Lok Sabha Election 2024 : जलपाईगुड़ी में अपनी खोयी सीट को वापस पाने की तैयारी में तृणमूल, भाजपा की कोशिश फिर से जीत की

Published by :Shinki Singh
Published at :28 Mar 2024 5:24 PM (IST)
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Lok Sabha Election 2024 : जलपाईगुड़ी में अपनी खोयी सीट को वापस पाने की तैयारी में तृणमूल, भाजपा की कोशिश फिर से जीत की

Lok Sabha Election 2024 : जलपाईगुड़ी संसदीय क्षेत्र में भाजपा की पैठ पूर्व में नहीं थी. लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां भाजपा का उत्थान 2009 से होना शुरू हुआ. 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार द्विपेंद्रनाथ प्रमाणिक तीसरे स्थान पर थे लेकिन उन्हें 94 हजार से अधिक वोट मिले थे.

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Lok Sabha Election 2024 : जलपाईगुड़ी संसदीय क्षेत्र कभी वाममोर्चा के किले के तौर पर जाना जाता था. वर्तमान में यहां से भाजपा के सांसद हैं. हालांकि बीच में एक बार यह तृणमूल के कब्जे में भी आया. लोकसभा चुनाव की बात करें तो 1962 से 1971 तक यह सीट कांग्रेस के खाते में रही. 1977 में यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खगेंद्र नाथ दासगुप्ता जीते थे. लेकिन इसके बाद से इस क्षेत्र में माकपा का आधिपत्य रहा. 1980 से लेकर 2014 तक यहां से माकपा के ही सांसद रहे. 1980 में माकपा उम्मीदवार सुबोध सेन ने यहां से जीत हासिल की. फिर 1984 और 1989 में माणिक सान्याल. 1991 और 1996 में जीतेंद्र नाथ दास माकपा के टिकट पर जीते. 1998, 1999 और 2004 में मिनती सेन को विजय मिली. यहां से आखिरी माकपा सांसद महेंद्र कुमार रॉय रहे. 2009 में उन्हें यहां से विजय मिली थी.

लोकसभा चुनाव यहां 19 अप्रैल को

लेकिन राज्य में 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल उम्मीदवार विजय चंद्र बर्मन को यहां से 2014 के लोकसभा चुनान में जीत मिली. 2014 में श्री बर्मन को 4.94 लाख वोट मिले और 38 फीसदी मतों के साथ उन्होंने माकपा के महेंद्र कुमार रॉय को दूसरे स्थान पर धकेल दिया. महेंद्र कुमार राय को 4.25 लाख वोट मिले थे. लेकिन 2019 में पासा पलट गया. भाजपा के उम्मीदवार जयंत कुमार रॉय 7.60 लाख वोटों के साथ पहले स्थान पर रहे. उन्हें 50.65 फीसदी वोट मिले. 5.76 लाख वोट पाकर तृणमूल के विजय चंद्र बर्मन दूसरे स्थान पर रहे. इस बार का लोकसभा चुनाव यहां 19 अप्रैल को होगा. तृणमूल कांग्रेस ने निर्मल चंद्र राय को टिकट दिया है. जबकि माकपा ने देवराज बर्मन को अपना उम्मीदवार बनाया है.

लगातार बढ़ा है यहां भाजपा का ग्राफ

जलपाईगुड़ी संसदीय क्षेत्र में भाजपा की पैठ पूर्व में नहीं थी. लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां भाजपा का उत्थान 2009 से होना शुरू हुआ. 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार द्विपेंद्रनाथ प्रमाणिक तीसरे स्थान पर थे लेकिन उन्हें 94 हजार से अधिक वोट मिले थे. उन्होंने कुल वोटों का 9.15 फीसदी हासिल किया था. 2014 में भाजपा ने अपनी स्थिति और भी मजबूत कर ली. भाजपा उम्मीदवार सत्यलाल सरकार भले तीसरे स्थान पर रहे लेकिन उन्हें 2.21 लाख वोट मिले. इस बार भाजपा के खाते में कुल वोटों का 17.02 फीसदी हिस्सा आ गया. यानी 2009 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 7.87 फीसदी वोटों की बढ़त. इसके बाद 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार जयंत कुमार राय ने 7.60 लाख वोटों के साथ 50.65 फीसदी वोट हासिल किये और जीत हासिल की. तृणमूल के विजय चंद्र बर्मन दूसरे स्थान पर खिसक गये.

