झारखंड ट्रेजरी घोटाला: वित्त विभाग ने बढ़ाया जांच का दायरा, रांची-रामगढ़ के कर्मी रडार पर

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झारखंड ट्रेजरी घोटाला में जांच का दायरा बढ़ा, Pic Credit- AI Only For Symbolism

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Jharkhand Treasury Scam: झारखंड सरकार ने कोषागारों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी मामले में रांची, रामगढ़ और चाईबासा को शामिल कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है. उत्पाद सचिव अमिताभ कौशल के नेतृत्व वाली समिति सॉफ्टवेयर की कमियों और अफसरों की भूमिका की जांच करेगी.

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रांची से विवेक चंद्र की रिपोर्ट

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Jharkhand Treasury Scam, रांची: झारखंड में कोषागारों (Treasuries) के माध्यम से वेतन और अन्य मदों में हुई करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामलों में राज्य सरकार ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है. वित्त विभाग ने अब रांची, रामगढ़ और पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिलों में सामने आए महाघोटाले के मामलों की जांच भी उच्च स्तरीय समिति को सौंप दी है. 17 अप्रैल 2024 को गठित आठ सदस्यीय इस हाई-लेवल कमिटी का नेतृत्व उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल कर रहे हैं. वित्त विभाग ने समिति को प्रशासनिक और तकनीकी (Software) दोनों स्तरों पर गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है.

रांची, रामगढ़ और चाईबासा भी जांच के दायरे में

गौरतलब है कि इस उच्च स्तरीय समिति को सबसे पहले बोकारो, हजारीबाग और देवघर जिलों के कोषागारों में हुई वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी. अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए इसमें तीन और बड़े जिलों- रांची, रामगढ़ और पश्चिमी सिंहभूम को भी आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है. वित्त विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आदेश के मुताबिक, प्रधान महालेखाकार (AG) और संबंधित जिलों के उपायुक्तों (DC) की प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों की अवैध निकासी की पुष्टि हो चुकी है.

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पशुपालन कार्यालयों में वेतन के नाम पर हुई लूट

जांच रिपोर्ट के अनुसार, रांची के कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन और रामगढ़ जिला पशुपालन कार्यालय में वेतन और अन्य सरकारी मदों में फर्जीवाड़ा कर अवैध निकासी का बड़ा खेल खेला गया है. इन दोनों ही मामलों में संबंधित थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है, और पुलिस कार्रवाई करते हुए कुछ दागी सरकारी कर्मियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है. वहीं, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में भी वेतन व अन्य मदों में बड़े स्तर पर अवैध सरकारी धन की निकासी की बात सामने आई है. यहां प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद चाईबासा उपायुक्त ने मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मजबूत अनुशंसा की है.

बैंकों की भूमिका को खंगालेगी समिति

प्रधान सचिव अमिताभ कौशल के नेतृत्व वाली यह आठ सदस्यीय समिति मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर बिंदुओं पर जांच केंद्रित करेगी.

  • अवैध निकासी के लिए जालसाजों द्वारा किस प्रकार की प्रक्रिया और लूपहोल्स का इस्तेमाल किया गया.
    इस पूरे वित्तीय घपले में किन अधिकारियों और बाबुओं की प्रत्यक्ष या परोक्ष (Direct or Indirect) भूमिका रही.
  • सरकारी बिल (विपत्र) तैयार करने और उसे कोषागार से पास कराने में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर (कुबेर/ई-कल्याण/जेकैप्स आदि) में क्या तकनीकी कमियां थीं, जिसका फायदा ठगों ने उठाया.
  • फर्जी निकासी के पैसों को क्लियर करने में बैंकों की क्या भूमिका रही.
  • अवैध रूप से निकाली गई करोड़ों की सरकारी राशि की रिकवरी कैसे हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या तकनीकी व प्रशासनिक सुधार किए जाएं.

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