर गौर करता है.
लचीलापन अधिक
डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इ-लर्निंग के कई फायदे हैं. मोबाइल स्क्रीन का आकार कम होने के कारण कंटेंट ज्यादा-से-ज्यादा आसान प्रारूप में रखा जाता है, जिससे लर्नर जटिलताओं में न उलझें. यही वजह है कि डिजाइनर को बिट-साइज कंसेप्ट पर विशेष फोकस करना होता है.
समय की पाबंदी नहीं
इ-लर्निंग के लिए जहां समय की पर्याप्त उपलब्धता के साथ-साथ कई डिवाइस को तैयार रखना होता है, वहीं जरूरत पड़ने पर एम-लर्निंग का कुछ मिनटों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
यही वजह है कि इ-लर्निंग के मुकाबले एम-लर्निंग तेज और आसान है. एक लर्नर इंस्टेंट एक्सेस के द्वारा इस तकनीक का हर समय किसी स्थिति में इस्तेमाल कर सकता है. जटिलताओं को कम कर एप और कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए रैपिड मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपमेंट टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.
– ब्रह्मानंद िमश्र
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