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जैतून से जुड़ा है जलपाईगुड़ी का इतिहास


जलपाईगुड़ी. जलपाईगुड़ी शब्द ‘जलपाइ’ और ‘गुड़ी’ से आया है. ‘जलपाइ’ का मतलब जैतून होता है. इस क्षेत्र में कभी जैतून बहुतायात में पाया जाता था. ‘गुड़ी’ का अर्थ क्षेत्र है. जलपाईगुड़ी, ‘जलपेश’ शब्द के साथ भी जुड़ा है जो शिव का एक रूप है. हालांकि मूल रूप से यह शब्द ‘जे-ले-पे-गु-ड़ी’ से भी आता है जो कि भूटानी शब्द है. यह एक ऐसा स्थान दर्शाता है जहां गर्म कपड़े, कंबल और अन्य जरूरी वस्तुओं का कारोबार होता है. हिमालय की तलहटी में बसे इस क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय सीमा भूटान और बांग्लादेश से भी लगती हैं. इसके अलावा दार्जिलिंग और असम से भी इसकी सीमाएं मिलती हैं. यह समूचे उत्तर पूर्वी राज्यों और भूटान का प्रवेश द्वार भी है. अपने प्राकृतिक सौंदर्य, वन, पहाड़, चाय बागान आदि की वजह से पर्यटन के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है.

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सत्ताधारी दल पर चुनावी नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगा रहे हैं विपक्षी दल

लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. सभी राजनीतिक दलों का चुनावी प्रचार भी जोर-शोर से शुरू हो चुका है. इस बीच जलपाईगुड़ी में चुनावी आचरण विधि को न मानने का आरोप राज्य की विपक्षी पार्टियों ने लगाया है. चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद सत्ताधारी दल के विभिन्न पोस्टर व बैनर शहर भर में लगे हैं. चुनाव आयोग के कर्मी के तौर पर काम करने वाले अधिकांश ही तृणमूल कार्यकर्ता बताये जा रहे हैं. विपक्षी दलों के पोस्टर बैनरों को खोले जाने पर भी सत्ताधारी दल के पोस्टर व बैनर को स्पर्श नहीं करने का आरोप लग रहा है. आरोप है कि बानारहाट, गायेरकाटा में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर सहित सत्ताधारी दल का विशाल होर्डिंग लगा हुआ है. गौरतलब है कि चुनाव आयोग का निर्देश है कि चुनाव की घोषणा होते ही देश के किसी सरकारी या निजी स्थान का इस्तेमाल राजनीतिक दल नहीं कर सकते.

चुनावी आचरण विधि को न मानने का आरोप

वहां अपना बैनर्स, पोस्टर, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की तस्वीर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. यहां तक कि सरकार आम लोगों के लिए क्या काम कर रही है वह भी नहीं दर्शाया जा सकता. चुनाव की घोषणा के बाद अगर कहीं पोस्टर या बैनर लगा है तो उसे चुनाव आयोग की ओर से काम कर रहे जिम्मेदार अधिकारियों को खोल देना होगा. गायेरकाटा में माकपा या भाजपा या फिर किसी भी अन्य दल का बैनर न रहने पर भी राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब विभिन्न बाजारों में तृणमूल के विशाल बैनर लगे हैं. विपक्ष का आरोप है कि वर्ष भर राज्य सरकार की ओर से काम करने वाले कर्मचारी ही आज चुनाव की ड्यूटी कर रहे हैं. इसलिए वह अन्य पार्टियों के बैनर खोलने में विलंब न करने पर भी राज्य सरकार के बैनर को स्पर्श नहीं कर रहे. आरोप यह भी है कि उन कर्मचारियों पर दबाव डाला जा रहा है कि तृणमूल का कोई बैनर या पोस्टर न खोला जाये.

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चुनाव के पहले पोस्टर वार

लोकसभा चुनाव के पहले ही जलपाईगुड़ी संसदीय क्षेत्र में माहौल गर्म हो गया है. भाजपा सांसद के खिलाफ पोस्टर वार भी देखा जा रहा है. जलपाईगुड़ी शहर में भाजपा सांसद के खिलाफ पोस्टर देखे गये. उन्हें लापता बताते हुए समूचे शहर में पोस्टर लगाये गये हैं. तृणमूल की ओर से बार-बार आरोप लगाया जाता है कि सांसद को जलपाईगुड़ी में नहीं देखा जाता. दो दिन पहले जयंत कुमार राय की तस्वीर लगाकर उनके लापता होने की पोस्ट पहले सोशल मीडिया में देखी गयी. अब उनकी तस्वीर के साथ पोस्टर शहर भर में लगाये गये हैं. भाजपा का आरोप है कि पोस्टर लगाने के पीछे तृणमूल का हाथ है. हालांकि तृणमूल ने आरोपों को खारिज किया है.

बंगाल में आम है चुनाव के दौरान हिंसा

बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा, प्रत्याशियों को नामांकन से रोकना, प्रचार में बाधा डालने जैसी घटनाएं आम बात हैं. विधानसभा एवं पंचायत चुनाव में इसकी झलक देखने को मिली थी. अब सामने लोकसभा चुनाव है. बंगाल अपने राजनीतिक रंग में आने लगा है. इस सीट से तृणमूल ने धुपगुड़ी विधायक निर्मल चंद्र रॉय को मैदान में उतारा है, जबकि माकपा ने नये चेहरे देवराज बर्मन को टिकट दिया है. हाल ही में दोनों पार्टियों के उम्मीदवार रंगारंग जुलूस के साथ नामांकन दाखिल करने जिलाधिकारी के कार्यालय पहुंचे. माकपा पार्थी देवराज बर्मन जब नामांकन पत्र जमा करने पहुंचे, तो हंगामा शुरू हो गया. देवराज को तो जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में जाने की इजाजत मिल गयी, लेकिन पुलिस ने अन्य माकपा कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों को बाहर ही रोक दिया. इससे नाराज जलपाईगुड़ी जिला माकपा के युवा नेता शुभमय घोष ने कहा कि तृणमूल पुलिस को सामने रखकर वोट करा रही है. वहीं, जलपाईगुड़ी जिला तृणमूल के सचिव विकास मालाकार ने कहा कि हमने सभी नियमों का पालन करते हुए नामांकन किया है. यह पता नहीं है कि उनके (माकपा) पास अनुमति थी या नहीं.

शुरू हो गयी प्रत्याशियों को अटकाने-धमकाने की राजनीति

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा के जयंत कुमार राय ने जीत हासिल की थी. लेकिन भाजपा ने अब तक इस सीट के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. इसे लेकर तृणमूल, भाजपा पर कटाक्ष कर रही है. जलपाईगुड़ी जिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष महुआ गोप ने कहा कि भाजपा का कहना है कि यह लड़ाई मोदी और ममता के बीच है, तो मोदी का उम्मीदवार कहां है? इस पर पलटवार करते हुए जलपाईगुड़ी जिला भाजपा के सचिव श्याम प्रसाद ने कहा कि आपको (तृणमल को) भाजपा की चिंता करने की जरूरत नहीं है. आप अपनी चिंता करें. आप जनता के बीच जायेंगे, तो जनता आपको बांध के रख लेगी.

वामो का वोट बढ़ने से भाजपा की बढ़ी चिंता

पिछले पंचायत चुनाव में वाममोर्चा का वोट बढ़ने से जलपाईगुड़ी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा की चिंता बढ़ गयी है. गत लोकसभा चुनाव में वाममोर्चा को मिलने वाला वोट का बड़ा हिस्सा भाजपा को मिला था. गत लोकसभा चुनाव में वाममोर्चा को महज सात फीसदी वोट मिले थे. लेकिन पंचायत चुनाव में वाममोर्चा का वोट शेयर बढ़कर 23.9 फीसदी हो गया. हालांकि भाजपा के जिलाध्यक्ष बापी गोस्वामी के मुताबिक वामो का वोट शेयर बढ़ने से अधिक चिंता की बात नहीं है. धूपगुड़ी के उपचुनाव में भाजपा को 41 फीसदी वोट मिला था. जबकि वाममोर्चा को महज आठ फीसदी वोट मिला था. इधर पंचायत चुनाव में वोट शेयर बढ़ने से वाममोर्चा काफी उत्साहित है. माकपा के जिला सचिव सलिल आचार्य ने कहा कि लोगों ने अपने अनुभव से देखा है कि तृणमूल और भाजपा दोनों ही आम लोगों के हितों की चिंता नहीं करती. लोगों ने फिर से वामो का समर्थन किया है. इसलिए गत लोकसभा चुनाव की तुलना में पंचायत चुनाव में वामो का वोट शेयर 16 फीसदी बढ़ा है. इस लोकसभा क्षेत्र से वामो उम्मीदवार के जीतने की उन्होंने आशा जतायी. इधर फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता गोविंद राय का कहना है कि लोकसभा चुनाव के प्रचार में वाममोर्चा उम्मीदवार के समर्थन में लोगों को हुजूम उमुड़ रहा है. लोकसभा चुनाव में वामो उम्मीदवार के जीतने की उन्हें पूरी उम्मीद है.

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जलपाईगुड़ी के 07 विस क्षेत्र

  • मेखलीगंज परेशचंद्र अधिकारी तृणमूल
  • धूमगुड़ी डॉ निर्मल चंद्र रॉय तृणमूल
  • मयनागुड़ी कौशिक रॉय भाजपा
  • जलपाईगुड़ी प्रदीप कुमार वर्मा तृणमूल
  • राजगंज खगेश्वर रॉय तृणमूल
  • देवग्राम-फूलबाड़ी शिखा चटर्जी भाजपा
  • माल बुलूचिक बारिकौ तृणमूल

मतदाताओं के आंकड़े

  • कुल मतदाता 1731834
  • पुरुष मतदाता 885453
  • महिला मतदाता 846363
  • थर्ड जेंडर 000018
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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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